- कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 1984 सिख विरोधी दंगों के मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी
- दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी
- सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में उनको दोषी ठहराया गया था
कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों के सबसे चर्चित मामलों में रहा है. करीब 34 साल तक चले कानूनी घटनाक्रम के बाद दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद से वह तिहाड़ जेल में बंद थे. सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 दंगों से जुड़ा एक और मामला दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके का था. इसमें 1 नवंबर 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या का आरोप था.
इस मामले में अदालत ने 12 फरवरी 2025 को सज्जन कुमार को दोषी ठहराया था. इस मामले में हत्या, दंगा, घातक हथियारों से दंगा, आगजनी, लूट और अन्य अपराधों से जुड़ी धाराओं के तहत उन्हें दोषी पाया गया था. इसके बाद 25 फरवरी 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें इस मामले में भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी. यह उनकी दूसरी उम्रकैद की सजा थी.
हत्या के मामले में दोषी करार
इस मामले में पीड़ित पक्ष के वकील एचएस फुल्का ने कई जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि जसवंत सिंह और तरुणदीप की हत्या से पहले उनको बुरी तरह पीटा गया था. उन्होंने कहा कि जसवंत की पत्नी, बेटी और भाई की बेटियों को भी भीड़ ने काफी पीटा था. उन्होंने बताया था कि इस भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे.
जसवंत सिंह की बेटी इस मामले में पीड़ित भी थीं और गवाही भी दी थी. उन्होंने बताया था कि 1 नवंबर 1984 की शाम को शाम साढ़े चार बजे भारी भीड़ आई थी. उन्होंने कहा था कि भीड़ ने उनके घर पर हमला कर दिया. उन्होंने बताया कि सैकड़ों की संख्या में लोग ईंट और लाठियों से हमला किया था. भीड़ ने सभी की पिटाई शुरू कर दी थी.
सज्जन कुमार पर था भीड़ को उकसाने का आरोप
जस्टिस जेडी जैन और जल्टिस डीके अग्रवाल के सामने मृतक जसवंत सिंह की पत्नी ने बयान दर्ज कराया था. ये बयान 1991 में दर्ज कराया गया था. उन्होंने एक पत्रिका में सज्जन कुमार की तस्वीर देखकर उनकी पहचान की थी. उन्होंने कहा था कि सज्जन कुमार भीड़ को उकसा रहे थे.
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई थी हिंसा
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी. हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़क गई. दिल्ली में कई जगह भीड़ ने सिख परिवारों को निशाना बनाया, घर और दुकानें जलाई गईं और बड़ी संख्या में लोगों की हत्या हुई. इन्हीं दंगों के दौरान दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हुई हत्याओं को लेकर बाद में कई मुकदमे दर्ज हुए. सज्जन कुमार पर आरोप लगा कि वह भीड़ को भड़काने और हिंसा में उसकी भूमिका रही. हालांकि, इन मामलों में उन्हें दोषी ठहराने में कई दशक लग गए.
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