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पहली बार अपना CM बनने के बाद भाजपा ने तैयार किया प्लान, 'महाप्रशिक्षण अभियान' से क्या हासिल होगा?

बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनने के बाद अब भाजपा ने अपना फोकस और बढ़ा दिया है. दो दिन का भाजपा का 'महाप्रशिक्षण अभियान' हो रहा है. भाजपा इसके जरिए खुद को बिहार में मजबूत करना चाह रही है.

पहली बार अपना CM बनने के बाद भाजपा ने तैयार किया प्लान, 'महाप्रशिक्षण अभियान' से क्या हासिल होगा?
बिहार में सम्राट चौधरी बीजेपी के पहले सीएम हैं. (फाइल फोटो)
IANS
  • बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी ने बड़े महाप्रशिक्षण अभियान का आयोजन किया है
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम में सोशल मीडिया, चुनाव प्रबंधन और जनसंपर्क जैसे विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित होंगे
  • भाजपा का उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत कर सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है
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पटना:

बिहार में सरकार बनने के बाद अब भाजपा संगठन को मजबूत करने में जुट गई है. इसी कड़ी में शनिवार और रविवार को बिहार भाजपा का बड़ा 'महाप्रशिक्षण अभियान' हो रहा है. इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई बड़े नेता शामिल होंगे. बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पार्टी का पहला बड़ा सांगठनिक कार्यक्रम माना जा रहा है.

भाजपा इस अभियान के जरिए कार्यकर्ताओं को नई राजनीतिक रणनीति और संगठन की जिम्मेदारियों के बारे में प्रशिक्षण देगी. पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और कार्यकर्ताओं को ज्यादा सक्रिय बनाने पर रहेगा.

इस अभियान में क्या होगा?

सूत्रों के मुताबिक इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सोशल मीडिया, चुनाव प्रबंधन, जनसंपर्क और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने जैसे विषयों पर अलग-अलग सत्र होंगे. भाजपा नेतृत्व चाहता है कि कार्यकर्ता सिर्फ पार्टी के कार्यक्रमों तक सीमित न रहें, बल्कि सरकार के काम को भी गांव-गांव तक पहुंचाएं.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पार्टी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है. लंबे समय तक भाजपा बिहार में गठबंधन की सहयोगी पार्टी की भूमिका में रही, लेकिन अब वह खुद को मुख्य राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करना चाहती है. यही वजह है कि संगठन को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है.

इस महाप्रशिक्षण अभियान को आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है. भाजपा चाहती है कि हर बूथ पर मजबूत और प्रशिक्षित कार्यकर्ता मौजूद रहें. पार्टी गांव और पंचायत स्तर तक नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है.

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जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश

जातीय और सामाजिक समीकरण को लेकर भी भाजपा नई रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी गैर-यादव पिछड़ा वर्ग, अतिपिछड़ा (EBC), महादलित और युवा वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. भाजपा का मानना है कि अब बिहार की राजनीति सिर्फ जाति के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन, नेतृत्व और सरकारी योजनाओं के असर पर भी तय होगी.

भाजपा यह भी समझती है कि बिहार में RJD का सामाजिक आधार अभी भी मजबूत है. खासकर मुस्लिम-यादव समीकरण के कारण RJD कई इलाकों में प्रभाव बनाए हुए है. ऐसे में भाजपा गैर-यादव OBC और EBC वोटरों को ज्यादा मजबूती से अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

विपक्ष का हमला- चुनावी तैयारी में लग गई भाजपा

विपक्ष इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा पर हमला भी कर रहा है. RJD और दूसरे विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार बनने के तुरंत बाद भाजपा चुनावी तैयारी में लग गई है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता के मुद्दों से ज्यादा संगठन और राजनीति पर ध्यान दे रही है.

हालांकि भाजपा इसे सामान्य संगठनात्मक कार्यक्रम बता रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि मजबूत संगठन किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत होता है और कार्यकर्ताओं को समय-समय पर प्रशिक्षण देना जरूरी है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह महाप्रशिक्षण अभियान केवल संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार में भाजपा के नए राजनीतिक दौर का संकेत भी है. पार्टी अब बिहार में लंबे समय तक मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाने की तैयारी में दिखाई दे रही है.

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