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महाराष्‍ट्र के बाद कर्नाटक में भी 'एनर्जी ड्रिंक्स' पर बैन की मांग, जानें- क्‍या है पूरा 'स्ट्रिंग' विवाद

कर्नाटक में भी स्‍कूल और कॉलेजों के बाहर 'एनर्जी ड्रिंक्‍स' बैन करने की मांग हो रही है. कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष शशीधर कोसम्बे ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर 'स्ट्रिंग' एनर्जी ड्रिंक्स और अन्य नशीले उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की है.

महाराष्‍ट्र के बाद कर्नाटक में भी 'एनर्जी ड्रिंक्स' पर बैन की मांग, जानें- क्‍या है पूरा 'स्ट्रिंग' विवाद
शशीधर कोसम्बे ने चिंता जताई कि ऐसे एनर्जी ड्रिंक्स के पीने से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है
बेंगलुरु:

महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी स्कूलों के पास स्टिंग' जैसे हाई एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की जा रही है. कर्नाटक बाल अधिकार आयोग के पूर्व प्रमुख शशीधर कोसम्बे ने कर्नाटक सरकार से स्कूलों और कॉलेजों के पास 'स्ट्रिंग' एनर्जी ड्रिंक्स पर रोक लगाने की अपील की है. एनर्जी ड्रिंक्स से जुड़े कुछ वीडियो सामने आने के बाद ये पूरा मामला सामने आया, जिनमें कहा जा रहा है कि इनमें कैफीन और अन्य उत्तेजक तत्वों की मात्रा इतनी अधिक है कि यह युवाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. एनर्जी ड्रिंक्स पर खड़े हुए विवाद के बाद एफएसएसएआई ने कई एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स को नोटिस भेजा है. हाल ही में भेजे नोटिस में प्राधिकरण ने रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, एड्रेनालिने रश एनर्जी ड्रिंक, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक, मॉन्स्टर एनर्जी, कैंपा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट, हैल एनर्जी ड्रिंक को नोटिस भेजा है.

कर्नाटक में भी 'एनर्जी ड्रिंक्स' के बैन की मांग

कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष शशीधर कोसम्बे ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर राज्य सरकार से स्कूलों और कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे में 'स्ट्रिंग' एनर्जी ड्रिंक्स और अन्य नशीले उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की है. लेटर में कोसम्बे ने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में 'स्ट्रिंग' एनर्जी ड्रिंक्स और अन्य लत लगाने वाले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी, और कर्नाटक से भी इसी तरह का नियम लागू करने की अपील की है. 

रोज-रोज पीना बेहद हानिकारक!

शशीधर कोसम्बे ने चिंता जताई कि ऐसे एनर्जी ड्रिंक्स के पीने से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. लेटर के अनुसार, 'इन ड्रिंक्स में आर्टिफिशियल कलर्स और केमिकल एडिटिव्स हो सकते हैं, ऐसे में इन एनर्जी ड्रिंक्स को नियमित पीना छात्रों के लिए हानिकारक हो सकते है. कोसम्बे ने बच्चों और युवाओं की सेहत और भलाई की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से स्कूल और कॉलेज परिसरों के 500 मीटर के दायरे में 'स्ट्रिंग' एनर्जी ड्रिंक्स के साथ-साथ तंबाकू उत्पादों और अन्य हानिकारक पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की है.

ज्‍यादा 'स्ट्रिंग' पीने क्‍या-क्‍या नुकसान?

स्ट्रिंग समेत अन्‍य एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर सोशल मीडिया पर कई  दावे किए जा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इसमें कैफीन की मात्रा अधिक है, जबकि कुछ इसे स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित बताते हैं. इन दावों ने उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है. भारत में एनर्जी ड्रिंक्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच इन पेयों की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन और शुगर शरीर को अस्थायी ऊर्जा तो देते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में पीने से हृदय गति बढ़ना, नींद न आना, बेचैनी, हाई ब्‍लड प्रेशर और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और कम उम्र के बच्चों को ऐसे एनर्जी ड्रिंक्स से बचने की सलाह दी जाती है.

ज्‍यादा एनर्जी ड्रिंक्‍स पीने के खतरे 

  • हार्ट बीट बढ़ना
  • नींद न आना 
  • अजीब-सी बैचेनी होना 
  • हाई ब्‍लड प्रेशर
  • डिहाइड्रेशन की समस्‍या 
  • गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों, दिल के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदेह 

FSSAI एनर्जी ड्रिंक्‍स कंपनियों को भेजा नोटिस

इस मामले में एफएसएसएआई ने कई एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स को नोटिस भेजा है. प्राधिकरण ने रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, एड्रेनालिने रश एनर्जी ड्रिंक, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक, मॉन्स्टर एनर्जी, कैंपा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट, हैल एनर्जी ड्रिंक को नोटिस भेजा है. FSSAI का कहना है कि भारत में एनर्जी ड्रिंक नाम की कोई अलग फूड केटेगरी या मानक अधिसूचित नहीं है. इसलिए इस तरह की ब्रांडिंग और कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावे नियमों के अनुरूप नहीं है. फूड केटेगरी सिस्टम का मकसद सिर्फ खाद्य पदार्थों का वर्गीकरण है, उत्पाद का नाम या लेबल तय करना नहीं. इसलिए पैकेजिंग या ब्रांडिंग में 'एनर्जी ड्रिंक' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता. FSSAI के मुताबिक, खाद्य उत्पादों पर ऐसे दावे करना स्वीकार्य नहीं हैं, जैसे शरीर में ऊर्जा बढ़ाने का दावा, फोकस या एकाग्रता बढ़ाने का दावा, दिमाग और शरीर को तुरंत सक्रिय करने का दावा, सामान्य कमजोरी दूर करने का दावा, किसी तरह का चिकित्सीय या कार्यात्मक लाभ बताना. FSSAI का कहना है कि फूड सेफ्टी एंड स्‍टैंडडर्स एक्‍स 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) और उससे जुड़े नियमों के तहत खाद्य उत्पादों पर इस तरह के दावे करने की अनुमति नहीं है.

प्राधिकरण के अनुसार कुछ कंपनियां अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 'एनर्जी ड्रिंक' लिखकर बेच रही थीं और ऊर्जा बढ़ाने जैसे दावे कर रही थी. इसे भ्रामक ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले दावे माना गया है. FSSAI ने संबंधित कंपनियों से जवाब मांगा है. अगर कंपनियां नियमों के अनुरूप बदलाव नहीं करती हैं, तो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है. 

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महाराष्ट्र के स्कूलों के पास हाई एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को पूरे राज्य में स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में 'स्टिंग' जैसे हाई एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की घोषणा की. यह युवाओं में ज्‍यादा कैफीन वाले ड्रिंक्स के सेवन को नियंत्रित करने के एक गंभीर प्रयास है. यह निर्देश राज्य विधानसभा में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्री नरहरी जिरवाल ने भाजपा विधायक विक्रम पचपुते द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में जारी किया. विधायक विक्रम पचपुते ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए इस लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक से स्वास्थ्य को होने वाले गंभीर खतरों पर प्रकाश डाला. उन्होंने दावा किया कि हालांकि, यह ड्रिंक तकनीकी रूप से कुछ विनिर्माण नियमों का पालन करता है, लेकिन स्कूली बच्चों को इसकी बहुत ज्‍यादा लत लग जाती है. एफडीए मंत्री नरहरी जिरवाल ने माना कि यह एनर्जी ड्रिंक वास्तव में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बड़े पैमाने पर बेचा जा रहा है. उन्होंने विधानसभा को आश्वासन दिया कि राज्य स्कूलों के आसपास 500 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र को सख्ती से लागू करेगा, जिसमें नशीले पदार्थों के साथ-साथ एनर्जी ड्रिंक्स पर भी रोक होगी.

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