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क्या है SSR, जिसका चुनाव आयोग ने SIR पर विवाद के बीच किया ऐलान; वोटरों को इससे क्या फायदा

SSR के तहत 1 जनवरी की कटऑफ डेट रखी जाती है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि 2027 में होने वाले SSR की कटऑफ डेट 1 जनवरी रहेगी.

क्या है SSR, जिसका चुनाव आयोग ने SIR पर विवाद के बीच किया ऐलान; वोटरों को इससे क्या फायदा
  • चुनाव आयोग ने विशेष सारांश पुनरीक्षण की प्रक्रिया का ऐलान किया है, जिनमें यूपी भी शामिल है
  • SSR प्रक्रिया के तहत 1 जनवरी की कटऑफ डेट पर 18 वर्ष पूर्ण करने वाले मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाता है
  • SSR हर साल होती है और इसके तहत मतदाता सूची में नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है, SIR 20 साल में होती है
नई दिल्ली:

दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी जैसा नया संगठन SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं. इस बीच चुनाव आयोग ने SSR का ऐलान कर दिया है, जिसकी प्रक्रिया यूपी समेत देश के 17 राज्यों में शुरू होगी. इन राज्यों में 5 चुनाव राज्य शामिल हैं. यहां अगले साल की शुरुआत में ही इलेक्शन होंगे- जैसे पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर. दरअसल इस साल चुनाव आयोग की ओर से होने वाली SSR की प्रक्रिया बाकी थी, जिसे अब शुरू किया जाएगा. आइए जानते हैं, क्या है SSR और यह SIR से कितना अलग है...

SIR और SSR में क्या अंतर है

सबसे पहले समझने की बात यह है कि SSR कोई नई चीज नहीं है. यह SIR की तरह 20 साल में होने वाली प्रक्रिया नहीं है बल्कि प्रति वर्ष होती है. अभी SIR को लेकर चर्चाएं काफी तेज हैं. ऐसे में SSR को लेकर भी एक वर्ग चर्चाओं को हवा दे रहा है. कुछ लोग इसे SIR में छूटे नामों को लेकर चल रहे विवाद से भी जोड़ रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. हर विधानसभा के लिए मतदाता सूची तैयार की जाती है. आमतौर पर SSR हर साल होता है, लेकिन कभी-कभार छूट भी जाता है या देरी हो जाती है. इसके तहत 18 साल की आयु पूरी करने वाले ऐसे मतदाताओं को जोड़ा जाता है, जो पहली बार वोट डालने के हकदार होते हैं.

1 जनवरी क्यों होती है SSR की कटऑफ डेट

SSR के तहत 1 जनवरी की कटऑफ डेट रखी जाती है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि 2027 में होने वाले SSR की कटऑफ डेट 1 जनवरी रहेगी. यदि कोई इस तारीख को अपनी आयु के 18 साल पूरे कर लेगा तो उसे मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा और वह आगामी चुनाव में वोट डाल सकेगा. आर्टिकल 324 के तहत इलेक्शन कमिशन के पास यह अधिकार है कि वह संसद और विधानसभा चुनाव के लिए वोटर लिस्ट तैयार करे. मतदाता पंजीकरण अधिकारी के निर्देशन में हर विधानसभा में लिस्ट तैयार की जाती है. इसी के तहत चुनाव आयोग SSR भी कराता है. इसे हिंदी में विशेष सारांश पुनरीक्षण कहा जाता है. इसके तहत चुनाव आयोग तय करता है कि 1 जनवरी कटऑफ डेट होगी. 

अभी क्यों किया चुनाव आयोग ने SSR का ऐलान

चुनाव आयोग ने गुरुवार को SSR के शेड्यूल का ऐलान किया. इसके तहत क्वालिफाइंग डेट 1 जनवरी 2027 रखी गई है. यह उन 17 राज्यों में होगी, जहां SIR की प्रक्रिया 2025 और 2026 में हुई है. इसके अलावा असम में भी यह होगी, जहां SIR नहीं हुआ था. इस शेड्यूल के तहत 2 नवंबर तक पोलिंग स्टेशन तय किए जाएंगे. फिर 12 नवंबर तक वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट आएगा. 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावों और आपत्तियों को दायर करने के लिए समय दिया जाएगा. फिर 28 दिसंबर तक दावों और आपत्तियों को निस्तारित किया जाएगा. इसके बाद अंतिम सूची का प्रकाशन 4 जनवरी, 2027 रहेगा. 

किन 17 राज्यों में होगा SSR

  • चुनाव आयोग ने जिन 17 राज्यों में SSR कराने का फैसला लिया है, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं. 
  • अंडमान-निकोबार, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुदुचेरी, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी यह होना है. 

फॉर्म 6 और फॉर्म 8 में क्या अंतर, कौन किसके लिए

  • SSR की प्रक्रिया के दौरान नए मतदाता फॉर्म 6 के तहत अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं. पहली बार वोट डालने वाले यानी 18 साल की आयु वाले लोग भी इस फॉर्म को भर सकते हैं.

  • अब बात करते हैं, फॉर्म 8 की. यह फॉर्म वोटर लिस्ट में अपना नाम किसी और इलाके में शिफ्ट करने या फिर करेक्शन के लिए भरा जाता है. 
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