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फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है? जिसका PM मोदी ने पेपर लीक के दोषियों को सजा दिलाने के लिए किया जिक्र

पेपर लीक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के बीच पीएम मोदी ने छात्रों को बड़ा भरोसा देते हुए कहा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा.

फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है? जिसका PM मोदी ने पेपर लीक के दोषियों को सजा दिलाने के लिए किया जिक्र
PM मोदी ने पेपर लीक केस के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भरोसा दिया है.
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  • पीएम मोदी ने पेपर लीक केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का ऐलान किया है.
  • गुरुवार सुबह उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
  • जानिए फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है? यह सामान्य कोर्ट से अलग कैसे है?
नई दिल्ली:

Fast Track Court on Paper Leak Case: NEET पेपर लीक पर मचे बवाल और दिल्ली के जंतर-मंतर में हो रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार सुबह-सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को बड़ा भरोसा दिया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि पेपर लीक केस सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा. पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.

पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को लेकर पीएम मोदी ने आगे लिखा कि इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है. 

पीएम मोदी के आश्वासन से साफ है कि अब पेपर लीक मामलों में कोर्ट से जल्दी इंसाफ मिलेगा. जानिए आखिर फास्ट ट्रैक कोर्ट होता क्या है?

फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है? What is Fast Track Court

फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) ऐसी विशेष अदालतें हैं, जिन्हें गंभीर और लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए गठित किया जाता है. इनका उद्देश्य न्यायपालिका में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना है. सामान्य अदालतों की तुलना में इन कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई बहुत तेजी से होती है.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए तय होती है समय सीमा

सामान्यत: फास्ट ट्रैक कोर्ट में ताारीख पर तारीख वाली स्थिति बहुत कम बनती है. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए समय सीमा सीमित की जाती है. आदर्श रूप से इन अदालतों का लक्ष्य 6 महीने या एक निश्चित निर्धारित समय के भीतर मामले का फैसला सुनाना होता है. इनमें अक्सर अनुभवी न्यायिक अधिकारियों या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सेवाएं ली जाती हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया बिना रुकावट आगे बढ़ सके.

भारत में पहली बार 2000 में फास्ट ट्रैक कोर्ट का हुआ गठन

भारत में पहली बार फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना वर्ष 2000 में 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर की गई थी. इन अदालतों का गठन संबंधित राज्य सरकारें अपने राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) के परामर्श से करती हैं. रिपोर्ट के अनुसार देश भर में अभी 860 से अधिक फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रहे हैं.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में कैसे मामले जाते हैं?

फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुख्य रूप से ऐसे मामलों को स्थानांतरित किया जाता है जो सामाजिक रूप से संवेदनशील या जघन्य श्रेणी के हो. जैसे- यौन अपराध- बलात्कार, गैंगरेप और बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न (POCSO एक्ट) से जुड़े मामले. जघन्य अपराध- हत्या, डकैती और आतंकवाद से संबंधित मुकदमे. अब पीएम मोदी ने पेपर लीक केस की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की बात कही है. जो बीते कुछ सालों में लाखों छात्रों से भविष्य से जुड़ा मामला है.

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