पूरब से पश्चिम तक अब डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) बनकर तैयार हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वेस्टर्न DFC के तीन सेक्शन का उद्घाटन कर दिया. इसके साथ ही ईस्टर्न के बाद अब वेस्टर्न DFC भी पूरी तरह शुरू हो गया. वेस्टर्न DFC मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट को यूपी के दादरी से जोड़ेगा.
मंगलवार को गुजरात के वड़ोदरा में इन तीन सेक्शन का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने फ्रेट कॉरिडोर को '21वीं सदी की ऐतिहासिक उपलब्धि' बताया.
वेस्टर्न DFC के आखिरी तीन सेक्शन कुल 326 रूट किलोमीटर में फैले हैं और इन्हें 20,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से तैयार किया गया है. इनके चालू होने से अब पूरा DFC नेटवर्क तैयार हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत की जीवन रेखा है.
क्या हैं ये फ्रेट कॉरिडोर?
2006 में तत्कालीन यूपीए सरकार में दो DFC बनाने को मंजूरी मिली थी. इसके लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) बनी थी. लेकिन किसी न किसी कारण से इसमें देरी होती गई.
अब तक जिस पटरी पर पैसेंजर ट्रेन चलती थी, उसी पर मालगाड़ी भी चलती थी. इसके लिए ही DFC को बनाया गया था. इन रेलवे ट्रैक को सिर्फ मालगाड़ी के लिए ही डिजाइन किया गया है.
Hon'ble Prime Minister Shri Narendra Modi flagged off freight trains for four strategic stations of the Western Dedicated Freight Corridor:
— DFCCIL (@dfccil_india) September 8, 2026
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The occasion marks a significant milestone in strengthening India's… pic.twitter.com/4jwXdTmT0n
अभी कितने DFC हैं?
अभी दो DFC हैं- ईस्टर्न और वेस्टर्न. दोनों की लंबाई 2,843 किलोमीटर है.
- ईस्टर्न DFC: इसकी लंबाई 1,337 किलोमीटर है. ये पंजाब के न्यू सहनेवाल से शुरू होता है और हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार के सोननगर तक जाता है.
- वेस्टर्न DFC: ये वाला कॉरिडोर 1,506 किलोमीटर लंबा है. ये उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से गुजरते हुए नवी मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक जाता है.
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एक और कॉरिडोर बनने वाला है
दो फ्रेड कॉरिडोर बनकर तैयार हो चुके हैं. और अब एक और नया कॉरिडोर बनने वाला है. बजट में तीसरे DFC का ऐलान किया गया था. यह 2,052 किलोमीटर लंबा होगा जो पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत तक जाएगा. यह कॉरिडोर 6 राज्यों- पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ेगा.
क्यों खास हैं ये फ्रेट कॉरिडोर?
सबसे बड़ी खास बात तो यही है कि भारत दुनिया का पहला देश है, जिसके पास पूरी तरह से इलेक्ट्रिफाइड कॉरिडोर है, जिस पर मालगाड़ी डबल-स्टैक कंटेनर लेकर चल सकती हैं. इन कॉरिडोर पर एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर भी रखा जा सकता है.
इस कॉरिडोर को खास इन्हीं के लिए बनाया गया है, इसलिए डबल कंटेनर होने के बाद भी मालगाड़ी की रफ्तार कम नहीं होती है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि एक ट्रेन 250 ट्रकों के बराबर माल ले जा सकती है. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक ट्रेनों से पेट्रोल और डीजल की बचत होगी और प्रदूषण कम होगा.
उन्होंने कहा कि सड़क से माल भेजने में जहां लगभग तीन दिन लगते हैं, वहीं फ्रेट कॉरिडोर से यही काम लगभग 12 घंटों में पूरा हो सकेगा.
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मालगाड़ियों के लिए अलग रेलवे लाइन क्यों?
अभी तक जिस पटरी पर पैसेंजर ट्रेन चलती थी, उसी पर मालगाड़ी भी चलती थी. इस कारण मालगाड़ी की रफ्तार भी धीमी पड़ती थी और पैसेंजर ट्रेन भी लेट होती थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवनरेखा है. इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है. पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी पर मालगाड़ी भी चलती थी. यानी ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट दोनों धीमे थे. लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने स्थिति को बदल दिया है.'
उन्होंने कहा कि 'आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर प्रतिदिन 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं. और पहले जो मालगाड़ी 6.30 घंटे में 100 किमी का सफर तय करती थी. अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किमी का सफर तय कर लेती है.'
और इसका फायदा क्या है?
फ्रेट कॉरिडोर बनने से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी. फडणवीस ने बताया कि भारत की लॉजिस्टिक लागत पहले लगभग 14% थी, जबकि चीन में ये 7% थी. अब भारत में यह लागत घटकर 10% पर आ गई.
उन्होंने दावा किया कि इस फ्रेट कॉरिडोर से हम इस लागत को और घटाकर 7% कर देंगे. इससे हम चीन के साथ मुकाबला कर सकेंगे और ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे.
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