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This Article is From Aug 06, 2018

क्‍या है अनुच्छेद 35 ए और क्‍यों मचा है इसको लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर में बवाल?

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 35 A को लेकर आज नेशनल कॉन्फ्रेंस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.

क्‍या है अनुच्छेद 35 ए और क्‍यों मचा है इसको लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर में बवाल?
फाइल फोटो
  • 35 A को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी
  • नेशनल कॉफ्रेंस ने मांग की है कि इस मामले में उसे भी पक्ष बनाया जाए
  • 35 A का जो विशेष दर्जा जम्मू-कश्मीर को मिला हुआ है, उसे न बदला जाए
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 35 A को लेकर आज नेशनल कॉन्फ्रेंस की याचिका पर सुनवाई होगी. नेशनल कॉफ्रेंस ने मांग की है कि इस मामले में उसे भी पक्ष बनाया जाए. अर्ज़ी में ये भी कहा है कि 35 A का जो विशेष दर्जा जम्मू-कश्मीर को मिला हुआ है, उसे न बदला जाए. इसी मामले में खुफिया विभाग ने अगाह किया है कि सोमवार को अगर सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर से जुड़ी संविधान के अनुच्छेद 35ए कोई 'विपरीत' फैसला देता है तो राज्य की पुलिस में ही 'विद्रोह' हो सकता है. यह जानकारी एनडीटीवी को सूत्रों के हवाले से मिली है. आपको बता दें कि इस अनुच्छेद की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुये इस पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है. वहीं जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों का बंद है. ये बंद रविवार और सोमवार यानी आज रहेगा. प्रदर्शनकारियों ने जम्मू कश्मीर के बाहर के लोगों को राज्य में कोई अचल संपत्ति हासिल करने से रोकने वाले संवैधानिक प्रावधान को बचाने का संकल्प लिया है. व्यावसायिक संगठनों ने अनुच्छेद 35-ए के समर्थन में रविवार को लाल चौक में घंटा घर पर धरना दिया और विरोध मार्च निकाला.

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आइए जानें कि अनुच्छेद 35-ए से जुड़ी जरूरी बातें : 

1- अनुच्छेद 35-ए संविधान का वह आर्टिकल है जो जम्मू कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को पारभाषित कर सके. 

2- साल 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ दिया गया. आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है. 

3- साल 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया. 

4- जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो. 

5- साल 2014 में एक एनजीओ ने अर्जी दाखिल कर इस आर्टिकल को समाप्त करने की मांग की. इस मामले की सुनवाई आज से सुप्रीम कोर्ट में होनी है. 

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क्या है आर्टिकल 35A?
- संविधान में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा
- 1954 के राष्ट्रपति के आदेश से ये संविधान में जोड़ा गया 
- इसके तहत राज्य के स्थायी निवासियों की पहचान 
- जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोग संपत्ति नहीं ख़रीद सकते
- बाहरी लोग राज्य सरकार की नौकरी नहीं कर सकते

आर्टिकल 35A के विरोध में दलील
- यहां बसे कुछ लोगों को कोई अधिकार नहीं
- 1947 में जम्मू में बसे हिंदू परिवार अब तक शरणार्थी
- ये शरणार्थी सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते
- सरकारी शिक्षण संस्थान में दाख़िला नहीं
- निकाय, पंचायत चुनाव में वोटिंग राइट नहीं
- संसद के द्वारा नहीं, राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया आर्टिकल 35A

VIDEO: क्या है अनुच्छेद 35-ए पर विवाद?


 
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Article 35A, Jammu And Kashmir, Separatists Called Bandh, Supreme Court
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