भोपाल में रिहायशी कॉलोनियों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भोपाल नगर निगम ने कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी है और शहरभर में बड़े पैमाने पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं. कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच समिति की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए निगम की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. ऐसे में हजारों दुकानदारों, क्लीनिक संचालकों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सामने सीलिंग का खतरा मंडरा रहा है.
रहवासी और व्यापारी आमने-सामने
शहर में इन दिनों अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है. एक तरफ व्यापारी संगठन रिहायशी क्षेत्रों में वर्षों से संचालित हो रहे कारोबार को जारी रखने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्थानीय रहवासी चाहते हैं कि उनकी कॉलोनियां केवल आवासीय क्षेत्र के रूप में ही बनी रहें. इसी मुद्दे को लेकर कई जगहों पर प्रदर्शन और रैलियां देखने को मिल रही हैं. सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद नगर निगम ने सर्वे का दायरा बढ़ाया और जांच में करीब 62 हजार 500 ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गईं, जहां आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं.
हजारों संपत्तियां निगम के रडार पर
नगर निगम ने चिन्हित संपत्तियों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. बुधवार को छह अलग-अलग क्षेत्रों में 557 नोटिस जारी किए. इनमें नरेला विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 264 और हुजूर क्षेत्र में 125 नोटिस दिए. निगम अधिकारियों का कहना है कि सर्वे और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
रोजाना जारी हो रहे सैकड़ों नोटिस
कार्रवाई को तेज करने के लिए नगर निगम ने 20 विशेष टीमें बनाई हैं. प्रत्येक टीम में चार अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं. कुल 80 लोगों को सर्वे, सत्यापन और नोटिस वितरण के काम में लगाया है. निगम हर विधानसभा क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 500 नोटिस जारी कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और किसी भी मामले में लापरवाही नहीं बरती जाएगी.
मास्टर प्लान को लेकर बढ़ी नाराजगी
व्यापारियों का आरोप है कि सरकार लंबे समय से नया मास्टर प्लान लागू नहीं कर सकी है, जिसका खामियाजा अब व्यवसायियों को भुगतना पड़ रहा है. व्यापारी संघ लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं और कार्रवाई को उनके रोजगार पर सीधा हमला बता रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों से चल रहे प्रतिष्ठानों पर अचानक कार्रवाई करना हजारों परिवारों की आजीविका को प्रभावित करेगा.
रहवासियों ने कार्रवाई का किया समर्थन
दूसरी ओर कई कॉलोनियों के रहवासी निगम की कार्रवाई के समर्थन में हैं. उनका कहना है कि मकानों में दुकानें, कैफे, क्लीनिक और ऑफिस खुलने से ट्रैफिक, पार्किंग और शोर-शराबे की समस्याएं लगातार बढ़ी हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो कॉलोनियों का मूल स्वरूप पूरी तरह खत्म हो जाएगा. कुछ रहवासियों ने तो यहां तक कहा है कि यदि नगर निगम ने कार्रवाई में देरी की तो वे सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे.
3316 नोटिस जारी, सीलिंग की तैयारी
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 3316 नोटिस जारी किए जा चुके हैं. इनमें से 429 मामलों में 24 घंटे का अंतिम सूचना-पत्र जारी किया जाना बाकी है. 15 जून से 5 अगस्त तक 1018 नोटिस, 5 अगस्त से 12 अगस्त तक 1163 नोटिस और 13 अगस्त को अकेले 1135 नोटिस जारी किए. निगम ने 1049 नोटिसों की सूची सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तुत की है. हालांकि सीलिंग की अंतिम तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन नोटिसों की अवधि समाप्त होने के बाद कभी भी कार्रवाई शुरू हो सकती है.
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