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'दिग्विजय सिंह ने चूना पुतवा दिया था', भोजशाला में प्रतिबंध के दौरान क्या-क्या हुआ था? लोगों ने NDTV को बताया

धार की भोजशाला को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरस्वती मंदिर घोषित किया है. इसके बाद हिंदू पक्ष खुश है. फैसले के बाद NDTV यहां पहुंचा तो लोगों ने कई बातें बताईं. उन्होंने बताया कि यहां कांग्रेस की सरकार में चूना पुतवा दिया गया था.

'दिग्विजय सिंह ने चूना पुतवा दिया था', भोजशाला में प्रतिबंध के दौरान क्या-क्या हुआ था? लोगों ने  NDTV को बताया
हाई कोर्ट ने भोजशाला को सरस्वती मंदिर माना है.
PTI
  • हाई कोर्ट ने धार की भोजशाला को सरस्वती देवी का मंदिर घोषित करते हुए मुस्लिमों की नमाज की अनुमति रद्द कर दी
  • भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज ने सन् 1034 में बनवाया था, जिसे खिलजी की फौज ने सन् 1305 में ध्वस्त किया था
  • मंदिर में स्थापित वाग्देवी की प्रतिमा वर्तमान में लंदन के म्यूजियम में रखी है, जो 1875 में खुदाई में मिली थी
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धार:

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार की भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद के विवाद पर शुक्रवार को फैसला दिया. इस फैसले में अदालत ने भोजशाल को सरस्वती मंदिर घोषित कर दिया. हाई कोर्ट ने माना कि यह जगह हिंदू मान्यताओं में 'ज्ञान की देवी' के रूप में पूजी जाने वाली वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है. इसके साथ ही, अदालत ने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिमों को यहां पर जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत थी.

इस फैसले के बाद हिंदू खुश हैं और उनका कहना है कि 700 साल के संघर्ष में जीत हासिल हुई है. 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' ने अदालत में दाखिल याचिका में दावा किया था कि भोजशाला असल में परमार वंश के राजा भोजा ने साल 1034 में बनाया गया मंदिर है, जिसे अलाउद्दीन खिलजी की फौज ने सन् 1305 में ढहा दिया था.

अदालत का फैसला आने के बाद अब यहां के लोग खुश हैं. फैसले के बाद NDTV ने भोजशाला पहुंचकर यहां के लोगों से बात की. फैसले पर खुशी जताते हुए कुछ महिलाओं ने कहा, 'मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा... मां सरस्वती सबको अच्छा ज्ञान दें.'

इस मंदिर में जो वाग्देवी की प्रतिमा थी, वह फिलहाल लंदन के एक म्यूजियम है. माना जाता है कि 11वीं सदी में राजा भोज ने इस प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया था. साल 1875 में खुदाई के दौरान यह प्रतिमा मिली थी. 1880 में एक अंग्रेज अधिकारी इसे लंदन ले गया था और तब से वहीं है. एक महिला ने कहा कि 'हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द मां सरस्वी यहां विराजमान हैं. हम कई समय से इसका इंतजार कर रहे हैं.'

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एक महिला ने बताया कि 25-30 साल पहले तक यहां रोज पूजा होती थी. मुस्लिम लोग बाहर नमाज पढ़ते थे. उन्हें जगह कम पड़ने लगी तो हिंदुओं ने अंदर जगह दे दी, लेकिन इन्होंने धीरे-धीरे यहां कब्जा कर लिया.

स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया है कि जब मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार थी तो उन्होंने भोजशाला में चूना पुतवा दिया था और साक्ष्य छिपा दिए थे. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 'जब यहां पूजा करने पर प्रतिबंध लगा था तो दिग्विजय सिंह की सरकार में सारे खंभों को सपाट कर दिया गया था.'

एक व्यक्ति ने बताया कि दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में सारे खंभों को चूना पोत दिया गया था. भाजपा सरकार में सफाई हुई. उन्होंने खंभे दिखाते हुए कहा, 'चूना पोतकर सारे खंभों की आकृतियों को ढंक दिया गया था. सारे खंभों को सपाट कर दिया गया. मशीनों के जरिए इन्हें प्लेन किया गया. एक खंभा छूट गया था, जिसमें आकृति दिखती है.'

लोगों ने मंदिर के अंदर बने उस खंभे को भी दिखाया, जिस पर मां वाग्देवी की प्रतिमा बनी थी. लोगों का दावा है कि इस प्रतिमा पर चूना पोतकर इसे सपाट किया गया.

खंभे पर बनी थी वाग्देवी की प्रतिमा.

खंभे पर बनी थी वाग्देवी की प्रतिमा.

भोजशाला परिसर की दीवारों और खंभों पर कई आकृतियां और शिलालेख हैं, जो बताते हैं कि यह एक मंदिर है. लोगों ने दिखाया कि मंदिर में परमार वंश का चिह्न भी बना हुआ है. 

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एक शख्स ने मंदिर की दीवार पर छपे हाथों को भी दिखाया, जिन्हें लेकर दावा किया जाता है कि जौहर के समय महिलाओं ने खून से सने इन हाथों को छापा था. 

जौहर के वक्त के छपे हाथ.

जौहर के वक्त के छपे हाथ.

लोगों ने बताया कि भोजशाला के ASI सर्वे के दौरान सारी आकृतियां और निशान उभरकर सामने आए हैं. उनका दावा है कि पहले इस पर चूना पोत दिया गया था और इन्हें छिपा दिया गया था. लोगों ने दावा किया है कि मुगलों के दौर में यहां पर जौहर हुआ था, उसी वक्त महिलाओं ने खून से सने हाथ यहां छापे थे. लोगों ने बताया कि जब ASI ने सर्वे किया और केमिकल लगातर चूने को हटाया तो सारे सबूत निकलकर आए.

आज भी कुछ खंभों के ऊपर प्रतिमाएं और आकृतियां दिखती हैं. कुछ पर नक्काशी दिखती है. लोग बताते हैं कि इन नक्काशियों को तोड़ दिया गया और इन पर चूना पोतकर इन्हें सपाट किया गया.

एक शख्स ने दावा किया कि एक खंभे पर गणेश की प्रतिमा थी लेकिन प्रतिबंध के दौरान इसे खंडित किया गया. एक स्तंभ राम दरबार है. राम लक्ष्मण जानकी की प्रतिमा है.

भोजशाला के खंभों पर छपी घंटियां.

भोजशाला के खंभों पर छपी घंटियां.

NDTV की रिपोर्टर को यहां के लोगों ने सबूत दिखाए. उन्होंने बताया कि खंभों पर घंटी बनी हुई है. शंख बने हुए हैं. गणेशजी की प्रतिमा बनी है. मस्जिद में ये सब नहीं होते. 

लोगों ने परिसर में बना 'गोमुख' भी दिखाया. उनका दावा है कि गर्भगृह में मां का स्नान होता था. उसका पानी इस गोमुख से होते हुए एक कूप तक जाता है. लोगों का कहना है कि उस कूप का पानी बहुत मीठा है. 

एक शख्स ने बताया कि सरस्वती मां ने राजा भोज के सपने में आकर बोला था कि मैं यहां पर प्रकट होउंगी, एक कूप बनवाओ. तब राजा ने यहां कूप बनवाया था. लोगों का दावा है कि इस कुएं का पानी पीने से बुद्धि तेज होती है.

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