- पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव के रुझानों में बीजेपी ने टीएमसी को बड़े अंतर से पछाड़ दिया है
- करीब डेढ़ दशक से ममता बनर्जी का राजनीतिक किला इस चुनाव में कमजोर पड़ता हुआ नजर आ रहा है
- प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार चुनाव के दौरान बंगाल में राजनीतिक बदलाव का संकेत पहले ही दे दिया था
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जो आज हो रहा है, वह महज कोई चुनावी उलटफेर नहीं बल्कि सत्ता के लंबे अध्याय के अंत का संकेत माना जा रहा है. साल 2026 के विधानसभा चुनाव में सामने आ रहे रुझानों ने बंगाल की सियासत की तस्वीर पलट दी है. दोपहर 12 बजे तक के रुझानों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 198 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 92 सीटों तक सिमटी हुई नजर आ रही है. करीब डेढ़ दशक से चला आ रहा ममता बनर्जी का राजनीतिक किला इन आंकड़ों के बीच ढहता हुआ दिख रहा है.
जब पीएम मोदी ने बिहार चुनाव में कर दी थी बंगाल की भविष्यवाणी
इस लिहाज से देखें तो बंगाल में यह वही पल है, जिसका संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी पहले दे चुके थे. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक रैली में पीएम मोदी ने कहा था, “गंगा जी बिहार से होती हुई ही बंगाल तक पहुंचती हैं.” हालांकि तब पीएम के उस बयान को लेकर तमाम तरह की शंका थी, लेकिन आज के रुझानों में वही बात राजनीतिक हकीकत बनती दिख रही है. दरअसल, बीजेपी की हालिया चुनावी बढ़त के पीछे बिहार और बंगाल की आपस में जुड़ी राजनीतिक धारा को अहम माना जा रहा है.
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बीजेपी ने आखिर कैसे भेद दिया ममता का मजबूत गढ़
बिहार में बीजेपी की पकड़ मजबूत होने के बाद, पार्टी ने टीएमसी के गढ़ बंगाल में भी संगठनात्मक ढांचा मजबूत किया, बूथ‑लेवल मैनेजमेंट पर फोकस बढ़ाया और टीएमसी की परंपरागत पकड़ वाले इलाकों में सीधी चुनौती पेश की. यही वजह है कि इस बार चुनाव केवल बीजेपी बनाम टीएमसी का नहीं रहा, बल्कि बंगाल की राजनीतिक दिशा तय करने वाली लड़ाई बन गया. इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के उस किले में सेंध लगा दी, जिसे लगभग एक वक्त पर अभेद माना जाने लगा था.
बंगाल चुनाव में क्यों पिछड़ती दिख रही टीएमसी
आज चुनाव परिणा के जो भी रुझान सामने आ रहे हैं वो बताते हैं कि बंगाल के मतदाताओं में एंटी‑इनकंबेंसी, कानून‑व्यवस्था और केंद्र‑राज्य टकराव जैसे मुद्दों ने बड़ी भूमिका निभाई है. जिन सीटों पर कभी टीएमसी अजेय मानी जाती थी, वहीं अब बीजेपी की बढ़त दिखना इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है. ऐसे में पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय लिखे जाने की पूरी संभावना बनती दिख रही है. एक ऐसा अध्याय, जिसकी पटकथा की झलक पीएम मोदी ने पहले ही दे दी थी.
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