जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकी के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बड़ी बात कही है. उन्होंने दो टूक कहा है कि धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है.
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यकों की पहले भी टारगेट किलिंग हुई है. डर की वजह से कई कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ना चाहते थे, लेकिन तब उन्हें अपने कैंप में ही रोक दिया गया था.
उन्होंने आगे कहा, "अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग हुई है. कई कर्मचारी वहां से निकलना चाहते थे, लेकिन तब उन्हें उनके कैंप में रोक दिया गया. क्या इस धमकी को हम हल्के में ले सकते हैं? धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होना जरूरी है."
जानकारी के लिए बता दें कि पिछले हफ्ते ही सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 25 अगस्त तक प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया था. यह फैसला तब लिया गया, जब लश्कर से जुड़े आतंकी संगठन ने एक धमकी भरे पत्र में इन कर्मचारियों को मारने की बात कही थी.
इस पत्र में कुछ कर्मचारियों के नाम और उनके फोन नंबर तक लिखे हुए थे. यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया था. इसके बाद से ही कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में डर का माहौल था.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को इस समय सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है. जिन कर्मचारियों के नाम धमकी वाले पत्र में सामने आए थे, उन्हें भी जम्मू भेज दिया गया है.
एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी अमित कौल ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि धमकी मिलने के बाद से ही पुलिस ने उन्हें काम पर ना जाने की सलाह दी है. वहीं, जो कर्मचारी अभी भी घाटी में हैं, उन्हें घर से बाहर ना निकलने के लिए कहा गया है.
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पुलिस के मुताबिक इन धमकियों के बाद जांच जारी है और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाए जा रहे हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये सावधानी के तौर पर उठाए गए जरूरी कदम हैं. धमकी की जांच जारी है और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत करीब 6,000 कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी दी गई है. 1990 के दशक में अपने घर छोड़कर जा चुके कश्मीरी पंडितों को वापस लाने के लिए इस पैकेज का ऐलान किया गया था.
हालांकि, साल 2022 में जब एक बार फिर टारगेट किलिंग हुई, तो पांच कश्मीरी पंडितों की हत्या हो गई. इसके बाद प्रधानमंत्री पैकेज के कर्मचारियों ने करीब 7 महीने तक बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया. उनकी सीधी मांग थी कि इन सभी कर्मचारियों को जम्मू में स्थानांतरित कर दिया जाए. लेकिन सरकार ने तब उनकी यह मांग नहीं मानी. इसके बजाय उन्हें श्रीनगर और घाटी के दूसरे अपेक्षाकृत सुरक्षित शहरों में शिफ्ट किया गया था.
वैसे, कश्मीर में आतंकियों की टारगेट किलिंग का सिलसिला भी जारी है. 22 जुलाई को ही अनंतनाग में आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी पर काफी करीब से गोली चला दी थी जिससे उसकी मौत हो गई. इसके अलावा, कुलगाम में भी दो प्रवासी मजदूरों को मौत के घाट उतार दिया गया.
इस साल अमरनाथ यात्रा भी तय समय से पहले रोक दी गई. अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी और 28 अगस्त को समाप्त होने वाली थी, लेकिन इस बार 30 जुलाई को पहलगाम वाले रास्ते से यात्रा रोक दी गई. वहीं, 9 अगस्त से पूरी तरह यात्रा रोक दी गई. उस समय अधिकारियों ने इसकी वजह यात्रियों की कम संख्या, खराब मौसम और कुछ मार्गों पर चल रहे मरम्मत कार्य को बताया था.
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