- पीएम स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को धमकी के बाद सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई.
- डर उस समय बढ़ गया जब कुछ कर्मचारियों के नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल्स वाली एक कथित धमकी भरी चिट्ठी सामने आई.
- धमकियों की जांच की जा रही है और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं.
कश्मीर घाटी में हालिया आतंकी हमलों और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिली धमकियों के बाद सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं. सैकड़ों सरकारी कर्मचारियों को एडमिनिस्ट्रेटिव लीव यानी प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया गया है और उन्हें 25 अगस्त तक ड्यूटी पर नहीं आने को कहा गया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस कदम का मकसद 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस से पहले इन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. उन्होंने बताया कि धमकियों की जांच की जा रही है.
आखिर मामला क्या है
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है. पाकिस्तान स्थित लश्कर से जुड़े एक आतंकी संगठन की धमकियों के बाद इनमें से कई कर्मचारी पहले ही जम्मू पहुंच चुके हैं.
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच डर उस समय बढ़ गया जब कुछ कर्मचारियों के नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल्स वाली एक कथित धमकी भरी चिट्ठी सामने आई. सूत्रों के मुताबिक, इस चिट्ठी में जिन लोगों के नाम थे, उन्हें सुरक्षित तरीके से जम्मू भेज दिया गया है.
एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी अमित कौल के मुताबिक, "पुलिस ने कर्मचारियों को ड्यूटी पर नहीं आने की सलाह दी है और जो लोग घाटी में अब भी मौजूद हैं उनसे घर से बाहर नहीं निकलने को कहा गया है.
पुलिस का कहना है कि धमकियों की जांच की जा रही है और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह एक एहतियाती कदम है. पुलिस इन धमकियों की जांच कर रही है और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं."
प्रधानमंत्री के स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत कितने कर्मचारी हैं
2010 में शुरू किए गए प्रधानमंत्री के स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत करीब 6000 कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी दी गई थी. इस योजना का उद्देश्य 1990 में अलगाववादी आंदोलन शुरू होने के बाद अपनी मातृभूमि से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास में मदद करना था. इन कर्मचारियों की घाटी में नियुक्ति को इसी पुनर्वास प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया था.

पहले भी हो चुके हैं कश्मीरी पंडित कर्मचारियों पर हमले
हालांकि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के सामने सुरक्षा की चिंता नई नहीं है. 2022 में आतंकवादियों ने इन कर्मचारियों को टारगेट किया गया था. तब किए गए हमले में पांच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की मौत हुई थी. तब प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों ने करीब सात महीने तक विरोध प्रदर्शन किया था. उनकी मांग थी कि उन्हें जम्मू में ट्रांसफर और पोस्टिंग दी जाए.
हालांकि तब सरकार ने उन्हें जम्मू में पोस्ट करने से इनकार कर दिया लेकिन कश्मीर और घाटी के ही अन्य प्रमुख कस्बों में अपेक्षाकृत सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट और पोस्ट कर दिया गया.
हालिया हमलों के बाद क्यों बढ़ी चिंता
22 जुलाई को अनंतनाग में हुए हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हुई थी. इसके बाद कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर भी हमला हुआ. इन घटनाओं के बाद सुरक्षा को लेकर यह चिंता बढ़ी कि आतंकी घाटी में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर आगे भी हमले करने की कोशिश कर सकते हैं. इस वजह से अल्पसंख्यकों और पंडित कर्मचारियों के रहने वाले इलाकों में सुरक्षा और गश्त बढ़ाई गई.

अमरनाथ यात्रा भी तय समय से पहले रोकी गई
सुरक्षा चिंताओं के बीच अमरनाथ यात्रा को भी उसके निर्धारित समापन से कुछ सप्ताह पहले छोटा और स्थगित कर दिया गया. अधिकारियों ने 9 अगस्त से यात्रा रोकने के पीछे यात्रियों की कम संख्या, मौसम की चेतावनी और यात्रा मार्गों पर मरम्मत के काम को वजह बताया है.
3000 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए
22 जुलाई से घाटी में सुरक्षा के लिए एक बड़ा अभियान भी चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान में 3000 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है. हालांकि, कुछ अनुमानों में यह संख्या इससे कहीं अधिक बताई गई है.
पुलिस इन गिरफ्तारियों में शामिल लोगों को 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' बताया है. इस शब्द का इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए किया जाता है जो छिपकर आतंकवादियों की मदद करते हैं.
पुलिस का कहना है कि आतंकी संगठनों में स्थानीय लोगों के शामिल होने की संख्या अब लगभग शून्य हो गई है. लेकिन दूसरी तरफ बड़ी संख्या में 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' की गिरफ्तारियां यह सवाल भी खड़ा करती हैं कि घाटी में आतंकी नेटवर्क और उसे मिलने वाली कथित मदद की स्थिति जमीन पर वास्तव में कैसी है?
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