
वक्फ बिल पेश करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में वक्फ में ऐसे बदलाव किए गए जिससे यह बदलाव जरूरी हो गया था. उन्होंने कहा कि वक्फ में तत्कालीन यूपीए सरकार ने ऐसे बदलाव किए कि मौजूदा संसद तक पर वक्फ ने दावा किया था. अगर मोदी सरकार न आती तो बहुत संभव है कि डिनोटिफाई की गई बाकी संपत्तियों की तरह संसद की यह भूमि भी होती. जानिए रिजिजू ने क्या क्या कहा...
- 2013 में बदलाव हुआ कि देश में कोई भी आदमी चाहे वह किसी भी धर्म का हो वक्फ क्रिएट कर सकता है.
- उसमें बदलाव कर कोई भी वक्फ का प्रावधान उस समय यूपीए सरकार ने किया.
- शिया बोर्ड में शिया और सुन्नी बोर्ड में सुन्नी ही रहेंगे. बोर्ड में उसके ही लोग रहेंगे यह प्रावधान किया गया.
- प्रावधान लगाया गया कि वक्फ का प्रावधान देश के ऊपर किसी भी कानून से ऊपर रहेगा. देश में ऐसा कैसे चल सकता है.
- 2013 में यह बिल जबरन पास करवाया गया.
- 1970 में दिल्ली के अंदर केस चल रहा था. इन प्रावधानों के बाद दिल्ली वक्फ बोर्ड ने दिल्ली की 123 प्रॉपर्टी पर दावा किया. यूपीए सरकार ने डिनोटिफाइ कर उसे वक्फ को दे दी.
- अगर यूपीए सरकार रहती तो न जाने कौन कौन सी प्रॉपर्टी वक्फ को सौंप दी जाती.
'क्यों उछल रहे हो...' वक्फ बिल क्यों लाए, जानिए रिजिजू ने संसद में क्या बताया#WaqfBill | #WaqfAmendmentBill | #KirenRijiju pic.twitter.com/KMWyTHHvcA
— NDTV India (@ndtvindia) April 2, 2025
रिजिजू ने कांग्रेस को सुनाते हुए कहा कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने चुनाव से ठीक पहले 5 मार्च 2014 को दिल्ली में 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया था. कांग्रेस को लगा कि इससे वोट मिल जाएंगे. लेकिन कांग्रेस उसके बाद भी चुनाव हार गई. रिजिजू ने कहा कि वक्फ वही बना पाएगा जो 5 साल इस्लाम की प्रैक्टिस की हो. वक्फ में कौन कौन रहेगा. इस पर भी उन्होने बताया कि वक्फ काउंसिल में 4 गैरमुस्लिम भी शामिल रहेगा. इसमें से दो महिलाएं भी रहेंगी.
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