- काशी के मणिकर्णिका घाट को महाश्मशान के रूप में जाना जाता है जहां चिता की अग्नि कभी ठंडी नहीं होती है
- पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने इस घाट को बसाया और यहां मृत्यु को मंगल माना जाता है
- मणिकर्णिका घाट का पुनर्निर्माण नगर निगम के तहत कार्यदायी संस्था द्वारा 18 करोड़ की लागत से किया जा रहा है
अद्भुत है भगवान भोले की नगरी काशी का मणिकर्णिका घाट और अनूठी है इस घाट से जुड़ी मान्यताएं और पौराणिक कहानियां. इस घाट को महाश्मशान कहा जाता है. कहते हैं यहां चिता की अग्नि कभी ठंडी नहीं होती. मान्यता है कि मान्यता है कि औघड़ रूप में शिव यहां विराजते हैं. पौराणिक ग्रंथों में वर्णित इस घाट की इस घाट को अनादि काल से मौजूद बताया जाता है.
जब ये घाट बसा तो गंगा नहीं थी...
कहते हैं भगवान शिव ने मणिकर्णिका घाट अपने रहने के लिए बसाया था. जब ये घाट बसा तो गंगा नहीं थी, बल्कि एक कुंड हुआ करता था. स्नान करते वक्त भगवान शिव के कान का कुंडल उस कुंड में गिर गया और तब से इसका नाम मणिकर्णिका पड़ गया. अब चूंकि भगवान शिव यहां वास करते हैं, इसलिए यहां मृत्यु को भी मंगल माना जाता है.
-
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
बिकिनी सीन करने में कृति सेनन को क्यों लगे 12 साल? बोलीं- 6-7 साल पहले ऐसा नहीं कर पातीं -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद है ये बॉलीवुड फिल्म, कृति सेनन के सामने सुनाया फेमस डायलॉग -
‘AI एक्टर्स इंसानी एक्टर्स की जगह नहीं ले सकते’, बोलीं एलाइन वैन डेर वेल्डन -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न -
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज

सैंकड़ों सालों से इस घाट पर चिताएं जलती आ रही हैं. जैसे-जैसे वक्त बदला इसम घाट के स्वरूप में भी बदलाव हुआ, लेकिन इस बार बड़ा बदलाव नजर आने वाला है. महाश्मशान घाट के पुनर्विकास का कार्य शुरू हो चुका है. ये कार्य सीएसआर फंड से 18 करोड़ रुपये में किया जाना है. इस कार्य को नगर निगम की देख-रेख में कार्यदायी नाम की संस्था कर रही है.
ये भी पढ़ें :- मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को लेकर क्यों सियासत गर्म है, जान लीजिए हर बात

29 हजार वर्गमीटर एरिया में काम कराया जाना है
मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण का काम करीब 29 हजार वर्गमीटर एरिया में काम कराया जाना है. मिट्टी दलदली है, इसलिए पहले 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है, जिससे बाढ़ के वक्त किसी भी तरह की दिक्कत न हो. अब पक्के घाटों के पत्थरों को तोड़ा जा रहा है और बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा जा रहा.
ये भी पढ़ें :- मणिकर्णिका घाट पर चिता ठंडी होने के बाद राख से क्यों लिखा जाता है 94? जान लीजिए वजह

...ताकि चिता की राख घरों में न जाए
मॉनसून में पूरा घाट जलमग्न होता है, लेकिन पुनर्निमाण के बाद ये मुश्किल दूर हो जाएगी. गंगा के अधिकतम जलस्तर से ऊपर दो स्तर प्लेटफॉर्म तैयार कराए जाएंगे. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बताते हैं कि निचले स्तर पर 18 प्लेटफॉर्म होंगे और ऊपर वाले स्तर पर 19. चिता जलाते वक्त निकलने वाले धुएं के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं. इस श्मशान घाट पर 25 मीटर ऊंची चिमनी लगाई जाएगी, ताकि चिता की राख हवा के साथ उड़ जाए और आसपास के घरों में न जाए. दाह संस्कार क्षेत्र में वेटिंग एरिया और चेंजिंग रूम का भी निर्माण कराया जा रहा है.

पुनर्निर्माण के बाद मणिकर्णिका घाट पर आखिरी संस्कार से जुड़े हर रिवाजों के लिए अलग इंतजाम किए जा रहे हैं. शवों के स्नान के लिए जलकुंड के साथ मुंडन क्षेत्र बनाया जा रहा है. साथ ही लकड़ी भंडारण क्षेत्र का निर्माण किया जाएगा. इस घाट पर दो सामुदायिक शौचालय का निर्माण भी कराया जाएगा. पूरा निर्माण कार्य चुनार और जयपुर के पत्थरों से किया जाएगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं