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This Article is From Jan 01, 2025

वाराणसी में 'बागबान' की असली कहानी... बेटा बिजनेसमैन, बेटी वकील, करोड़ों की प्रोपर्टी पर वृद्धाश्रम में पिता का निधन

अस्सी करोड़ के मालिक और 2023 में पद्मश्री से सम्मानित आध्यात्मिक साहित्यकार की मृत्यु के बाद वह अपने बच्चों के चार कंधे के लिए भी तरस गए. उनकी मौत की सूचना जब उनके परिजनों को दी गई तो उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया.

वाराणसी में 'बागबान' की असली कहानी... बेटा बिजनेसमैन, बेटी वकील, करोड़ों की प्रोपर्टी पर वृद्धाश्रम में पिता का निधन
नई दिल्ली:

बागबान फिल्म तो हम सभी ने देखी है और इस फिल्म को देखकर बहुत सारे लोग इमोशनल भी हुए होंगे लेकिन असल जिंदगी में एक बागबान जैसा मामला सामने आया है. दरअसल, वाराणसी के रहने वाले श्रीनाथ खंडेलवाल ने एक वृद्धाश्रम में ही अपनी अंतिम सांसे ली और उनके परिजन उन्हें कंधा देने के लिए भी नहीं पहुंचे.

बता दें कि श्रीनाथ खंडेलवाल ने सौ से अधिक किताबों लिखी हैं और वह अस्सी करोड़ की संपत्ति के मालिक थे. उनकी 80 वर्ष की आयु में एक वृद्धाश्रम में गुमनाम सी मौत हो गई. वाराणसी के एक वृद्धाश्रम में रह रहे इस बुजुर्ग लेखक का अंत ऐसा होगा, ये शायद किसी ने नहीं सोचा था. दरअसल, काशी के रहने वाले श्रीनाथ खंडेलवाल का भरा पूरा परिवार है. उनके दो बेटे और एक बेटी है. उनका बेटा बिजनेसमैन है और बेटी सुप्रीम कोर्ट में वकील है. वह साहित्यकार होने के साथ एक आध्यात्मिक पुरुष भी थे. 

शिव पुराण और तंत्र विद्या पर लिखी थीं श्रीनाथ ने किताबें

उन्होंने शिव पुराण और तंत्र विद्या पर काफी किताबें लिखी थी. दिन रात साहित्य और अध्यात्म में उनका दिन बीतता था. इसका फायदा उठा कर उनके बेटे और बेटी ने उनकी सारी जायजाद ले कर उनको बीमार अवस्था मे बेसहारा छोड़ दिया. इसके बाद समाज सेवी अमन आगे आए और उनको उसने काशी कुष्ठ वृद्धा आश्रम मे रखवाया और करीब दस महीने वो इस वृद्धा आश्रम मे रहे जहां उनकी निशुल्क सेवा होती रही और वो काफी खुश थे लेकिन एक बार भी कोई परिजन वहां उनका हाल लेने नहीं आए.

पद्मश्री से भी किया गया था सम्मानित

अस्सी करोड़ के मालिक और 2023 में पद्मश्री से सम्मानित आध्यात्मिक साहित्यकार की मृत्यु के बाद वह अपने बच्चों के चार कंधे के लिए भी तरस गए. उनकी मौत की सूचना जब उनके परिजनों को दी गई तो उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया. अंत में समाजसेवी अमन ने चंदा जुटा कर उनका अंतिम संस्कार किया. 

वृद्धाश्रम में हुआ था श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन

वाराणसी के रहने वाले साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का शनिवार की सुबह निधन हुआ था. 80 साल की उम्र में उन्‍होंने एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. श्रीनाथ खंडेलवाल ने करीब 400 किताबें लिखीं थी और अनुवाद किया था और वह 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक थे. बच्‍चों की दुत्‍कार के चलते वे लंबे समय से सारनाथ स्थित काशी कुष्‍ट सेवा संघ वृद्धाश्रम आश्रम में रह रहे थे. उनकी मौत के बाद भी उनका कोई संतान उन्हें मुखाग्नि देने तक नहीं आया. 

वैभवशाली था श्रीनाथ खंडेलवाल का जीवन

श्रीनाथ खंडेलवाल का जीवन कभी वैभवशाली था. श्रीनाथ खंडेलवाल ने अपनी लेखनी से भारतीय साहित्य को समृद्ध किया. उन्होंने शिव पुराण और मत्स्य पुराण जैसे अनमोल ग्रंथों का हिंदी अनुवाद किया है. उनकी लिखी 3000 पन्नों की मत्स्य पुराण की रचना आज भी विद्वानों के बीच चर्चित है. उन्होंने न केवल धार्मिक ग्रंथों पर काम किया, बल्कि आधुनिक साहित्य और इतिहास पर भी कई किताबें लिखीं. उनकी पुस्तकें हिंदी, संस्कृत, असमिया और बांग्ला जैसी भाषाओं में उपलब्ध हैं. जीवन के अंतिम दिनों में वे नरसिंह पुराण का अनुवाद पूरा करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह अंतिम इच्छा अधूरी रह गई. यही नहीं, उन्होंने अपने जिस बेटे-बेटी पर अपनी जिंदगी निछावर कर दी, बताया जाता है की उन्होंने ही उन्हें घर से निकाल दिया जिसके बाद से वो काशी कुष्ठ सेवा संघ के वृद्धाश्रम में रह रहे थे.उनका बेटा एक व्यवसायी है और बेटी सुप्रीम कोर्ट में वकील, लेकिन उन्हों ने अपने पिता से मुंह मोड़ लिया. 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक श्रीनाथ खंडेलवाल को वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर होना पड़ा. (पीयूष आचार्य की रिपोर्ट)

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