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राजू पाल हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोषी आबिद को मिली सशर्त जमानत, आजीवन कारावास की काट रहा है सजा

साल 2005 के बहुचर्चित बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मामले के दोषी आबिद की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता की दलीलों को सुनने के बाद यह राहत दी.

राजू पाल हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोषी आबिद को मिली सशर्त जमानत, आजीवन कारावास की काट रहा है सजा
राजू पाल हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोषी आबिद को मिली सशर्त जमानत
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Raju Pal Murder Case Latest Update: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सबसे चर्चित सियासी हत्याकांडों में से एक बहुचर्चित बहुजन समाज पार्टी ( BSP) विधायक राजू पाल मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ा अपडेट सामने आया है. हाईकोर्ट ने इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी आबिद को बड़ी राहत देते हुए उसकी सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. कोर्ट ने यह आदेश दोषी की ओर से दाखिल की गई आपराधिक अपील पर सुनवाई के बाद जारी किया.

दोषी आबिद की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता ने पक्ष रखा. उन्होंने कोर्ट के सामने मामले से जुड़े कई कानूनी पहलुओं और तथ्यों को पेश करते हुए जमानत की अर्जी पर पुरजोर बहस की. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ डिवीजन बेंच ने इन तमाम तथ्यों और दलीलों को गुण दोष के आधार पर परखने के बाद आबिद की सशर्त जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया.

25 जनवरी 2005 घटी थी खौफनाक वारदात

यह पूरा मामला करीब दो दशक पुराना है. 25 जनवरी 2005 को इलाहाबाद के धूमनगंज थाना क्षेत्र में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल को सरेआम गोलियों से भून दिया गया था. इस भीषण और दुस्साहसिक हमले में न सिर्फ राजू पाल, बल्कि उनके दो सहयोगियों देवी लाल पाल और संदीप यादव की भी मौके पर ही मौत हो गई थी. वारदात के दौरान तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे. इस हत्याकांड ने उस वक्त उत्तर प्रदेश की सियासत और कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था.

हत्या से CBI जांच तक का सफर

पति की बेरहमी से हत्या के बाद, मृतक विधायक की पत्नी पूजा पाल की शिकायत पर धूमनगंज थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था. शुरुआत में इस हाईप्रोफाइल मामले की तफ्तीश स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाद में इसकी जांच सीबीसीआईडी (CBCID) को सौंप दी गई. मामला यहीं नहीं रुका, पीड़िता के लंबे संघर्ष के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने इस हत्याकांड की नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए. सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए आखिरकार दस अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल किया गया था.

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लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आबिद सहित अन्य आरोपियों को इस जघन्य अपराध का दोषी माना था. निचली अदालत ने आबिद को आईपीसी (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 147 (बलवा), 148 (घातक हथियार से लैस होना), 307 (हत्या का प्रयास) और 302 (हत्या) के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सख्त सजा सुनाई थी. इसी सजा के खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से अब आबिद को सशर्त रिहाई की राहत मिली है.

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