ब्रिक्स देशों ने आपदाओं के दौरान जीवन रक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की है. भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में तीन दिवसीय ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण समूह (DRRG) की बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल को सभी ने सराहा. तीन दिवसीय इस अहम बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित 11 ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए. बैठक का मकसद आपदा जोखिम को कम करने के नए-नए तरीकों के अनुभवों का साझा करना था.
हर देश ने रखा अपना-अपना मॉडल
DRRG की बैठक के दौरान विभिन्न देशों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने नए और सक्सेसफुल मॉडल शेयर किये. इस दौरान उत्तराखंड की ओर से सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (आईपीएस) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया. दोनों अधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता विकास, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर अपनी बात रखी. इस दौरान उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों, और तीर्थयात्रा से जुड़े जोखिमों को विस्तार से रखा गया. साथ ही राज्य में कई एजेंसियों को आपसी तालमेल, पूर्व चेतावनी तंत्र और क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम को भी विस्तार से बताया.
सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा प्रबंधन का भी जिक्र
खासतौर से सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा प्रबंधन कार्यों को उत्तराखंड के सफल आपदा प्रबंधन मॉडल के रूप में सामने रखा गया. बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बताया. बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम न्यूनीकरण उपायों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की विशेष सराहना की गई. वहीं, उत्तराखंड एसडीआरएफ की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतरीन आपदा प्रतिक्रिया मॉडल के रूप में पेश किया गया.
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सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं रह सकता. इसके लिए पूर्व तैयारी, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, प्रशिक्षित बलों की उपलब्धता और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है. वहीं, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के निर्देशन में राज्य में संचालित गतिविधियों को भी प्रतिनिधियों के साथ साझा किया गया. यूएलएमएमसी निदेशक शांतनु सरकार ने बताया, "भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और पूर्व चेतावनी तंत्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण को अधिक प्रभावी बना रहे हैं. भविष्य की आपदा चुनौतियों से निपटने में तकनीक आधारित समाधान निर्णायक भूमिका निभाएंगे."
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