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हजार से ज्यादा मेंबर, जेल नेटवर्क.. अमेरिका की चार्जशीट में खुलासा कितना बड़ा है लॉरेंस बिश्नोई का साम्राज्य

Lawrence Bishnoi Gang: अमेरिकी जांच एजेंसियों ने लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया के गैंग को लेकर चार्जशीट पेश की है. जिसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं और यह नेटवर्क बहुत बड़ा है.

हजार से ज्यादा मेंबर, जेल नेटवर्क.. अमेरिका की चार्जशीट में खुलासा कितना बड़ा है लॉरेंस बिश्नोई का साम्राज्य
लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर अमेरिका में चार्जशीट पेश

भारत के मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टरों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर अमेरिका ने बेहद बड़ा खुलासा किया है. कैलिफोर्निया की यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर 44 पन्नों की फेडरल चार्जशीट में जग्गू भगवानपुरिया गैंग के कई सदस्यों के खिलाफ संगठित अपराध, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की तस्करी, अपहरण, हत्या, फिरौती और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यह चार्जशीट अमेरिकी ग्रैंड जूरी ने दाखिल की है और इसमें कई ऐसे खुलासे किए गए हैं जो पहली बार किसी आधिकारिक अमेरिकी दस्तावेज में सामने आए हैं. 

कभी लॉरेंस बिश्नोई का करीबी था लॉरेंस जग्गू

चार्जशीट के मुताबिक जग्गू भगवानपुरिया कभी लॉरेंस बिश्नोई का बेहद करीबी सहयोगी था. दोनों एक ही अपराधी नेटवर्क का हिस्सा थे. लेकिन समय के साथ जग्गू ने अपना अलग गैंग तैयार कर लिया. इसके बाद उसका नेटवर्क इतना मजबूत हो गया कि वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बन गया. अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि बाद में दोनों गैंग अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के तौर पर काम करने लगे. चार्जशीट में बताया गया है कि भगवानपुरिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप का मुख्य संचालन भारत से होता था, लेकिन इसके सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैले हुए थे. दुनिया भर में गैंग के 1000 से ज्यादा सदस्य और सहयोगी बताए गए हैं. जबकि अकेले अमेरिका में 100 से ज्यादा लोग इस नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे. 

जेल से चलता था पूरा नेटवर्क 

एफबीआई की जांच में सामने आया कि गैंग हत्या या हमले के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर उसकी जिम्मेदारी लेता था. अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि गैंग कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के जरिए अपने दुश्मनों पर झूठे केस दर्ज करवाता था. इसके बाद पीड़ितों को फोन कर कहा जाता था कि अगर पैसा नहीं दिया तो गिरफ्तारी होगी. पैसे देने पर मामला खत्म कराने का लालच दिया जाता था. दस्तावेज में यह भी आरोप है कि एक पंजाब पुलिस अधिकारी गैंग के कहने पर लोगों के खिलाफ झूठे हत्या के केस दर्ज कराने और फिर उनसे उगाही करने में शामिल था.  अमेरिकी जांच के मुताबिक जग्गू भगवानपुरिया भारत की जेल में बंद रहते हुए भी पूरे गैंग का संचालन करता था. वह अवैध मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस का इस्तेमाल कर अमेरिका और कनाडा में बैठे गैंग के सदस्यों को निर्देश देता था. हत्या करनी हो, ड्रग्स भेजनी हो या फिरौती वसूलनी हो, हर बड़े फैसले की मंजूरी वही देता था. 

ड्रग्स से होती थी करोड़ों की कमाई

चार्जशीट में बताया गया है कि गैंग की सबसे बड़ी कमाई ड्रग्स तस्करी से होती थी. दक्षिणी कैलिफोर्निया से हर हफ्ते बड़े ट्रकों के जरिए 100-100 किलो कोकीन और मेथामफेटामाइन अमेरिका के अलग-अलग राज्यों और कनाडा भेजी जाती थी. जांच में सामने आया कि एक खेप में अक्सर 100 किलो से ज्यादा कोकीन होती थी. गैंग दूसरे ड्रग कार्टेल के लिए भी माल ढोता था. कई बार दूसरे कार्टेल की ड्रग्स बीच रास्ते में लूट ली जाती थीं. एक घटना का जिक्र करते हुए चार्जशीट में कहा गया है कि जुलाई 2024 में गैंग ने एक व्यक्ति का अपहरण कर लिया क्योंकि उस पर ड्रग्स की खेप चोरी करने का शक था. उसे बंधक बनाकर पीटा गया और 50 हजार डॉलर देने की मांग की गई. बाद में जग्गू भगवानपुरिया के आदेश पर उसे छोड़ा गया.

बच्चों को बनाया जाता था शूटर

चार्जशीट में कहा गया है कि गैंग गरीब परिवारों के नाबालिग बच्चों को पैसे, विदेश भेजने और गैंगस्टर बनने का सपना दिखाकर भर्ती करता था. कई मामलों में सिर्फ 20 हजार रुपये देकर हत्या कराई जाती थी ताकि पकड़े जाने पर सजा भी कम हो. अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक गैंग के सदस्यों को साफ कहा जाता था कि अगर उन्होंने संगठन छोड़ा या पुलिस की मदद की तो उन्हें और उनके परिवार को मार दिया जाएगा। इसी डर के कारण अधिकतर सदस्य गैंग से बाहर नहीं निकल पाते थे. चार्जशीट में दावा किया गया है कि जनवरी 2026 में भारत में हुई बी.एस. नाम के व्यक्ति की हत्या की जिम्मेदारी लेने के लिए गैंग ने पहले फोन पर रणनीति बनाई और फिर इंस्टाग्राम पोस्ट जारी की थी. बाद में उसी पोस्ट का स्क्रीनशॉट पीड़ित परिवार को भेजकर उन्हें डराया गया. 

पंजाब में था नेटवर्क 

अमेरिकी ग्रैंड ज्यूरी के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई ने अपने छात्र राजनीति के दिनों में पंजाब में अपना नेटवर्क तैयार किया. बाद में यही नेटवर्क एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट में बदल गया. साल 2015 में भारत में गिरफ्तारी के बाद भी उसका गैंग कमजोर नहीं पड़ा बल्कि लगातार फैलता गया. चार्जशीट का दावा है कि आज इस गैंग के हजारों सदस्य और सहयोगी दुनिया के अलग-अलग देशों में सक्रिय हैं, जबकि अमेरिका और कनाडा में ही इसके सैकड़ों सदस्य मौजूद हैं. अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि गैंग का मकसद सिर्फ अपराध करना नहीं था बल्कि लोगों के बीच ऐसा डर पैदा करना था कि व्यापारी, उद्योगपति, राजनेता और प्रभावशाली लोग खुद ही रंगदारी देने को मजबूर हो जाएं. जांच के मुताबिक गैंग राजनीतिक हत्याएं, शूटआउट, अपहरण, मारपीट और धमकी जैसी वारदातों को अंजाम देकर अपने खौफ का प्रचार भी करता था. सोशल मीडिया, वीडियो और ऑनलाइन पोस्ट के जरिए इन घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर पूरे नेटवर्क का डर फैलाया जाता था. 

गोल्डी बराड़ ने कई अभिनेताओं को भी धमकाया

अमेरिकी जांच के अनुसार दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक गोल्डी बराड़ ने कई बार अभिनेता और उसके मैनेजर को फोन और वॉयस मैसेज भेजे. इन संदेशों में कहा गया कि घर पर हुई फायरिंग उसी गैंग ने करवाई थी और अब अगर पैसे नहीं दिए गए तो अगली बार गोलियां सीधे उन्हें निशाना बनाएंगी. एक वॉयस मैसेज में कथित तौर पर कहा गया मेरे मैसेज को नजरअंदाज कर सकते हो, लेकिन तुम्हारी तरफ आने वाली गोलियों को नजरअंदाज नहीं कर पाओगे. अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि यह साफ तौर पर रंगदारी वसूलने की कोशिश थी. चार्जशीट में कनाडा के ब्रैम्पटन में रहने वाले कारोबारी ए.जी. का भी जिक्र है. जांच के मुताबिक दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच उसे लगातार फोन किए गए. कॉल करने वालों ने कहा कि अगर उसने पांच लाख कनाडाई डॉलर नहीं दिए तो उसके परिवार और कर्मचारियों को जान से मार दिया जाएगा. 

अंडरकवर ऑपरेशन 

अमेरिकी चार्जशीट का सबसे अहम हिस्सा शुरू होता है. यह हिस्सा अमेरिकी एजेंसियों के अंडरकवर ऑपरेशन से जुड़ा है. जांच एजेंसियों ने एक गोपनीय मुखबिर और अंडरकवर एजेंट को गैंग तक पहुंचाया. गैंग को लगा कि यह व्यक्ति किसी से बड़ी रकम वसूलना चाहता है और उसने उनकी मदद मांगी है. जनवरी 2025 में सुखराज सिंह कंग ने उस मुखबिर से बात की और कथित तौर पर कहा कि अगर वह 16 हजार डॉलर देगा तो गैंग उसके लिए दो लाख डॉलर तक की रंगदारी वसूल देगा.  इसके बाद अमेरिकी एजेंसियों ने पूरे ऑपरेशन की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी. 29 जनवरी 2025 को मुखबिर ने गैंग को एक वीडियो भेजा. गैंग को बताया गया कि इसमें कर्जदार के घर पर फायरिंग की गई है. जबकि असलियत यह थी कि यह वीडियो अमेरिकी एजेंसियों ने खुद तैयार किया था ताकि गैंग का भरोसा जीता जा सके. गैंग के सदस्यों ने इस वीडियो को असली मान लिया और आगे की रंगदारी की योजना बनाने लगे.

रंगदारी का पूरा सिस्टम सक्रिए

चार्जशीट बताती है कि गैंग सिर्फ धमकी ही नहीं देता था बल्कि रंगदारी की रकम लेने का पूरा सिस्टम भी बना रखा था. अप्रैल 2025 में अंडरकवर एजेंट को एक खास नोट का सीरियल नंबर दिया गया और बताया गया कि इसी नोट की पहचान के आधार पर रकम सौंपी जाएगी. कैलिफोर्निया के कॉमर्स इलाके की एक पार्किंग में गैंग के लिए काम करने वाले केस्टुटिस बाउज़ा ने 20 हजार डॉलर की रकम हासिल की थी. अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई उनकी निगरानी में हुई.इसके बाद मई 2025 में एक और रंगदारी की डील कराई गई. इस बार राजन भट्टी ने अंडरकवर एजेंट को कैलिफोर्निया के रिवरसाइड की एक पार्किंग में बुलाया. वहां कमल नाम के आरोपी ने गैंग की ओर से 15 हजार डॉलर लिए. जब तय रकम से कम पैसे मिले तो राजन भट्टी ने तुरंत वॉयस मैसेज भेजकर नाराजगी जताई और कहा कि अब इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा. कुछ दिन बाद एक और संदेश भेजकर कहा गया कि गलती एक बार हो सकती है, लेकिन अगली बार गलती की तो नुकसान होगा. मैं रोज लोगों को मरवाता हूं. अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि ये रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद हैं. 

अमेरिका, कनाडा सीमा तक जाता था ड्रग्स

चार्जशीट में कहा गया है कि नवंबर 2024 तक लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और सुखराज सिंह कंग अमेरिका के भीतर लंबी दूरी तक चलने वाले ट्रकों के जरिए कोकीन और मेथामफेटामिन की खेप पहुंचाने की योजना बना रहे थे. जांच के मुताबिक गैंग ने एक सह-साजिशकर्ता के जरिए ड्रग्स सप्लाई के ऐसे रूट तैयार किए थे जो अमेरिका से कनाडा की सीमा तक जाते थे. इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल नशे की बड़ी खेप को सुरक्षित पहुंचाने के लिए किया जाता था. अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार 14 नवंबर 2024 को गैंग से जुड़े एक सदस्य ने इंडियाना के ग्रीनवुड में एक गोपनीय सूत्र से मुलाकात की. इस बैठक का मकसद कोकीन की बड़ी खेप को अमेरिका-कनाडा बॉर्डर तक पहुंचाने की योजना बनाना था. जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे ऑपरेशन में लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक ड्रग ट्रैफिकिंग संगठन को ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा उपलब्ध करा रहा था.

अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग सिर्फ दूसरे ड्रग कार्टेल के लिए ड्रग्स नहीं पहुंचाता था, बल्कि मौका मिलने पर उन्हीं कार्टेल से ड्रग्स लूटकर खुद बेचने का काम भी करता था. दस्तावेज के मुताबिक मार्च 2024 में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के निर्देश पर गैंग के एक सदस्य ने लॉस एंजिलिस इलाके में एक प्रतिद्वंद्वी ड्रग तस्कर गिरोह से करीब 220 किलोग्राम कोकीन लूट ली. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद इस कोकीन को गैंग ने अपने नेटवर्क के जरिए आगे बेच दिया. इसके कुछ ही समय बाद अप्रैल 2024 में लॉरेंस बिश्नोई ने कथित तौर पर एक अन्य सदस्य को निर्देश दिया कि वह प्रतिद्वंद्वी गिरोह से करीब 500 किलोग्राम मेथामफेटामिन लूट ले. अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि यह ऑपरेशन भी सफल रहा और भारी मात्रा में नशीला पदार्थ गैंग के कब्जे में पहुंच गया.

करोड़ों डॉलर की कमाई 

चार्जशीट में कहा गया है कि इन सभी गतिविधियों के जरिए गैंग करोड़ों डॉलर की कमाई करता था। यही पैसा हथियार खरीदने, नए सदस्यों की भर्ती करने, फरार अपराधियों को छिपाने और दुनिया के अलग-अलग देशों में आपराधिक नेटवर्क चलाने में इस्तेमाल किया जाता था. अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था. इन्हीं आरोपों के आधार पर अमेरिकी ग्रैंड ज्यूरी ने लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, सुखराज सिंह कंग और अन्य आरोपियों पर मादक पदार्थों की तस्करी की साजिश का मामला भी दर्ज किया है. चार्जशीट में साफ कहा गया है कि इन लोगों पर कम से कम पांच किलोग्राम या उससे अधिक कोकीन और 50 ग्राम या उससे अधिक मेथामफेटामिन की तस्करी और वितरण की साजिश रचने का आरोप है. अमेरिकी चार्जशीट के आखिरी हिस्से में जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया है कि यह कोई अलग-अलग घटनाओं का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन का मामला है जो कई देशों में एक साथ काम कर रहा था. इसी आधार पर लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा, सुखराज सिंह कंग, राजन भट्टी, भुलवण, सुमित, कमल और केस्टुटिस बाउज़ा समेत कई आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक धाराओं में मुकदमा चलाने की मांग की गई है. 

लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ समेत कई पर मामले दर्ज

ड्रग्स तस्करी को लेकर भी अमेरिकी अदालत में अलग से मामला दर्ज किया गया है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और सुखराज सिंह कंग ने कोकीन और मेथामफेटामिन की सप्लाई, ट्रांसपोर्ट और वितरण की साजिश रची. इसी आधार पर इन पर अमेरिकी मादक पदार्थ कानूनों के तहत भी मुकदमा चलाया जा रहा है. चार्जशीट में सिर्फ गिरफ्तारी की बात नहीं है, बल्कि आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी का भी जिक्र है. अमेरिकी सरकार ने अदालत से कहा है कि अगर आरोपी दोषी ठहराए जाते हैं तो अपराध से अर्जित की गई उनकी चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों में जमा रकम, नकदी, हथियार और अपराध से जुड़ी दूसरी संपत्तियां जब्त की जाएं. अगर वह संपत्ति पहले ही किसी और के नाम कर दी गई हो, बेच दी गई हो या छिपा दी गई हो, तब भी उसकी बराबर कीमत की दूसरी संपत्ति जब्त की जा सकती है. 

दुनिया के कई देशों में फेला नेटवर्क 

जांच एजेंसियों ने अदालत को यह भी बताया है कि अगर अपराध से कमाया गया पैसा किसी तीसरे व्यक्ति के पास पहुंचा हो या दूसरी संपत्ति में बदल दिया गया हो, तब भी अमेरिकी कानून के तहत उसे जब्त करने का अधिकार मौजूद है. यानी सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि अपराध की कमाई से खरीदी गई हर संपत्ति जांच के दायरे में आ सकती है. इस पूरी चार्जशीट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिकी एजेंसियों ने पहली बार विस्तार से दावा किया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग अब केवल भारत का गैंग नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और दूसरे देशों में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था. दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि गैंग ने रंगदारी, हत्या, ड्रग्स तस्करी और हिंसा के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया और करोड़ों डॉलर की अवैध कमाई की. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चार्जशीट में दर्ज सभी बातें अमेरिकी अभियोजन पक्ष के आरोप हैं. इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में मुकदमे की सुनवाई और सबूतों की जांच के बाद ही होगा. फिलहाल अमेरिकी ग्रैंड ज्यूरी ने इन आरोपों के आधार पर अभियोग दायर किया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है. 

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