- महादेव ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में किया गया गिरफ्तार.
- सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर दिया गया है.
- सौरभ ने 6000 करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य बना लिया था. वह दुबई से एप चला रहा था.
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का आरोपी सौरभ चंद्राकर ओमान से गिरफ्तार हो चुका है. अब उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है. यूएई की रिक्वेस्ट पर यह रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है, वह लंबे समय तक यूएई में भी रहा है. सौरभ चंद्राकर पर मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध धन को रियल एस्टेट में निवेश करने के गंभीर आरोप है. उसने 6000 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई की है. ऐसे में कभी जूस की दुकान चलाने वाले सौरभ चंद्राकर की इस अवैध कमाई को लेकर अब बड़े खुलासे हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि जल्द ही उसे भारत भी लाया जा सकता है.
सौरभ ने दुबई में खरीदी थी संपत्ति
दुबई की एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एजेंसी को मई 2024 में जानकारी मिली थी कि भारत के बाहर हुए अपराधों से कमाए गए धन को यूएई की वित्तीय व्यवस्था के जरिए ट्रांसफर और सफेद किया जा रहा है. जांच में सामने आया कि इस पैसे को दुबई में लग्जरी रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया और कई संपत्तियां तीसरे पक्ष के नाम पर रजिस्टर कराई गईं थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने भारत में महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म नाम से बेटिंग ऐप चलाया और इस प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टेबाजों के साथ धोखाधड़ी की गई और ठगी की रकम करीब 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच गई थी. जिसके बाद छत्तीसगढ़ में इस संबंध में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था.
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दुबई से बैठकर चला रहे थे ऐप
दस्तावेज में दावा किया गया है कि अपराध के बाद आरोपी यूएई पहुंच गए और हवाला नेटवर्क के जरिए पैसे ट्रांसफर कर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई. जांच में यह भी सामने आया कि 2020 से 2021 के बीच करीब 400 मिलियन दिरहम ट्रांसफर किए गए थे. इसके बाद ही दुबई में कई कंपनियां बनाई गईं और बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी गईं. एजेंसियों का कहना है कि इनमें से कई कंपनियों का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था और उनका इस्तेमाल केवल बैंक खाते और संपत्तियां रखने के लिए किया जा रहा था. सौरभ बाद में दुबई से ओमान पहुंचा था. यहां भी उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए और 21 मई 2026 को गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था. यूएई के मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के हिसाब से 15 साल की सजा का प्रावधान है.
कभी जूस की दुकान चलाता था सौरभ चंद्राकर
सौरभ चंद्राकर कभी छत्तीसगढ़ के भिलाई में जूस की दुकान चलाता था. लेकिन लगातार बढ़ते कर्जे और घाटे की वजह से उसने सट्टेबाजी की दुनिया में कदम रखा. उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई और दोनों ने मिलकर तकनीक का सहारा लेकर 'महादेव ऑनलाइन बुक' ऐप लॉन्च किया था. उन्होंने इस अवैध धंधे को कॉरपोरेट लुक दिया और फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए देश भर में छोटे-छोटे सट्टा केंद्र खोलकर बेरोजगार युवाओं को बड़े मुनाफे का लालच देकर इस नेटवर्क से जोड़ना शुरू कर दिया. इस पूरे सिंडिकेट में हार-जीत को पूरी तरह सॉफ्टवेयर के जरिए कंट्रोल किया जाता था ताकि आम लोग हमेशा पैसा हारें और ऐप प्रमोटर्स को 100 प्रतिशत तक मुनाफा हो. रोजाना होने वाली करोड़ों रुपये की इस काली कमाई को बेनामी बैंक खातों और हवाला नेटवर्क से वैध पैसे में बदला गया और इस तरह देखते ही देखते एक आम जूस बेचने वाले ने करीब 6000 करोड़ से अधिक का देश का सबसे बड़ा अवैध ऑनलाइन सट्टा साम्राज्य खड़ा कर दिया.
भारत लाया जाएगा सौरभ चंद्राकर
सौरभ चंद्राकर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए यात्रा कर रहा था. लेकिन ओमान की राजधानी मस्कट में उसकी गिरफ्तारी के बाद अब उसे जल्द ही भारत लाने की तैयारी हो रही है. अधिकारियों का मानना है कि प्रत्यर्पण की बजाय डिपोर्टेशन के जरिए उसे जल्दी भारत लाया जा सकता है. सौरभ और उप्पल ने भारत और दुबई में करोड़ों की संपतियां खरीदी हैं. इसी साल मार्च में ईडी ने दुबई और दिल्ली में करीब 1700 करोड़ रुपये की 20 संपत्तियां अटैच की थीं. जांच एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियां सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई थीं. इस मामले में ईडी अब तक देशभर में 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. जिसमें 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 74 आरोपियों के खिलाफ पांच चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई हैं.
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