- सुलतानपुर जिले में शहीद अखिलेश शुक्ला का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचते ही गांव मझना शोक में डूब गया
- अखिलेश शुक्ला ईएमई रेजिमेंट में नायक पद पर कुपवाड़ा में तैनात थे और सर्च ऑपरेशन में घायल हुए थे
- गंभीर चोट के बाद दिल्ली के आरआर आर्मी हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था जहां 8 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया
UP Shaheed Akhilesh Ahukla: उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के गांव मझना में शुक्रवार सुबह एक फौजी बेटा सरहद से अपने घर तो लौटा, मगर इस बार वह तिरंगे में लिपटकर और हमेशा-हमेशा के लिए जुदा होकर आया. इकलौते बेटे अखिलेश शुक्ला की शहादत की खबर सुनकर पूरा गांव रो पड़ा. हर कोई शहीद परिवार को ढांढस बंधाता नजर आया, मगर मां-पिता और दो बहनों के विलाप ने हर किसी की आंखों में आंसू ला दिए.
सुलतानपुर जिले के मझना गांव में पहुंचा पार्थिव शरीर
सुलतानपुर जिले के मझना गांव के पूरे वैसी का पुरवा में जब तिरंगे में लिपटी शहीद अखिलेश शुक्ला की पार्थिव देह पहुंची तो पूरा इलाका शोक में डूब गया. उनके घर के जिस आंगन में कभी हंसी गूंजती थी, आज वहां मातम पसरा था. कोना-कोना गमजदा था.
शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो उन्हें आखिरी सलामी देने जनसैलाब उमड़ पड़ा. शवयात्रा में शामिल लोगों ने “भारत माता की जय” और “अखिलेश शुक्ला अमर रहे” के गगनभेदी नारों से आसमान गूंजा दिया.

UP Shaheed Akhilesh Ahukla martyr funeral in sultanpur Uttar pradesh
सर्च ऑपरेशन के दौरान लगी गोली, इलाज के दौरान निधन
अखिलेश शुक्ला ईएमई रेजिमेंट में नायक के पद पर जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में तैनात थे. 28 मार्च 2026 की रात करीब 9 बजे सर्च ऑपरेशन के दौरान उन्हें गोली लग गई थी. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल (आर्मी हॉस्पिटल) में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 8 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया.
फौजी परिवार से थे शहीद अखिलेश
अखिलेश शुक्ला का परिवार भी देश सेवा से जुड़ा रहा है. उनके पिता राधेकृष्ण शुक्ला भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं. परिवार में दो बहनों के बीच वह इकलौते भाई थे. इकलौते बेटे और इकलौते भाई का यह गम पूरे परिवार को कभी नहीं भूल सकने वाला दर्द दे गया.

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सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
विदाई के दौरान सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अखिलेश को अंतिम सलामी दी. बंदूकों की गूंज और बिगुल की धुन के बीच जब अंतिम संस्कार हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. मां सीमा का रुदन और पिता की खामोश निगाहें उनका दर्द बयां कर रही थीं. लोगों का कहना है कि अखिलेश भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, उनका बलिदान और उनकी देशभक्ति हमेशा अमर रहेगी.
तीन साल पहले ही सेना में हुए थे भर्ती
अखिलेश शुक्ला तीन साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. वे अविवाहित थे. उनकी बड़ी बहन प्रियंका दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं, जबकि छोटी बहन शिवानी प्रयागराज से सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही हैं. अखिलेश 33 वर्कशॉप EME कोर में नायक पद पर तैनात थे और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थी.
घर आए थे शादी में, तीन दिन बाद हो गए शहीद
अखिलेश के चाचा हरिकृष्ण शुक्ला के अनुसार, वह 22 मार्च को घर में आयोजित विवाह कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और 25 मार्च को ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे. इसके तीन दिन बाद ही 28 मार्च की रात कुपवाड़ा में सर्च ऑपरेशन के दौरान उन्हें गोली लग गई. शहीद अखिलेश शुक्ला को श्रद्धांजलि देने के लिए क्षेत्र के युवाओं ने बाइक रैली भी निकाली. इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और शहीद को नमन किया.
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