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यूपी पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने OBC आयोग का ऐलान किया, कब तक रिपोर्ट आएगी

UP Panchayat Election News: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव का रास्ता साफ होते दिख रहा है. यूपी की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को लेकर बड़ी घोषणा कैबिनेट मीटिंग में कर दी है.

यूपी पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने OBC आयोग का ऐलान किया, कब तक रिपोर्ट आएगी
UP Panchayat Election UP Cabinet OBC Commission: यूपी पंचायत चुनाव आरक्षण
लखनऊ:

UP Panchayat Chunav Date: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है. यूपी की योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का ऐलान कर दिया है. कैबिनेट मीटिंग में नए ओबीसी आयोग को मंजूरी मिली. आयोग ही पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करेगा. हालांकि अब 26 मई तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं लग रहा है. आयोग छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगा. ऐसे में चुनाव अब मार्च में विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव लग रहे हैं. 

यूपी कैबिनेट में OBC आयोग के गठन का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ओबीसी आयोग सभी 75 जिलों में बैठक, जातिवार और आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा के बाद ही आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव आरक्षण की जो सिफारिशें आएंगी, उस पर फिर राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी जाएगी, जिनके निस्तारण करने में भी एक महीने का वक्त लग सकता है. ऐसे में पंचायत चुनाव हाल फिलहाल होना मुश्किल लग रहा है. 

पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय निकाय संस्थाओं के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकायों के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठन को मंजूरी दे दी है.ये आयोग पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए हर जिले में सामाजिक, राजनीतिक पिछड़ेपन के आंकड़ों का अध्ययन करेगा. उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961  के तहत पंचायत आरक्षण का प्रावधान है. पंचायतों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण दिया जाना है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के दौरान ओबीसी कमीशन के ताजे आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय करने का आदेश दिया था. यही फैसला पंचायत चुनाव आरक्षण के लिए किया गया है. ओबीसी कमीशन का कार्यकाल छह महीने का होगा. छह महीने में वो ओबीसी आरक्षण के लिए हर जिले के हिसाब से आरक्षण देगा. 

ओबीसी आयोग में 5 सदस्य

पिछड़ा वर्ग आयोग में पांच सदस्य होंगे, जो यूपी सरकार तय करेगी. इसमें आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को बनाया जाएगा. बाकी पिछड़ा वर्ग विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत चुनाव और जिला पंचायत चुनाव में आरक्षण तय होगा. 

यूपी में पंचायत चुनाव कब होंगे

अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव को देखते हुए चार महीने पहले पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए राजनीतिक जोखिम भरा फैसला हो सकता है. पंचायत चुनाव में अक्सर गुटबाजी, वर्चस्व और राजनीतिक टकराव देखा जाता है. दलीय मर्यादाएं तार-तार हो जाती हैं.इसका पार्टी संगठनों पर बुरा असर पड़ सकता है. अब ओबीसी कमीशन ही छह महीने बाद रिपोर्ट देगा तो अभी चुनाव संभव ही नहीं हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव, क्षेत्र पंचायत चुनाव और जिला पंचायत चुनाव का मामला काफी समय से लटका है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को ओबीसी आयोग के गठन का आदेश दिया है. हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता ने समय से पंचायत चुनाव कराने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी. याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनाव टालना और ग्राम प्रधान की जगह प्रशासकों को जिम्मेदारी देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है. 

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पंचायत चुनाव की मतदाता सूची

उत्तर प्रदेश में अभी पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची भी तैयार नहीं हो पाई है. राज्य निर्वाचन आयोग लखनऊ ने 10 जून तक फाइनल वोटर लिस्ट तैयार करने की समयसीमा तय की है. हालांकि आपत्तियों के निस्तारण में समय लग सकता है. तमाम पंचायतों के इलाके शहरों में शामिल होने से भी ग्राम पंचायतों की संख्या इस बार घट सकती है. 

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यूपी में कितनी ग्राम पंचायत

  • 57695 ग्राम पंचायत
  • 826 ब्लॉक पंचायत
  • 75 जिला पंचायत

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