- उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की कुलपहाड़ तहसील में नसबंदी के बाद भी महिला गर्भवती होकर तीसरे बच्चे को जन्म दिया.
- महिला के परिजन जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
- महोबा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए शासन को फाइल भेजने और सहायता का आश्वासन दिया.
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की कुलपहाड़ तहसील में एक महिला की नसबंदी फेल होने का मामला सामने आया है. महिला के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही के कारण नसबंदी सफल नहीं हो पाई. उनका कहना है कि नसबंदी के बाद भी महिला गर्भवती हो गई और उसने तीसरे बच्चे को जन्म दिया. अब परिवार मुआवजे की मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.
इस मामले पर महोबा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और इससे संबंधित फाइल शासन को भेज दी गई है. उन्होंने कहा कि शासन स्तर से महिला को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
दो बच्चों के माता-पिता मुकेश रैकवार और नेहा ने अपने परिवार को सीमित रखने की सोच के साथ जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी के लिए गए थे. मामला 1 दिसंबर 2025 का है. आशा बहू की मदद से नेहा का नसबंदी ऑपरेशन किया गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद स्वास्थ्य में बदलाव आने पर जब अल्ट्रासाउंड कराया गया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. रिपोर्ट में महिला दोबारा गर्भवती हो गई थी. जब पीड़िता ने अस्पताल और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिले. कभी जैतपुर अस्पताल तो कभी महोबा सीएमओ कार्यालय और लखनऊ तक फाइल दौड़ने की बात कहकर उन्हें पिछले 9 महीनों से लगातार भटकाया जा रहा है.
'शिकायत के बाद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला'
पीड़िता नेहा ने बताया कि 1 दिसंबर को वह नसबंदी ऑपरेशन के लिए डॉक्टर के पास गई थी. डॉक्टर ने जांच सामान्य बताते हुए ऑपरेशन सफल होने की बात कही थी. ऑपरेशन के बाद वह दोबारा गर्भवती हो गई और डिलीवरी के दौरान उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि उनका परिवार पहले से पूरा था. उनके दो बच्चे, एक लड़की और एक लड़का थे. इसलिए परिवार पूरा होने के बाद ही उन्होंने नसबंदी कराई थी. दोबारा गर्भवती होने पर उन्होंने डॉक्टर से शिकायत की. लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. पीड़िता की सास आशा ने बताया कि परिवार में पहले से दो बच्चे थे और हम दो ही बच्चे चाहते थे, लेकिन अब तीसरा बच्चा भी हो गया है. समझ नहीं आ रहा कि नसबंदी के बाद ऐसा कैसे हुआ. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. खाने-पीने और बच्चों की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी हो रही है.
मुकेश ने बताया कि उनके एक बेटा और एक बेटी हैं. परिवार पूरा होने पर उन्होंने 1 दिसंबर 2025 को जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी. डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑपरेशन में कोई दिक्कत नहीं बताई थी. लेकिन 9 अगस्त को तीसरे बच्चे का जन्म हो गया.
इरफान खान की रिपोर्ट
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