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UP BJP की नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का ताना-बाना, जान लीजिए पंकज चौधरी की टीम का पूरा विश्लेषण

नई टीम में ओबीसी को सबसे अधिक तरजीह दी गई है. कुल 64 पदाधिकारियों में से 30 यानी 47 प्रतिशत सदस्य ओबीसी समाज से आते हैं. यह पार्टी के 'मंडल और कमंडल' के संतुलन को दर्शाता है.

UP BJP की नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का ताना-बाना, जान लीजिए पंकज चौधरी की टीम का पूरा विश्लेषण
पकंज चौधरी के पास बड़ी जिम्मेदारी
NDTV
नई दिल्ली:

 भारतीय जनता पार्टी ( BJP) के यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम की घोषणा कर दी है. नई टीम के गठन में आगामी राजनीतिक और चुनावी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहद सूक्ष्म सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधे गए हैं. इस टीम के विश्लेषण से साफ है कि भाजपा ने अपने पारंपरिक कोर वोटर के साथ-साथ पिछड़े और दलित वर्ग में पैठ मजबूत करने के लिए एक संतुलित फॉर्मूला अपनाया है. पार्टी ने बड़ी संख्या में ब्राह्मणों को संगठन में दायित्व देकर उनकी नाराज़गी दूर करने का प्रयास किया है. टीम में 64 पदाधिकारियों को शामिल किया गया है, जिसमें युवाओं और महिलाओं को भी विशेष प्रतिनिधित्व दिया गया है.

ओबीसी और सामान्य वर्ग को सबसे बड़ा हिस्सा, सामाजिक समीकरण मजबूत

नई टीम में ओबीसी को सबसे अधिक तरजीह दी गई है. कुल 64 पदाधिकारियों में से 30 यानी 47 प्रतिशत सदस्य ओबीसी समाज से आते हैं. यह पार्टी के 'मंडल और कमंडल' के संतुलन को दर्शाता है. वहीं, सामान्य वर्ग से 26 पदाधिकारियों को शामिल किया गया जो क़रीब 41 प्रतिशत है. इसके अलावा, दलित समाज से जुड़ाव गहरा करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति के 7 सदस्यों (11 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति के 1 सदस्य (2 प्रतिशत) को टीम में स्थान मिला है. जातिवार आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्राह्मण समाज से सबसे ज्यादा 10 (16 प्रतिशत), क्षत्रिय समाज से 7 (11 प्रतिशत), भूमिहार समाज से 5 (8 प्रतिशत) और वैश्य समाज से 4 (6 प्रतिशत) पदाधिकारी बनाए गए हैं. ओबीसी जातियों में कुर्मी समाज को 3 (5 प्रतिशत), जाट को 3 (5 प्रतिशत), यादव, पाल, गुर्जर, लोधी और शाक्य समाज को भी सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक न्याय की रूपरेखा तैयार की गई है.

क्षेत्रीय संतुलन-अवध और काशी क्षेत्र का दबदबा

भौगोलिक और क्षेत्रीय समीकरणों की बात करें तो उत्तर प्रदेश के सभी छह सांगठनिक क्षेत्रों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया गया है. नई टीम में अवध क्षेत्र को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जहां से 16 पदाधिकारियों (25 प्रतिशत) को चुना गया है. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाले काशी क्षेत्र से 13 पदाधिकारियों (20 प्रतिशत) को टीम में जगह दी गई है. पश्चिम उत्तर प्रदेश से 10 (16 प्रतिशत), ब्रज क्षेत्र से 9 (14 प्रतिशत) तथा कानपुर और गोरखपुर क्षेत्रों से 8-8 पदाधिकारियों (13-13 प्रतिशत) को शामिल कर पूरे सूबे को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया गया है.

उच्च शिक्षित युवाओं और महिलाओं को मिला बड़ा मौका

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की इस नई टीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी शैक्षणिक योग्यता और युवा ऊर्जा है. टीम के 64 पदाधिकारियों में से 29 पोस्ट ग्रेजुएट, 25 ग्रेजुएट, और 4 पीएचडी धारक हैं. इसके अलावा बी.टेक, एलएलबी और एमबीए जैसी व्यावसायिक डिग्री वाले चेहरों को भी संगठन में जिम्मेदारी दी गई है. इससे पार्टी की प्रशासनिक और रणनीतिक क्षमता को नई धार मिलेगी. युवाओं को मौका देने की रणनीति के तहत उम्र के समीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है.

टीम में 50 वर्ष से कम आयु वाले नेताओं की भारी बहुलता है

35 वर्ष से कम उम्र के 2, 40 वर्ष से कम के 11, 45 वर्ष से कम के 16 और 50 वर्ष से कम आयु के 27 नेताओं को शामिल कर संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का साफ संदेश दिया गया है. संगठन में आधी आबादी की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कुल 12 महिला पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया है. इनमें 4 महिला उपाध्यक्ष, 1 महिला महामंत्री और 7 महिलाओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. स्पष्ट है कि पंकज चौधरी की इस 'टीम यूपी' के जरिए भाजपा ने न सिर्फ अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत किया है, बल्कि हर वर्ग और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देकर आगामी राजनीतिक बिसात पर एक बेहद मजबूत और संतुलित चाल चली है.

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