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जलती धरती, बढ़ता खतरा: UN ने भारत की भीषण गर्मी के पीछे बताया क्लाइमेट चेंज

UN ने भारत की भीषण गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया है. वहीं IMD ने अगले कुछ दिनों तक हीटवेव जारी रहने का अलर्ट जारी किया है. बढ़ती गर्मी से बिजली मांग रिकॉर्ड स्तर पर है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा राहत देने में अहम भूमिका निभा रही है.

जलती धरती, बढ़ता खतरा: UN ने भारत की भीषण गर्मी के पीछे बताया क्लाइमेट चेंज
फाइल फोटो

भारत के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी पर संयुक्त राष्ट्र ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. UN के शीर्ष क्लाइमेट अधिकारी साइमन स्टील का कहना है कि बढ़ता जलवायु परिवर्तन ही इस चरम गर्मी की मुख्य वजह है.

गर्मी के पीछे क्या वजह

UNFCCC (संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क) के एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी साइमन स्टील के मुताबिक कोयला, तेल और गैस का भारी इस्तेमाल व ग्लोबल वार्मिंग के तेजी से बढ़ने से भारत में हीटवेव और एक्सट्रीम तापमान की स्थिति बन रही है.

IMD का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी चेताया है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 2–3 दिन तक हीटवेव से लेकर सीवियर हीटवेव जारी रह सकती है.

आम लोगों पर असर

बिना कूलिंग सिस्टम वाले घरों में रहने वाले लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. लंबे समय तक बाहर काम करने वालों पर बड़ा खतरा है. साथ ही स्वास्थ्य और उत्पादकता दोनों पर असर पड़ेगा. स्टील ने कहा कि यह गर्मी मानव और आर्थिक दोनों मोर्चों पर संकट पैदा कर रही है.

बिजली की मांग ने तोड़े रिकॉर्ड

भीषण गर्मी के चलते देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. 

18 मई: 257.3 GW
19 मई: 260.4 GW
20 मई: 265 GW
21 मई: 270.8 GW (रिकॉर्ड)

यह साफ इशारा है कि गर्मी सीधे पावर लोड और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रही है.

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रिन्यूएबल एनर्जी बनी मददगार

हालांकि सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों ने दिन के समय लोड संभालने में मदद की है. इसी के चलते UN ने भारत की सोलर पावर बढ़ाने की रणनीति को भी सकारात्मक बताया है. 

डबल संकट का खतरा

स्टील ने चेतावनी दी कि यह स्थिति दोहरी चुनौती बन रही है. एक तरफ एक्सट्रीम हीट. दूसरी तरफ फॉसिल फ्यूल की बढ़ती कीमतें (मिडिल ईस्ट संकट के कारण) भी चिंता बढ़ा रही हैं. UN की चेतावनी की बड़ी बात यह है कि सिर्फ मौसम नहीं, क्लाइमेट इमरजेंसी का संकेत है. इसके समाधान के लिए क्लीन एनर्जी, एनर्जी एफिशिएंसी और एडॉप्टेशन जरूरी है.

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