शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साहसी जेन-Z की तारीफ करते हुए उनकी तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर से की है. उद्धव ठाकरे ने कहा, "जिन लोगों को 'कॉकरोच' कहकर अपमानित किया गया, वे 'जेन-Z' से आते हैं यानी लगभग 13-14 से 27-28 साल की उम्र के युवा. क्या छत्रपति शिवाजी महाराज की उम्र भी करीब यही नहीं थी, जब उन्होंने 17 साल की उम्र में तोरणा किला जीता था? क्या संत ज्ञानेश्वर भी बहुत कम उम्र के नहीं थे, जब उन्होंने 'ज्ञानेश्वरी' लिखी थी?"
उन्होंने आगे कहा, "अपने-अपने वक्त में दोनों को ही भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. कम उम्र के होने के बावजूद शिवाजी महाराज मुगल साम्राज्य से लड़े."
'यह बेतुकी बात है...'
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण परीक्षा के पेपर लीक होने पर टिप्पणी क्यों कर रही हैं? क्या वह पेपर लीक को सही ठहराने के लिए हैं या महंगाई को नियंत्रित करने के लिए? रुपया गिर रहा है, लेकिन उस पर कोई चर्चा नहीं हो रही. इसके बजाय, लोग कहते हैं कि पेपर लीक से छात्रों को बेहतर तैयारी में मदद मिलती है. यह बेतुकी बात है.
Mumbai, Maharashtra: Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray says, "Those who were insulted as 'cockroaches' belong to what we now call Generation Z roughly from the ages of thirteen or fourteen to twenty-seven or twenty-eight. Wasn't Chhatrapati Shivaji Maharaj just about that… pic.twitter.com/W6NCbwEwDm
— IANS (@ians_india) July 29, 2026
सड़क से संसद तक... जेन-Z पर मेहरबान लीडर्स!
ठाकरे का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब पार्टी लाइन से अलग-अलग पॉलिटिकल लीडर्स पार्लियामेंट के चल रहे मॉनसून सेशन के दौरान अपने पॉलिटिकल मैसेज को बेहतर बनाने के लिए Gen Z टर्मिनोलॉजी को तेजी से अपना रहे हैं.
ट्रेजरी बेंच के मेंबर्स से लेकर, केंद्र के रिफॉर्म्स का बचाव करने वाले विपक्षी सांसदों से लेकर, NEET विवाद से निपटने में सरकार के तरीके की आलोचना करने तक, सांसदों ने पार्लियामेंट्री डिबेट के बजाय सोशल मीडिया से ज्यादा जुड़े इंटरनेट स्लैंग का इस्तेमाल किया.
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रपोज्ड लेजिस्लेशन का सपोर्ट करते हुए Gen Z स्लैंग का इस्तेमाल किया और 'क्लॉक इट' फ्रेज का इस्तेमाल किया, जो किसी चीज को मानने या पहचानने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक पॉपुलर इंटरनेट एक्सप्रेशन है. बिल के सपोर्ट में बोलते हुए, उन्होंने कहा, "Gen Z की भाषा उधार लेते हुए, मुझे कहना होगा कि मोदी जी ने यह लेजिस्लेटिव सॉल्यूशन देने में वक्त लगा दिया."
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'अगर आज Gen-Z का दिल जीतना चाहते हैं...'
वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोगों से जुड़ने के तरीके की आलोचना करते हुए Gen Z की शब्दावली का इस्तेमाल किया और कहा कि युवा राजनीतिक संदेशों की असलियत को आसानी से समझ जाते हैं.
प्रियंका गांधी ने कहा, "अगर आप 'जेन Z' का दिल जीतना चाहते हैं, तो अलग-अलग कैमरा एंगल से वीडियो बनाने से कोई फायदा नहीं होगा. प्रधानमंत्री को कैमरे का एंगल नहीं, बल्कि अपना नजरिया बदलने की जरूरत है." उन्होंने आगे कहा कि आपकी सरकार में युवाओं के साथ अन्याय हुआ है, इस सच्चाई को स्वीकार करें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
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