बिहार में एक वक्त था जब सियासी गलियारों से लेकर गांव-गांव तक 'जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक बिहार में रहेगा लालू' नारा गूंजता था. लेकिन अब वक्त बदल गया है. इस बदले वक्त में Gen Z और उनके नारों की बहार है. हर प्रदर्शन के बीच Gen Z के नारे अपनी जगह बनाते दिख रहे हैं. क्या नेता क्या अभिनेता और क्या आम जनता, हर कोई इन नारों के बीच ही अपनी आवाज बुलंद करते नजर आ रहे हैं.
अब लालू यादव भले ही राजनीति में सक्रिय नहीं हैं लेकिन नारों में समोसे का जिक्र आज भी नए नाम और नए कलेवर के साथ हो रहा है.
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इसके अलावा भी कई नारे हैं जो महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को आवाज दे रही है.
राजनीति में फिर से समोसे की एंट्री
'एक कचौड़ी दो समोसा' नारे की एंट्री अब यूपी की राजनीति में भी हो गई है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इस नारे का इस्तेमाल बीजेपी पर तंज करने के लिए किया.
अखिलेश ने कहा, "आने वाले समय में पीडीए और जेनजी भारतीय जनता पार्टी का सफाया कर देंगे. आपने देखा नहीं कि दिल्ली में नारे क्या चल रहे थे. एक कचौड़ी-दो समोसा. हम तो एक ही समोसा बोल रहे थे. एक कचौड़ी, एक समोसे, बीजेपी पे नहीं है भरोसा."
इस दौरान उन्होंने राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि विधायकों की गिनती पूरी हो जाएगी तो बता दिया जाएगा. वोट जोड़ना और विधायकों को साथ लाना एक लंबी एक्सरीज होती है. वैसे कई अपने लोग भी वापिस आना चाहते हैं, जो पहले चले गए थे. कई विधायक भी आना चाहते हैं.
जेनजी ने और क्या क्या नारे बनाए?
महिलाओं के खिलाफ अपराध के खिलाफ जेन जी ने कई नारे गढ़ें हैं. प्रदर्शन के दौरान गूंजे कुछ नारे इस तरह हैं:
- "एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा"
- "मेरे सर में दर्द है, इसका कारण मर्द है"
- "ओ पुरुष, कल आना"
- "हमारी आजादी से जिसको दर्द है, वो सब नामर्द है"
- "शर्म नहीं है मर्दों में, औरत क्यों है पर्दों में"
- "तोड़ के रख दो वो समाज, नारी जिसमें बंधी है आज"
- "नारी अपने आप की, नहीं किसी के बाप की"
- "रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं"
- "फूल नहीं, चिंगारी है, ये भारत की नारी है"
- "ठंडे समोसे गर्म करो, मर्द जात शर्म करो"
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