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बंगाल में अब केंद्र की वे सभी योजनाएं होंगी लागू, जिनको 12 सालों में ममता सरकार ने रोका, काम शुरू

Central Schemes In Bengal: केंद्र सरकार की कोशिश है कि रुकी हुई परियोजनाओं में तेजी लाई जाए ताकि डबल इंजन सरकार का जमीन पर असर दिखे. इसी तरह केंद्र सरकार की योजनाओं का दायरा बढ़ा कर और उनके सफल क्रियान्वयन के माध्यम से मोदी सरकार लाभार्थियों का दायरा बड़ा करना चाहती है.

बंगाल में अब केंद्र की वे सभी योजनाएं होंगी लागू, जिनको 12 सालों में ममता सरकार ने रोका, काम शुरू
केंद्रीय योजनाओं को बंगाल में लागू करने की तैयारी.
  • केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में रुकी हुई परियोजनाओं को लागू करने के लिए तीव्र गति से काम शुरू किया
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हर मंत्रालय से अटकी योजनाओं की सूची मांगी है ताकि बाधाओं को दूर किया जा सके
  • ममता बनर्जी सरकार ने आयुष्मान भारत, पीएम किसान सम्मान निधि जैसी केंद्र की प्रमुख योजनाओं को लागू नहीं किया था
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नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल की सरकार अगले कुछ घंटों में बनेगी  लेकिन चुनाव परिणाम आने के साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य की रुकी हुई परियोजनाओं और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने हर मंत्रालय से ऐसी योजनाओं की सूची देने को कहा है जो पिछले 12 वर्षों से ममता बनर्जी सरकार के अड़ियल रवैये के कारण रुकी हुईं थीं. राज्य में सरकार बनते ही इनके रास्ते में आई हुई अड़चनों को दूर करने के लिए तीव्र गति से काम शुरू हो जाएगा.

मंत्रालयों से मांगी रुकी हुई परियोजनाओं की लिस्ट

सूत्रों के अनुसार इसका जिम्मा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दिया गया है, जिन्होंने हर मंत्रालय से रुकी हुई परियोजनाओं और संबंधित मंत्रालयों की अटकी योजनाओं की सूची मांगी है. हर मंत्रालय ने इसका ब्यौरा देना भी शुरू कर दिया है. इसके बाद केंद्रीय स्तर पर इन योजनाओं के रास्ते में लगाए गए अडंगों को दूर करने के लिए काम शुरू होगा.

गौरतलब है कि पिछले एक दशक में ममता बनर्जी सरकार हर मोर्चे पर केंद्र सरकार से दो-दो हाथ करती आई थी. मोदी सरकार की कई योजनाओं को या तो लागू नहीं किया गया या फिर उनका नाम बदल कर उन्हें लागू किया गया. इसी तरह से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए या तो जमीन नहीं दी गई या फिर दूसरे बहाने बना कर रास्ते में रोड़े अटकाए गए. अब केंद्र सरकार की मंशा है कि वर्षों से रुकी हुई ऐसी परियोजनाओं को युद्ध गति से पूरा किया जाए. इसलिए सरकार बनने से पहले ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है.

आयुष्मान भारत योजना को बंगाल में लागू नहीं किया

ऐसी ही एक बड़ी योजना आयुष्मान भारत है जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से मना कर दिया था. इसके तहत पांच लाख का मेडिकल बीमा दिया जाता है. ममता बनर्जी का तर्क था कि उनकी अपनी योजना 'स्वास्थ्य साथी' पहले से ही बेहतर सेवाएं दे रही है. साथ ही, बंगाल सरकार केंद्र की 60:40 की फंडिंग हिस्सेदारी और योजना के नाम पर प्रधानमंत्री की तस्वीर होने के खिलाफ थी. अब स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राज्य की पहली कैबिनेट बैठक में ही इस योजना को मंजूरी दी जाएगी.

नहीं मिली पीएम किसान सम्मान निधि योजना

इसी तरह किसानों को साल भर में तीन किश्तों के जरिए छह हजार रुपए महीने देने की पीएम किसान सम्मान निधि योजना से भी ममता बनर्जी सरकार शुरुआत में दूर रहीं. वे अपनी 'कृषक बंधु' योजना को प्राथमिकता दे रही थीं. हालांकि, राजनीतिक दबाव के बाद 2021 में इसे आंशिक रूप से स्वीकार किया गया, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर दोनों सरकारों में लंबे समय तक खींचतान चलती रही. अब केंद्र सरकार इसे शत प्रतिशत रूप में लागू कराएगी. सरकार ने वीबी जी राम जी को भी पश्चिम बंगाल में तेज गति से लागू करने का फैसला किया है. गौरतलब है कि मनरेगा का फंड केंद्र सरकार ने व्यापक अनियमितताओं के कारण रोका था. इसे लेकर ममता सरकार ने केंद्र पर हल्ला बोला था और इसे आर्थिक नाकेबंदी बताया था.

ममता बनर्जी सरकार ने पीएम आवास योजना का नाम बदल कर 'बांग्ला आवास योजना'  कर दिया था. साथ ही, इसमें कई अनियमितताएं भी पाई गईं थी. इस कारण केंद्र ने 2022 से इसका फंड रोक दिया था. अब इसे दोबारा चालू किया जा रहा है.

पीएम मत्स्य संपदा योजना को लागू ही नहीं किया

केंद्र सरकार के अनुसार पीएम मत्स्य संपदा योजना को पश्चिम बंगाल ने लॉन्च के दो साल बाद तक लागू नहीं किया था और फंड का बहुत कम हिस्सा उपयोग किया गया था. इसी तरह जल जीवन मिशन में केंद्र द्वारा आवंटित राशि का बेहतर उपयोग और प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा. शिक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री श्री  स्कूल, नई भाषा नीति, और उल्लास जैसी योजनाएं राज्य में लागू की जा सकती हैं. प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत रुकी हुई परियोजनाओं को मंज़ूरी मिलेगी.

बंगाल में अटकी हुई परियोजनाएं

'नमामि गंगे' परियोजना के तहत पश्चिम बंगाल में गंगा की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने को लेकर भी ममता सरकार का रवैया असहयोग का रहा. राज्य सरकार ने एसटीपी लगाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराई जिससे इसमें देरी हुई है. केंद्र सरकार ने कई बार संसद में कहा कि पश्चिम बंगाल में जमीन मिलने में देरी के कारण कई STP प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाए. अब इनमें तेजी लाने फैसला किया गया है. इसी तरह आंतरिक सुरक्षा के लिए संवेदनशील बॉर्डर फेंसिंग के लिए भी ममता सरकार का रवैया टकराव का रहा. उन्होंने इसके लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं कराई. बीजेपी ने अब अगले 45 दिनों में इस काम को पूरा करने का संकल्प किया है.

आदिवासी विकास को लेकर 'वन अधिकार अधिनियम'  और एकलव्य मॉडल स्कूलों को लेकर विवाद रहा है. केंद्र का आरोप रहा है कि बंगाल सरकार आदिवासियों को पट्टे (भूमि अधिकार) देने में धीमी रही है. केंद्र की 'पीएम जनमन' जैसी योजनाओं को लेकर भी राज्य ने अपने अलग पोर्टल और नाम को प्राथमिकता दी, जिससे डेटा शेयरिंग में दिक्कतें आईं.

पीएम फसल बीमा योजना पर भी विवाद

पीएम फसल बीमा योजना पर भी विवाद हुआ. ममता सरकार ने केंद्र की इस योजना को छोड़कर अपनी 'बांग्ला शस्य बीमा' (BSB) योजना शुरू की थी. उनका दावा था कि उनकी योजना का प्रीमियम पूरी तरह राज्य सरकार भरती है, जिससे किसानों पर बोझ कम पड़ता है. केंद्र ने इसे 'श्रेय लेने की राजनीति' करार दिया. इसी तरह मृदा स्वास्थ्य कार्ड के डेटा कलेक्शन और कार्ड वितरण की गति बंगाल में अन्य राज्यों की तुलना में काफी धीमी रही, जिसे केंद्र ने प्रशासनिक उदासीनता बताया. राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) के साथ राज्य की मंडियों को जोड़ने की प्रक्रिया भी बंगाल में काफी धीमी रही क्योंकि राज्य अपने स्वयं के 'सफल' (Sufal) जैसे तंत्र पर अधिक निर्भर रहा. पीएम-प्रणाम योजना का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना है. बंगाल सरकार ने शुरू में इस पर बहुत उत्साह नहीं दिखाया क्योंकि उसका तर्क था कि इससे उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी और किसानों की लागत पर असर पड़ सकता है.

केंद्र सरकार की कोशिश है कि रुकी हुई परियोजनाओं में तेजी लाई जाए ताकि डबल इंजन सरकार का जमीन पर असर दिखे. इसी तरह केंद्र सरकार की योजनाओं का दायरा बढ़ा कर और उनके सफल क्रियान्वयन के माध्यम से मोदी सरकार लाभार्थियों का दायरा बड़ा करना चाहती है.

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