एआई का जिक्र होते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में चैटजीपीटी या गूगल के जेमिनी का ध्यान आता है. लेकिन अब एआई की इस ग्लोबल रेस में भारत ने अपना नाम दर्ज करा दिया है. दरअसल भारतीय आईटी कंपनी एचसीएल टेक के मिले 1,427 करोड़ रुपये के इन्वेसेटमेंट के साथ सर्वम एआई ऑफिशियली 1.5 बिलियन डॉलर की वैल्यू के साथ यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई है. इस खबर में जानिए कि कैसे बेंगलुरु के दो इंजीनियरों ने 3 साल के अंदर स्टार्टअप Sarvam AI को ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में दिग्गजों के साथ लाकर खड़ा कर दिया.
7 बातें, जो बयां कर रही Sarvam AI की ताकत
- सीरीज बी फंडिंग राउंट के बाद Sarvam AI की वैल्यूएशन 1.5 बिलियन डॉलर तक पहुंची, जिससे ये टेक की दुनिया में नई यूनिकॉर्न बनी.
- देश की दिग्गज कंपनी एचसीएल टेक ने 1,427 करोड़ रुपये का निवेश Sarvam AI में किया है. ये निवेश भारत के किसी भी एआई स्टार्टअप में अभी तक का सबसे बड़ा दांव है.
- इस बड़े निवेश के बदले एचसीएल टेक को Sarvam AI में 10.46% की इक्विटी हिस्सेदारी मिली
- सर्वम एआई ने सीरीज बी राउंड से अभी तक 234 मिलियन डॉलर की रकम जुटाई गई
- सर्वम एआई के मॉडल्स में 10 से ज्यादा भारतीय भाषाएं शामिल हैं
- सर्वम एआई 100% मेड इन इंडिया है. भारत के डेटा, भारत की संस्कृति के साथ भारतीय भाषाओं पर ये पूरी तरह बेस्ड है
- भविष्य में 150 बिलियन डॉलर के भारतीय सेक्टर को सर्वम एआई अपने कस्टमाइज्ड एआई सॉल्यूशंस से बदलने की तैयारी में है.
दो इंजीनियरों ने नौकरी छोड़ रचा इतिहास
सर्वम एआई ने रातों रात सफलता हासिल नहीं की है. इसके पीछे 3 साल की कड़ी मेहनत और एक विजन रहा है. ये कहानी सिर्फ पैसों ओर फंडिंग भी नहीं है. सर्वम एआई की शुरुआत बेंगलुरू के दो इंजिनियर विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार ने की थी. उन्होंने देखा कि साल 2023 में चैटजीपीटी हो या गूगल जेमिनी ये सभी अंग्रेजी भाषा में तो कमाल का काम करते थे, पर जब बात किसी भारतीय भाषा जैसे हिंदी, तमिल, तेलुगु या बंगाली की आ जाती है तो, ये ठीक तरह से रिजल्ट नहीं दे पाते थे. इस समस्या को दूर कोई विदेशी एआई मॉडल नहीं कर सकता था, ऐसे में विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार ने अपनी नौकरी छोड़ी और सर्वम एआई की नींव रख दी.
पहले तो सभी को यही लग रहा था कि ग्लोबल टेक दिग्गजों के सामने ये ज्यादा समय नहीं टिका पाएंगे. लेकिन विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार ने हार नहीं मानी और देश के लिए कस्टमाइज्ड भाषा मॉडल पर काम करते रहे. नतीजन आज देश के बड़े बैंक जैसे एसबीआई लाइफ, एलआईसी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, टाटा कैपिटल और क्रेड इनके एआई मॉडल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.
एचसीएल टेक ने क्यों लगाया पैसा?
आईटी सेक्टर की कंपनी एचसीएल टेक का सर्वम एआई में किया 1,427 करोड़ रुपये का निवेश बताता है कि, भविष्य पूरी तरह से एआई का है. साथ ही कंपनी इस निवेश के जरिए अपने विदेशी क्लाइंट्स को एआई के शानदार सॉल्यूशंस देना चाहती है. एक बात और कि इस निवेश के जरिए ना सिर्फ सर्वम एआई को ग्लोबल मार्केट में एंट्री मिलेगी, बल्कि एचसीएल टेक भी अपने कॉम्पिटिटर जैसे टीसीएस, इंफोसिस से आगे निकल पाएगी.
चैटजीपीटी जेमिनी से कैसे अलग सर्वम एआई?
सबसे पहले कॉस्ट को लेकर मुकाबला है. जहां विदेशी एआई मॉडल्स का इस्तेमाल करना भारतीय कंपनियों के लिए महंगा रहता है. वहीं सर्वम एआई ने कम दरों पर एआई सॉल्यूशंस तैयार कर दिए हैं. इसके साथ ही ये मॉडल विदेशी एआई मॉडल्स के जैसे सिंपल नहीं रखता, बल्कि भारतीय भाषाओं के जैसे मुहावरों का भी इस्तेमाल करता है. यानी एक मशीनरी भाषा को छोड़ ह्यूमन टच की फील देतेा है.
सर्वम का टेक्स्ट-टू-स्पीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है. इनके लेटेस्ट मॉडल्स सर्वम विजन और बुलबुल वी3 ने हाल ही में गूगल के जेमिनी और ओपनएआई के चैट जीपीटी को भी कुछ टेस्ट्स में पछाड़ दिया. फाउंडर प्रत्युष ने बताया कि, सर्वम का मॉडल 3 अरब पैरामीटर्स पर बेस्ड है. फोटो और हैंडराइटिंग को काफी अच्छे से समझ सकता है. इतना ही नहीं ये अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं को भी समझ सकता है. साथ ही टेस्ट्स में डॉक्यूमेंट्स को स्कैन करके डिजिटाइज करने में कारगर साबित हो रहा है.
सर्वम एआई की 1.5 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन से पता चलता है कि भारती स्टार्टअप्स दुनिया में भविष्य की तकनीक को लीड करने के लिए तैयार हैं.
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