- हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स की पांच डॉक्टरों की टीम ट्विशा शर्मा के शव का पोस्टमॉर्टम करने भोपाल गई है
- ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने हाईकोर्ट के फैसले का आभार व्यक्त करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है
- ट्विशा शर्मा के पिता नवनीधि ने समर्थ सिंह के सरेंडर की कोशिश को न्यायपालिका का मजाक बताया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ट्विशा शर्मा के शव का दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने के आदेश के बाद दिल्ली एम्स के पांच डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई है. एम्स से पांच फॉरेंसिक डॉक्टरों की एक टीम भोपाल भेजी जा रही है, जो शव की जांच करेगी और फिर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी. यह टीम फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टरों की है, जो अपनी रिपोर्ट डॉक्टर सुधीर गुप्ता को सौंपेगी. सुधीर गुप्ता रिपोर्ट को एनालाइज करके फाइनल रिपोर्ट सौंपेंगे.
एम्स फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने एनडीटीवी को बताया, "एम्स दिल्ली को मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से अदालत के उस आदेश की जानकारी मिली है, जिसमें ट्विशा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम करने का निर्देश दिया गया है. शव फिलहाल एम्स भोपाल के मुर्दाघर में है. आदेश मिलते ही डॉक्टरों की एक टीम वहां भेजी जाएगी या यदि शव को एम्स दिल्ली स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाती है, तो पोस्टमार्टम यहीं किया जाएगा. दोनों ही मामलों में, हमारी फोरेंसिक टीम न्याय के हित में आवश्यक कार्रवाई करेगी."

ट्विशा शर्मा का शव फिलहाल एम्स भोपाल की मॉर्चरी में रखा गया है. हालांकि जानकारी के अनुसार, पहले यह तय किया जा रहा था कि शव को शाम तक भोपाल से दिल्ली एम्स लाया जाए, लेकिन शव की स्थिति को देखते हुए अब डॉक्टरों की टीम को ही भोपाल भेजने का फैसला लिया गया है.
उन्होंने कहा कि पिछले दस दिनों से हम लगातार इसके लिए संघर्ष और अपील कर रहे थे. हमें उम्मीद है कि कल तक पूरी प्रक्रिया और कार्रवाई सही तरीके से पूरी हो जाएगी.

इधर ट्विशा के पति समर्थ के जबलपुर कोर्ट में सरेंडर की कोशिश के बाद, ट्विशा के पिता नवनीधि ने आरोप लगाया कि पूरी घटना "न्यायपालिका का मजाक" है और एनडीटीवी पर दावा किया कि आरोपी "गुप्त प्रक्रिया" के जरिए पुलिस हिरासत से बचने की कोशिश कर रहा था. नवनीधि के अनुसार, उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि आरोपी केवल निचली अदालत या जांच अधिकारी के समक्ष ही आत्मसमर्पण कर सकता है. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि आधिकारिक आदेश पत्र अधिकारियों तक पहुंचने से पहले ही जबलपुर अदालत में कार्यवाही के माध्यम से राहत पाने का प्रयास किया गया.
नवनीधि ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत परिसर के बाहर अफरा-तफरी मची हुई थी. उन्होंने दावा किया कि लगभग 150 से 200 लोग बाहर जमा हो गए थे और उनके वकील, मीडियाकर्मियों और समर्थकों को कथित तौर पर धमकाया और पीटा गया. उन्होंने कहा कि उनके वकील, जिन्हें 35 वर्षों से अधिक का कानूनी अनुभव है, उसने भी पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी थी.

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नवनीधि ने इसे "न्यायिक इतिहास का काला दिन" बताते हुए आरोप लगाया कि आदेश पारित होने से पहले उनके पक्ष को दलीलें पेश करने का उचित अवसर नहीं दिया गया. उन्होंने आगे दावा किया कि आरोपी पक्ष को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जा रही थी, जबकि पीड़ित पक्ष को अदालत परिसर के बाहर धमकाया जा रहा था.
नवनीधि ने सीबीआई को मामले की तत्काल जिम्मेदारी सौंपने की अपनी मांग को दोहराया. उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि केंद्रीय एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने में देरी होती है, तो सबूतों को कथित तौर पर नष्ट या हेरफेर किया जा सकता है. उन्होंने एनडीटीवी से कहा, "सीबीआई को तत्काल जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इन सभी गतिविधियों को रोकना चाहिए."

अदालत द्वारा दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति देने पर नवनीधि ने कहा कि परिवार शुरू से ही इसकी मांग कर रहा था. उन्होंने दावा किया कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट अधूरी लगती है और आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण तकनीकी चीजों को नजरअंदाज किया गया था.
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