उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 जून को उन्नाव दौरे में बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बाद राजधानी लखनऊ और कानपुर के बीच नमो भारत रैपिड रेल (RRTS) कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है. दिल्ली-एनसीआर के बाद यह उत्तर प्रदेश का दूसरा और देश के सबसे अहम रैपिड रेल कॉरिडोर में से एक होगा. लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल प्रोजेक्ट की सर्वे रिपोर्ट और फिजिबिलिटी सर्वे पर काम शुरू किया जा रहा है. लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारियों को दोनों शहरों के भीतर तेज आरामदायक कनेक्टिविटी विकल्प मिल जाएगा.
लखनऊ-कानपुर नमो भारत कॉरिडोर
यह नमो भारत समेरी हाई स्पीड रैपिड रेल लखनऊ से शुरू होकर उन्नाव होते हुए कानपुर तक जाएगा. इसके लिए ठीक वैसा ही प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जैसा दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए किया गया था. सीएम योगी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले उन्नाव का इलाका खुद को लखनऊ और कानपुर के बीच दबा हुआ और उपेक्षित महसूस करता था, मगर अब लखनऊ का विकास केवल हजरतगंज या राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्नाव होते हुए सीधे कानपुर तक पहुंचेगा. लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन का भी विकास हो रहा है. इसमें लखनऊ, बाराबंकी, हरदोई, उन्नाव समेत छह जिलों को शामिल किया गया है.
कानपुर से लखनऊ अमौसी के बीच के प्रस्तावित स्टेशन
- नयागंज (कानपुर): यह इस कॉरिडोर का शुरुआती टर्मिनल स्टेशन होगा, जो कानपुर के मुख्य व्यापारिक केंद्रों को जोड़ेगा
- उन्नाव : कानपुर और लखनऊ के बीच का यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण जंक्शन हब होगा
- बशीरपुर, बशीरतपुरगंज: उन्नाव जिले के ग्रामीण और आउटर क्षेत्र को कनेक्टिविटी देने के लिए
- नवाबगंज: उन्नाव-लखनऊ बॉर्डर के पास नवाबगंज पक्षी विहार (बर्ड सेंचुरी) और आस-पास के इलाकों को जोड़ेगा
- बंथरा (लखनऊ आउटर): लखनऊ की सीमा में प्रवेश करते ही यह स्टेशन वहां के इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग हब को जोड़ेगा
- अमौसी (लखनऊ): यह पहले चरण का आखिरी स्टेशन होगा, जो सीधे एयरपोर्ट और लखनऊ मेट्रो के अमौसी स्टेशन को जोड़ेगा
लखनऊ से आगे बाराबंकी और अयोध्या रूट (दूसरा चरण)
- सुशांत गोल्फ सिटी (लखनऊ): लखनऊ का आधुनिक और पॉश आवासीय इलाका
- जुगपुर / जुग्गाौर: लखनऊ और बाराबंकी के बॉर्डर के पास का क्षेत्र
- बरैल / बरेल: बाराबंकी का आउटर इलाका
- सफदरगंज: बाराबंकी जिला
- भिटरिया: बाराबंकी और अयोध्या के बीच का प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग पड़ाव
- अयोध्या: अंतिम टर्मिनस स्टेशन, जो धार्मिक पर्यटन को बड़ी रफ्तार देगा
गंगा नदी पर नए पुल को मंजूरी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने गंगा नदी पर नए पुल को भी मंजूरी दी है. इससे कानपुर और उन्नाव के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी. गंगा नदी पर दो नए अतिरिक्त पुलों के प्रस्ताव को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है. कानपुर और उन्नाव के बीच अभी जाजमऊ, शुक्लागंज और गंगा बैराज जैसे इलाकों को पुल के जरिये जोड़ा गया है.
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स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) और आउटर रिंग रोड
लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल प्रोजेक्ट यूपी सरकार के स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) मास्टरप्लान का हिस्सा है. उन्नाव को इस एससीआर (SCR) क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है. इसमें विशाल आउटर रिंग रोड बनाने की भी योजना है. ये आउटर रिंग रोड केवल लखनऊ-कानपुर को ही नहीं, बल्कि आसपास के 6 जिलों लखनऊ, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी और रायबरेली को आपस में जोड़ेगा. इससे एक बड़ा इकोनॉमिक और डेवलपमेंट क्लस्टर तैयार होगा.
उन्नाव को डिफेंस कॉरिडोर बड़ा तोहफा
सीएम योगी ने इस दौरे पर उन्नाव को 570 करोड़ से अधिक की 101 विकास परियोजनाओं की सौगात दी. उन्नाव में 7 सौ एकड़ जमीन पर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर और नए औद्योगिक क्लस्टर के लिए तैयार की जा रही है. इसके साथ ही उन्नाव में पंजाब यूनिवर्सिटी का कैंपस भी बन रहा है. सीएम योगी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे भी उन्नाव से होकर गुजर रहा है, जो जिले को वर्ल्ड लेवल के बुनियादी ढांचे से जोड़ता है.
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे भी तैयार
कानपुर और लखनऊ को उन्नाव के रास्ते जोड़ने वाला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे भी बनकर तैयार है. सीएम योगी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसका उद्घाटन कर सकते हैं. 63 किमी लंबा कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे (NE-6) उत्तर प्रदेश का एडवांस्ड 6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है. इससे दोनों शहरों का सफर 2-3 घंटे से महज 35 से 45 मिनट का रह जाएगा.
गंगा बैराज से आउटर रिंग रोड तक
यह एक्सप्रेसवे लखनऊ में शहीद पथ के पास से शुरू होगा और कानपुर में गंगा बैराज के करीब आजाद चौराहा पर खत्म होगा. यह एक्सप्रेसवे ट्रैफिक जाम से बचने के लिए लखनऊ आउटर रिंग रोड को सीधे कानपुर आउटर रिंग रोड से भी जोड़ेगा. यह एक्सप्रेसवे नेशनल हाईवे (NH-27) के समानांतर बनाया जा रहा है. ये लखनऊ और उन्नाव से होकर कानपुर को छुएगा. इसके लिए लखनऊ के 11 और उन्नाव के लगभग 31 गांवों से रास्ता बनाया गया है.
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