Chittorgarh News: राजस्थान का वो चमत्कारी मंदिर जहां भगवान को भक्तों का 'बिजनेस पार्टनर' माना जाता है और जहां के दानपात्र से हर महीने करोड़ों के नोट निकलते हैं, वहां अब एक बड़ा बदलाव हो गया है. मेवाड़ के सुप्रसिद्ध श्री सांवरिया सेठ मंदिर में अब भक्त अपनी मर्जी से '56 भोग' नहीं लगा पाएंगे और न ही भगवान को मोरपंख चढ़ा सकेंगे. मंदिर मंडल ने दर्शन की व्यवस्था को आसान बनाने के लिए ये कड़ा फैसला लिया है.
क्यों बंद हुआ 56 भोग और मोरपंख?
मंदिर में आजकल इतनी भीड़ होने लगी है कि दर्शन के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. प्रशासन ने देखा कि जब कोई भक्त '56 भोग' चढ़ाता है, तो उस पूरी प्रक्रिया में करीब 1 घंटा लग जाता है. दिनभर में ऐसे 3-4 भोग लगते थे, जिसकी वजह से आम भक्तों की लाइन रुक जाती थी. अब इन निजी आयोजनों पर रोक लगा दी गई है ताकि लाइन में लगे आखिरी व्यक्ति को भी जल्दी और आसानी से दर्शन मिल सकें. मंदिर मंडल के अध्यक्ष हाजरी दास वैष्णव का कहना है कि अब यहां तिरुपति मंदिर जैसा शानदार मैनेजमेंट लागू किया जा रहा है.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?

Photo Credit: NDTV Reporter
मिलावट पर लगाम और स्वच्छता का ध्यान
इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह शुद्धता भी है. बाजार में मिलने वाली मिलावटी मिठाइयों और प्लास्टिक वाले मोरपंखों से मंदिर की मर्यादा और स्वच्छता पर असर पड़ रहा था. अब भक्तों को मंदिर के काउंटर से ही शुद्ध बालभोग और राजभोग मिलेगा. साथ ही, गर्भगृह को साफ-सुथरा रखने के लिए प्लास्टिक वाले मोरपंखों पर भी पाबंदी लगा दी गई है.
भक्त अब क्या कर सकेंगे?
अगर आपकी कोई मन्नत पूरी हुई है और आप दान करना चाहते हैं, तो आप पहले की तरह नकद रुपये, सोना या चांदी मंदिर के दानपात्र में भेंट कर सकते हैं. अगर आप भोग ही लगाना चाहते हैं, तो मंदिर के काउंटर पर रसीद कटवाकर सरकारी 'राजभोग' का हिस्सा बन सकते हैं. इससे किसी एक व्यक्ति की वजह से हजारों लोगों की लाइन नहीं रुकेगी.
व्यापारियों के 'पार्टनर' हैं सांवरिया सेठ
इस मंदिर की सबसे अनोखी बात ये है कि यहां के भक्त भगवान को अपने व्यापार का हिस्सेदार मानते हैं और मुनाफे का एक हिस्सा दान करते हैं. यही वजह है कि ये राजस्थान का सबसे अमीर मंदिर है. हालांकि, नियम बदलने से कुछ भक्त थोड़े हैरान हैं, लेकिन ज्यादातर लोग खुश हैं कि अब उन्हें कतारों में घंटों खड़े होकर परेशान नहीं होना पड़ेगा.
ये भी पढ़ें:- 3 KG सोना, 152 किलो चांदी और 46 करोड़ नकद, राजस्थान के इस मंदिर में आया रिकॉर्ड तोड़ चढ़ावा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं