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दिल्ली में रेस कोर्स की झुग्गियां 15 दिनों में खाली करनी होंगी, दिल्ली हाई कोर्ट ने क्यों दिया ये आदेश?

Delhi High Court On Slums: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित और रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, लोगों की अपनी मौजूदा जगह पर ही रहने की इच्छा से ज्यादा जरूरी है.

दिल्ली में रेस कोर्स की झुग्गियां 15 दिनों में खाली करनी होंगी, दिल्ली हाई कोर्ट ने क्यों दिया ये आदेश?
रेस कोर्स रोड झुग्गी बस्तियों पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला.
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स रोड की तीन झुग्गी बस्तियों को हटाने और पुनर्वास का आदेश दिया है
  • कोर्ट ने विस्थापित लोगों को सावदा घेवरा पुनर्वास कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं के साथ स्थानांतरित करने को कहा
  • केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से झुग्गी हटाने की जरूरत बताई और संवेदनशील क्षेत्र का हवाला दिया है
नई दिल्ली:

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास के पास मौजूद 3 पुरानी झुग्गी बस्तियों, भाई राम कैंप, डीआईडी ​​कैंप और मस्जिद कैंप को हटाने की परमिशन नगर निगम अधिकारियों को दे दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि उन लोगों को करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित सावदा घेवरा पुनर्वास कॉलोनी में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के साथ पुनर्वासित किया जाए. जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की अध्यक्षता वाली बेंच ने झुग्गी के लोगों को इस जगह को खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया है. अदालत ने यह माना कि ये लोग इस जगह पर अवैध कब्जेदार हैं.

पुनर्वास प्रक्रिया से लोगों को कम से कम परेशानी हो

अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुनर्वास प्रक्रिया से विस्थापित किए जा रहे लोगों के जीवन में कम से कम परेशानी पैदा हो. कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं बेदखली के लिए वैध आधार हैं. अदालतों को कार्यपालिका के नीतिगत फैसलों में आसानी से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

केंद्र ने दिया सुरक्षा चिंताओं का हवाला

केंद्र सरकार  ने पहले अदालत को बताया था कि शिविरों को हटाना जरूरी है, क्योंकि ये सैन्य प्रतिष्ठानों के पास हैं और यह क्षेत्र  संवेदनशील हैं, जहां पर मजबूत डिफेंस इंफ्रास्ट्र्क्चर की जरूरत है. सरकार ने मौजूदा वैश्विक सुरक्षा माहौल का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि ऐसे क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.

सावदा घेवरा में पुनर्वास का आदेश

सरकार के मुताबिक, सावदा घेवरा में पुनर्वास का काम चल रहा है. जहां 700 से ज्यादा प्रभावित लोगों खओ भेजा जा रहा है. इनमें से 192 ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा जारी आवंटन पत्र स्वीकार कर लिए हैं और 136 लोग फ्लैट ले चुके हैं. कोर्ट को बताया गया कि 184 निवासियों की पात्रता के संबंध में पहले की आपत्तियां वापस ले ली गई हैं, और अधिकारियों ने अब कहा है कि सभी पात्र निवासियों को आवास दिया जाएगा. 

झुग्गी के लोगों की याचिकाएं

यह मामला दिल्ली रेस क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड के पास रेस कोर्स रोड पर स्थित भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी ​​कैंप के लोगों द्वारा दायर कई याचिकाओं के जरिए अदालत तक पहुंचा. इन लोगों ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन भूमि और विकास कार्यालय द्वारा अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में जारी किए गए बेदखली नोटिसों को चुनौती दी थी, और नोटिसों को रद्द करने या पास के किसी स्थान पर पुनर्वास की मांग की थी. 

उन्होंने तर्क दिया कि सावदा घेवरा में पुनर्वास नीतिगत दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, जो यथास्थान पुनर्वास या पांच किलोमीटर के दायरे में पुनर्वास का समर्थन करते हैं. यह खराब बुनियादी ढांचे, जिसमें सीवेज की कमी और घटिया निर्माण शामिल है, पर चिंता व्यक्त की.

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने  कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित और रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना,निवासियों की अपनी मौजूदा जगह पर ही रहने की इच्छा से ज्यादा जरूरी है. 11 मई को सुनाए गए फैसले में जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने भाई राम कैंप, DID कैंप और मस्जिद कैंप के लोगों को 15 दिनों के भीतर जगह खाली करने का आदेश दिया है.

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