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क‍िसान पर‍िवार का बेटा NHAI में बना डिप्टी मैनेजर, बचपन में ही हो गई थी प‍िता की मौत; 24 साल की उम्र में हास‍िल की उपलब्‍धि

अपनी इस उपलब्धि पर संदीप ने धैर्य, ज‍िम्मेदारी और लगातार कोशिश करने के महत्व पर जोर दिया. उन्‍होंने कहा,  हो सकता है कि कड़ी मेहनत से तुरंत नतीजे न मिलें, लेकिन लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने से आखिरकार आगे बढ़ने का रास्ता खुल ही जाता है. 

क‍िसान पर‍िवार का बेटा NHAI में बना डिप्टी मैनेजर, बचपन में ही हो गई थी प‍िता की मौत; 24 साल की उम्र में हास‍िल की उपलब्‍धि

सूर्यापेट (तेलंगाना):   तेलंगाना के एक छोटे से गांव के रहने वाले 24 साल के बोड्डू संदीप यादव को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) में नौकरी मि‍ली है. संदीप जब सातवीं क्‍लास में थे, तभी उनके स‍िर से प‍िता का साया छ‍िन गया था. GATE स्कोर के आधार पर हुई भर्ती प्रक्रिया में संदीप ने सिविल इंजीनियरिंग में 46वीं रैंक हासिल की. उन्हें NHAI के चित्तूर डिवीजन में डिप्टी मैनेजर (टेक्निकल) के पद पर नियुक्त किया गया. संदीप की इस उपलब्‍धि‍ पर उनके घर पर खुशी का माहौल है. वहीं, गांव के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं. 

संदीप पलाकेडू मंडल के एल्लापुरम गांव के रहने वाले हैं. संदीप के पिता वेंकटेश्वरलू यादव का निधन तब हो गया था जब संदीप 7वीं कक्षा में थे. उनकी मां धनलक्ष्मी और दादा-दादी लिंगय्या और सयाम्मा ने मुश्किल समय में परिवार को संभाला. खेती-बाड़ी से जुड़े परिवार से होने के कारण, उन्होंने अपनी पांच एकड़ जमीन पर खेती की और साथ ही यह भी पक्का किया कि संदीप और उनकी छोटी बहन सुषमा की पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी न आए. 

पढ़ाई के लिए रोजाना लगभग आठ घंटे दिए

संदीप ने आईआईटी मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करने से पहले मिरियालगुडा में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES) में जाने के लक्ष्य के साथ उन्होंने बाद में हैदराबाद की ACE एकेडमी में 18 महीने कोचिंग ली. संदीप ने अपनी पढ़ाई के लिए रोजाना लगभग आठ घंटे दिए और निजी व आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपना ध्यान पढ़ाई पर बनाए रखा. अब NHAI में उनकी नियुक्ति उनके लिए सिर्फ़ एक सरकारी नौकरी नहीं है, बल्कि वे इसे उन लोगों के प्रति सम्मान के तौर पर देखते हैं जिन्होंने मुश्किल हालात में उनका साथ दिया. 

संदीप ने द‍िया सक्‍सेस मंत्रा

अपनी इस उपलब्धि पर संदीप ने धैर्य, ज‍िम्मेदारी और लगातार कोशिश करने के महत्व पर जोर दिया. उन्‍होंने कहा,  हो सकता है कि कड़ी मेहनत से तुरंत नतीजे न मिलें, लेकिन लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने से आखिरकार आगे बढ़ने का रास्ता खुल ही जाता है. 

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