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तमिलनाडु के 17 साल के Student को ब्राउन यूनिवर्सिटी ने दी 3.55 करोड़ की स्कॉलरशिप, जानिए प्रणव इलांगो की कहानी

चयनित वैज्ञानिकों को पांच साल तक हर वर्ष 25 लाख रुपये की सहायता मिलेगी, जिससे वे विज्ञान और इंजीनियरिंग के नए क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शोध कर सकेंगे.

तमिलनाडु के 17 साल के Student को ब्राउन यूनिवर्सिटी ने दी 3.55 करोड़ की स्कॉलरशिप, जानिए प्रणव इलांगो की कहानी
प्रणव की कहानी सिर्फ़ 3.55 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप या उनके एडमिशन लेटर पर लिखे यूनिवर्सिटी के नाम की वजह से खास नहीं है.

तमिलनाडु के 17 साल प्रणव इलांगो ने छोटी सी उम्र में बड़ी अचीवमेंट अपने नाम कर ली है. दरअसल, प्रणव को ब्राउन यूनिवर्सिटी में 3.55 करोड़ रुपये की फुल स्कॉलरशिप के साथ एडमिशन मिला है. जिसमें उनके चार साल की पढ़ाई और रहने-खाने का खर्च शामिल है. बता दें प्रणव पब्लिक हेल्थ और एप्लाइड मैथमेटिक्स की पढ़ाई करेंगे, जिसमें वे जटिल समस्याओं को समझने, समाधान खोजने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए गणित, टेक्नोलॉजी और डेटा का इस्तेमाल करेंगे. ऐसे में आइए जानते हैं प्रणव इलांगों ने इतनी बड़ी अचीवमेंट कैसे हासिल की...

गणित सिर्फ नंबर नहीं है...

दरअसल, CS एकेडमी, इरोड से पढ़ाई करने वाले प्रणव ने कम उम्र में ही अपनी इंटरनेशनल एकेडमिक जर्नी की तैयारी शुरू कर दी थी. सिर्फ 13 साल की उम्र में, वह डेक्सटेरिटी ग्लोबल के नेशनल स्कॉलर डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल हुए. इस प्रोग्राम के जरिए मिली मेंटरशिप और ट्रेनिंग ने उन्हें न सिर्फ पढ़ाई में, बल्कि एक लीडर और प्रॉब्लम सॉल्वर के तौर पर भी आगे बढ़ने में मदद की. 

प्रणव की एकेडेमिक जर्नी अचीवमेंट से भरी है. उन्हें 'आउटस्टैंडिंग कैम्ब्रिज लर्नर्स' में पहचाना गया, जिसमें IGCSE मैथमेटिक्स में 'वर्ल्ड टॉपर' का सम्मान मिला. लेकिन प्रणव के लिए गणित सिर्फ अच्छे नंबर लाने का सब्जेक्ट नहीं है. यह समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के तरीके खोजने का एक जरिया है.

डेटा का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?

प्रणव की दिलचस्पी सॉफ्टवेयर, एंटरप्रेन्योरशिप, इंजीनियरिंग और डेटा-बेस्ड प्रॉब्लम सॉल्विंग में बढ़ी. जिसके बाद उनकी दिलचस्पी धीरे-धीरे एक बड़े सवाल पर टिक गई- लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी और डेटा का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?

प्रणव का लंबे समय का गोल एक ऐसा पब्लिक-हेल्थ वेंचर बनाना है जो सरकारों और कम्यूनिटीज को काम की जानकारी और डेटा दे सके, खासकर उन इलाकों में जहां भरोसेमंद जानकारी और संसाधनों पहुंच नहीं है.

उन्होंने शिक्षा और हेल्थकेयर में टेक्नोलॉजी पर आधारित समाधानों पर भी काम किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रोग्रामिंग और डेटा साइंस शामिल हैं.

इसीलिए ब्राउन में पब्लिक हेल्थ और अप्लाइड मैथमेटिक्स को चुनना उनके लिए बहुत अहम है. प्रणव इन्हें अलग-अलग क्षेत्र नहीं मानते, बल्कि उन्हें इन दोनों को एक साथ लाने का मौका दिखता है. वे गणितीय सोच, टेक्नोलॉजी और डेटा का इस्तेमाल करके पब्लिक हेल्थ की चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझना और प्रैक्टिकल सॉल्यूएशन निकालना चाहते हैं.

उनके लिए, गणित का मकसद सिर्फ नंबरों तक सीमित नहीं है. यह समुदायों को समझने, पैटर्न की पहचान करने और लाखों लोगों पर असर डालने वाली समस्याओं से निपटने में फैसले लेने वालों की मदद करने का एक जरिया बन सकता है.

जिंदगी बदलने वाला चांस

1764 में स्थापित, ब्राउन अमेरिका के आठ आइवी लीग विश्वविद्यालयों में से एक है और वहाँ के सबसे चुनिंदा संस्थानों में गिना जाता है. इसका एकेडमिक माहौल, अलग-अलग विषयों को मिलाकर पढ़ने का तरीका और गणित, विज्ञान और ह्यूमैनिटीज़ में इसकी मज़बूती प्रणव को उन क्षेत्रों के मेल को समझने का मौका देती है जिन्होंने उनकी महत्वाकांक्षाओं को आकार दिया है. हालांकि, प्रणव के लिए ब्राउन पहुँचना तो बस शुरुआत है.

उनका मानना ​​है कि पिछले कुछ सालों में मिली मेंटरशिप और ट्रेनिंग ने न सिर्फ़ उनके सीखने के तरीके को, बल्कि उनके सोचने, समस्याओं को सुलझाने और नेतृत्व करने के तरीके को भी आकार दिया है. ब्राउन में, वे गणित, टेक्नोलॉजी और पब्लिक हेल्थ की अपनी समझ को और गहरा करना चाहते हैं और उस ज्ञान का इस्तेमाल भारत के लिए काम के समाधान बनाने में करना चाहते हैं.

ये तो बस शुरआत है...

प्रणव की कहानी सिर्फ़ 3.55 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप या उनके एडमिशन लेटर पर लिखे यूनिवर्सिटी के नाम की वजह से खास नहीं है. बल्कि यह इरोड के उस छात्र की कहानी है जिसने कम उम्र में ही भौगोलिक सीमाओं से परे भविष्य के बारे में सोचना शुरू कर दिया था, और फिर उस महत्वाकांक्षा को हकीकत में बदलने के लिए लगातार काम किया.

उनका अगला अध्याय उन्हें तमिलनाडु से दुनिया की एक बेहतरीन यूनिवर्सिटी तक ले जाएगा. इरोड के एक क्लासरूम से लेकर आइवी लीग तक, प्रणव इलांगो का सफर इस बात की मिसाल है कि टैलेंट कहीं से भी उभर सकता है. सही मार्गदर्शन, दृढ़ संकल्प और मकसद के साथ, बड़े-बड़े सपनों को भी आगे बढ़ने का रास्ता मिल सकता है.

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