Tamilnadu Assembly Election 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने में नौ दिन शेष हैं. ऐसे में तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक नीत राजग में सीट बंटवारे को लेकर जारी बातचीत एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है और गठबंधन की प्रमुख पार्टी को लगभग 170 सीट मिलने की संभावना है. पार्टी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी.
अन्नाद्रमुक का बहुमत पर फोकस
माना जाता है कि अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी की 19 मार्च को हुई नई दिल्ली यात्रा के दौरान सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया गया और पार्टी के 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा की लगभग 160 से 170 सीट पर चुनाव लड़ने की संभावना है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अन्नाद्रमुक को सरकार बनाने के लिए अपने दम पर बहुमत प्राप्त हो.”
सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला
पार्टी के एक सूत्र के अनुसार, भाजपा को 30 सीट आवंटित होने की संभावना है. यह संख्या 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा लड़ी गई सीट से 10 अधिक है. पीएमके (अंबुमणि) को लगभग 17 सीट मिलने की संभावना है. राजग में हाल में शामिल हुई टीटीवी दिनाकरन के नेतृत्व वाली एएमएमके को नौ सीट मिल सकती हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री जी.के. वासन के नेतृत्व वाली टीएमसी को तीन सीट मिल सकती हैं. सूत्र ने कहा कि गठबंधन में शामिल छोटे दल या तो अन्नाद्रमुक के दो पत्तों वाले चुनाव चिह्न पर या भाजपा के कमल के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे.
दिल्ली में तेज हुई बैठकों की प्रक्रिया
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीट बंटवारे की बातचीत में सीधे तौर पर शामिल हैं तथा पलानीस्वामी के साथ शुरुआती दौर की बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है.” उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय राजधानी में शाह की पीएमके नेता अंबुमणि रामदास और एएमएमके महासचिव दिनाकरन के साथ हुई बातचीत के बाद, भाजपा के तमिलनाडु चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल समझौते को अंतिम रूप देने के लिए चेन्नई पहुंचेंगे.
2021 चुनाव में जीती थीं 66 सीटें
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान राजग का हिस्सा रही अन्नाद्रमुक ने 179 सीट पर चुनाव लड़ा था और 66 सीट जीती थीं, जबकि भाजपा ने 20 सीट पर चुनाव लड़ा और चार सीट जीतकर दो दशक बाद विधानसभा में प्रवेश किया. पीएमके को 23 सीट आवंटित की गई थीं, जिनमें से उसने पांच सीट जीती थीं, लेकिन पिछले साल एस रामदास और उनके बेटे अंबुमणि के बीच नेतृत्व विवाद के कारण पार्टी में फूट पड़ गई थी. अंबुमणि ने भाजपा के साथ गठबंधन किया है, जबकि एस रामदास ने दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की पूर्व करीबी सहयोगी वी के शशिकला के साथ गठबंधन किया है.
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