- असम कांग्रेस के नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे का सस्पेंस बरकरार है. बोरा चर्चा के बाद शाम तक अंतिम फैसला लेंगे.
- भूपेन बोरा ने कहा कि इस्तीफे की वजह 'अपमान' है और यह कदम अपने 'आत्मसम्मान की रक्षा' के लिए उठाया है.
- बोरा के मुताबिक, रकीबुल हुसैन ने उनके खिलाफ पार्टी में अभियान चलाया और उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया.
असम कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे का सस्पेंस बरकरार है. आलाकमान कह रहा है कि इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है, लेकिन बोरा भी अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटे हैं. बोरा ने कहा कि वो अपने परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों से चर्चा कर रहे हैं और शाम तक अंतिम फैसला लेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करेंगे, लेकिन सवाल है कि आखिर कांग्रेस से 3 दशक से जुड़े बोरा आखिर इस्तीफा क्यों दे रहे हैं. NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में बोरा ने पहली बार इसका खुलासा किया है.
भूपेन बोरा ने साफ तौर पर कहा कि इस्तीफे की मुख्य वजह 'अपमान' है और उन्होंने यह कदम अपने 'आत्मसम्मान की रक्षा' के लिए उठाया है.
कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
NDTV के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में भूपेन बोरा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर उनके खिलाफ अभियान चलाया गया. बोरा के मुताबिक, रकीबुल हुसैन ने उनके खिलाफ पार्टी में अभियान चलाया और उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गौरव गोगोई हमेशा रकीबुल हुसैन का समर्थन करते रहे हैं. बोरा ने कहा कि गौरव गोगोई ने हर समिति और हर निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में रकीबुल हुसैन को आगे बढ़ाया.
भूपेन बोरा ने कहा कि मुझे गौरव गोगोई के नेतृत्व से कोई समस्या नहीं थी, लेकिन अब असम कांग्रेस में वह सिर्फ चेहरा भर रह गए हैं, जबकि पार्टी को रकीबुल हुसैन चला रहे हैं.
खराब प्रदर्शन को लेकर भी सवाल
पंचायत चुनाव में खराब प्रदर्शन को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए. बोरा ने कहा कि गौरव गोगोई के कथित ‘पाक लिंक' को लेकर चले अभियान की वजह से पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने सवाल किया कि अगर आरोप गलत थे तो मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं दायर किया गया? बोरा ने दावा किया कि वह गौरव गोगोई के बचाव में सबसे पहले सामने आए थे.
क्या है इस्तीफे का स्टेटस?
बोरा के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने उनके पत्र और सुझावों पर कोई स्पष्ट रुख नहीं लिया है. उन्होंने कहा, "हाईकमान ने मुझे इस्तीफा नहीं देने को कहा, लेकिन मेरे पत्र पर कोई जवाब नहीं दिया. मैंने अपना अंतिम प्रस्ताव भी दे दिया है, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.”
भविष्य की राजनीति पर बोरा ने स्पष्ट किया, “मैं चुनाव जरूर लड़ूंगा, लेकिन किस चुनाव चिह्न पर लड़ूंगा, यह अभी तय नहीं है.”
अपने एक बयान में उन्होंने कहा कि मेरी सबसे बड़ी गलती यह थी कि मैंने AIUDF को खत्म किया. अब असम कांग्रेस ही नई AIUDF बन गई है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी मूल सेक्यूलर विचारधारा को बनाए रखने में असफल रही है. बोरा करीब 32 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं.
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