- सूरत में भारी बारिश के बाद बाढ़ से बहुत नुकसान हुआ है. शहर में भारी जलभराव है.
- सूरत जिले में बाढ़ की वजह से 47 लोगों की मौत होने की जानकारी आई है. 184 जगहों पर बाढ़ के हालात हैं.
- सूरत में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है. हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं.
सूरत में जुलाई के पहले सप्ताह में हुई रिकॉर्ड और लगातार बारिश ने पूरे जिले में भारी तबाही मचा दी है. 1 से 7 जुलाई तक मौसम विभाग ने सूरत के लिए 'एक्सट्रीमली हेवी रेन' का रेड अलर्ट जारी किया था. इस दौरान लगातार हुई बारिश 8 जुलाई की सुबह तक जारी रही. आखिरी के तीन दिनों में हुई असामान्य बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया, जिससे यातायात, परिवहन और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया. लगातार बारिश ने सूरत शहर की पूरी हालत बदल गई है. कई इलाकों में अभी भी बाढ़ का पानी भरा है. जिसके बाद यहां सफाई अभियान चलाया जा रहा है.
सूरत जिले में 47 लोगों की मौत
सूरत के डिप्टी तहसीलदार साजिद मेरुजा ने बताया कि भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति के बीच अब तक पूरे सूरत जिले में 47 लोगों की मौत हुई है. इनमें 43 मौतों की रिपोर्ट सूरत शहर से और 4 मौतों की रिपोर्ट सूरत ग्रामीण क्षेत्र से आई है. इन मामलों में 19 मौतों की पुष्टि तहसीलदार स्तर की जांच के बाद हो चुकी है, जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल यही आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध है और जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी.

सूरत में 184 जगहों पर भरा था पानी
डिप्टी तहसीलदार ने बताया कि बारिश के दौरान सूरत महानगरपालिका ने शहर के 184 स्थानों पर जलभराव की स्थिति दर्ज की थी. कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई थीं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन, फायर विभाग और अन्य एजेंसियों को लगातार राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा. हालांकि अब अधिकांश इलाकों से पानी निकल चुका है और शहर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं.
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सूरत में युद्ध स्तर पर चल रहा अभियान
प्रशासन ने प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है. 100 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में डोर-टू-डोर सर्वे कर रही हैं, ताकि प्रत्येक प्रभावित परिवार का नुकसान दर्ज कर सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा सके. अब तक प्रशासन ने एसडीआरएफ के तहत विभिन्न मदों में 15 से 20 करोड़ रुपये की सहायता की मांग राज्य सरकार से की थी, जिसे मंजूरी मिलने के बाद राहत राशि का वितरण शुरू कर दिया गया है.

अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित परिवारों को कैश डोल योजना के तहत प्रति व्यक्ति 900 रुपये दिए जा रहे हैं. एक परिवार में अधिकतम दो सदस्यों को 1,800 रुपये की सहायता मिल सकती है. इसके अलावा घरेलू सामान के नुकसान की भरपाई के लिए 5,000 रुपये प्रति परिवार की सहायता दी जा रही है. जिन लोगों के घरों में पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उनका सर्वे पूरा होने के बाद अन्य पात्र सहायता भी एसडीआरएफ के नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी.
4 लाख का मिलेगा मुआवजा
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि बारिश के कारण जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है. प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए राजस्व विभाग, नगर निगम, फायर विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं. प्रशासन का कहना है कि अब पानी तेजी से उतर रहा है और राहत कार्यों के साथ-साथ नुकसान का आकलन भी तेजी से किया जा रहा है. सर्वे पूरा होने के बाद पात्र लोगों को एसडीआरएफ के मानकों के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी.
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