Ahmedabad Blasts News: अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने राहत जताई है. अदालत ने विशेष अदालत के वर्ष 2022 के फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों को दी गई मृत्युदंड की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. हालांकि परिवारों का कहना है कि उन्हें अभी पूर्ण न्याय का इंतजार है और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए.
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में 70 मिनट के अंदर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. आतंकियों ने शहर के कई इलाकों के साथ अस्पतालों को भी निशाना बनाया था.
'मुकदमे में हुई देरी, अब तेजी से हो कार्रवाई'
मणिनगर इलाके में हुए धमाके में अपने भाई चिराग शाह को खोने वाले अल्पेशकुमार शाह ने हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि आतंकवादियों में मानवता नहीं होती और उन्हें लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया का फायदा नहीं मिलना चाहिए. उन्होंने पुलिस, प्रशासन और जांच एजेंसियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि मुकदमे में काफी समय लगा.
अल्पेशकुमार शाह ने बताया कि उनके भाई चिराग शाह मणिनगर क्रॉस रोड के पास सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे. इसी दौरान पास में खड़ी एक साइकिल में रखे टिफिन बॉक्स में छिपाए गए बम में विस्फोट हो गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई.
80 वर्षीय पीड़ित ने कहा- आज भी न्याय का इंतजार
वडोदरा जिले के रहने वाले जगदीश अंतानी ने भी न्याय प्रक्रिया में हुई देरी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विशेष अदालत को फैसला सुनाने में करीब 14 साल लग गए और हाईकोर्ट के फैसले में भी चार साल का समय लगा. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में अभी और कितना समय लगेगा, यह पता नहीं है.
अंतानी के रिश्तेदार हिमांशु छाया सरखेज के पास एक बस में हुए धमाके में मारे गए थे. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी रोहिणी अपने छोटे भाई की मौत से पूरी तरह टूट गई थीं. उन्होंने कहा कि परिवार ने 45 साल की उम्र में अपने प्रिय सदस्य को खो दिया और इतने वर्षों बाद भी वे पूर्ण न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
अस्पताल में हुए धमाके की याद आज भी डराती है
अहमदाबाद के असरवा इलाके में अस्पताल के वार्ड में हुए धमाके को याद करते हुए चश्मदीदों ने उस भयावह घटना का जिक्र किया. विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता लक्ष्मण चुडासमा ने बताया कि वह घायल लोगों को असरवा सिविल अस्पताल लेकर जा रहे थे, तभी वहां दूसरा धमाका हुआ.
उन्होंने कहा कि धमाके के बाद उनके बाल जल गए और हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आईं. उन्होंने उस समय का मंजर याद करते हुए कहा कि उनके आसपास लोग मोमबत्तियों की तरह जल रहे थे और धमाके के कारण कुछ शव पेड़ों पर लटके हुए दिखाई दिए थे. चुडासमा करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे थे.
धमाके के असर से जूझ रहे हैं कई पीड़ित
धमाके में घायल हुए नरेंद्र परमार ने बताया कि वह आज भी उस घटना की चोटों के दुष्प्रभाव झेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को छोड़ने गए थे जो उस समय नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी. लौटते समय उन्होंने बड़ी संख्या में घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचते देखा.
परमार घायलों की मदद कर रहे थे तभी अस्पताल के पास जोरदार धमाका हुआ. उन्होंने बताया कि विस्फोट के बाद वह खुद को खून से लथपथ जमीन पर पड़ा पाया. गंभीर चोटों के बावजूद वह किसी तरह वहां से बाहर निकले और एक व्यक्ति की मदद से घर पहुंचे. बाद में परिवार के लोग उन्हें अस्पताल लेकर गए.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं