दिल्ली एनसीआर में दिवाली से पहले पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश सामने आया है. अदालत ने कहा है कि पटाखों पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगा सकते, लेकिन 24 घंटे लगातार आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं दे सकती.कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाएंगे, लेकिन धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य-पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वह धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाकर समाधान तलाशेगा
पटाखा बैन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
जस्टिस एम एम सुंदरेश ने कहा, पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध से कुछ धार्मिक भावनाएं आहत होंगी. हम पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हैं लेकिन हम कहीं भी 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति भी नहीं देंगे, क्योंकि इससे बीमार, बुजुर्गों और बच्चों पर असर पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह ऐसा समाधान तलाशेगा जिसमें पटाखे चलाने के लिए समय-सीमा तय की जाए और यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी.कोर्ट ने CPCB और केंद्र सरकार को बोरियम की मौजूदगी की जांच के लिए और परीक्षण करने तथा पटाखों के संयुक्त फायर टेस्ट कर डेसिबल स्तर निर्धारित करने के लिए और समय दिया है.मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.
दिल्ली एनसीआर में पटाखों से प्रदूषण पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट 2015 के मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के अन्य राज्यों में अक्टूबर से जनवरी के बीच वायु प्रदूषण से प्रभावित इलाकों में पटाखे फोड़ने पर रोक लगाने के आदेश देता रहा है. दिल्ली में सर्दियों के दौरान खराब हवा के कारण कोर्ट ने पहले दिल्ली में पटाखे फोड़ने पर रोक लगा दी थी. हालांकि 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के त्योहार के दौरान दिल्ली NCR में कुछ समय के लिए ग्रीन पटाखे बेचने और फोड़ने की इजाजत दे दी थी. कुछ महीने पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CPCB से पूछा था कि क्या कुछ खास तरह के पटाखों के मामले में थोड़ी छूट दी जा सकती है.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेरियम आधारित पटाखों के इस्तेमाल पर CPCB का जवाब रखने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जॉइंट पटाखे जैसे लड़ी (कई पटाखे एक से जुड़े होते हैं) के निर्माण की इजाजत कुछ शर्तों के साथ दी जा सकती है. कोर्ट ने कहा कि वह इस सुझाव को मानने के लिए तैयार है.
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पराली जलाने का मुद्दा भी उठा
मामले में एक वकील ने कहा, दिवाली के दौरान फसलें भी जलाई जाएंगी, जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचता है. कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि वह पटाखों के बेरोकटोक इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा, लेकिन देखेगा कि क्या त्योहारों के मौसम में कुछ खास समय पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ पटाखा कंपनियों की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर ने कोर्ट से अनुरोध किया कि पटाखों के इस्तेमाल पर पाबंदियों की जांच करते समय सिर्फ दिल्ली को अलग से न देखा जाए.
उन्होंने कहा, पूरे देश के लिए एक ही नियम है, दिल्ली को बिना वजह अलग नहीं किया जाए. मौसम वगैरह से जुड़े कारण हैं, आप आदेश में बदलाव कर सकते हैं या उसे नरम कर सकते हैं, लेकिन दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए.अर्जुन गोपाल और एमसी मेहता मामले के बीच तालमेल बिठाना जरूरी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, एमसी मेहता मामले में एक और पेंडिंग मामले में 15 अक्टूबर 2025 को आदेश पारित किया गया था. हमारे सामने मौजूद मामले और उस मामले के मुद्दे एक जैसे हैं. इसलिए दोनों को एक साथ लेना बेहतर होगा. हम पक्षों के वकीलों को संबंधित बेंच के सामने इस मामले का जिक्र करने की इजाजत देते हैं. पाबंदी की मांग करने वाली सभी दूसरी अर्जियों पर भी सुनवाई की जा सकती है.
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