जुलाई में जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड कमेटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं ने कमेटी के एक सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसके पुनर्गठन की मांग की, लेकिन अदालत ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित किसी कमेटी के बारे में शुरुआत से ही पक्षपात की धारणा नहीं बनाई जा सकती.
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पूर्व डीजीपी को लेकर उठी आपत्ति
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कमेटी में शामिल एक पूर्व डीजीपी सदस्य को लेकर हितों के टकराव की आशंका जताई. उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी उस व्यक्ति के करीबी मित्र और बैचमेट रहे हैं जिसके खिलाफ जांच हो सकती है.
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पूर्व डीजीपी को छोड़कर कमेटी के अन्य सदस्यों को लेकर पक्षपात की कोई आशंका नहीं है. हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित सदस्य को लेकर उठी आपत्तियों पर वह विचार करेगा.
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम करेगी कमेटी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, "हम कमेटी में कोई बदलाव करने के लिए सहमत नहीं हैं. कमेटी काम करें, हम देखेंगे. अगर किसी को लगता है कि कमेटी ने कहीं गलती की है तो हमें बताइए. हम खुली सुनवाई करेंगे."
उन्होंने कहा कि संबंधित पूर्व डीजीपी को कमेटी में इसलिए शामिल किया गया क्योंकि वे पूर्वोत्तर राज्य के डीजीपी रह चुके हैं और मुख्य भूमि की राजनीतिक पार्टियों के करीब होने की संभावना कम है. साथ ही वह कमेटी के सबसे कनिष्ठ सदस्य हैं, इसलिए उनकी भूमिका सीमित रहेगी.
पांच सदस्यीय कमेटी कर रही है जांच
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं. कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं.
सरकार ने किया कमेटी का बचाव
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कमेटी के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों का विरोध करते हुए कहा कि मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने अदालत को बताया कि कमेटी को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं और उसकी पहली बैठक 15 सितंबर को होने वाली है.
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