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This Article is From Sep 10, 2025

एशिया कप भारत-पाक मैच रद्द करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका के जरिए विदेशी धरती पर होने वाले भारत पाक क्रिकेट मैच को रोकने की गुहार लगाई गई है. उर्वशी जैन ने भारत सरकार को इस बाबत उचित निर्देश देने का आग्रह कोर्ट से किया है.

एशिया कप भारत-पाक मैच रद्द करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
(फाइल फोटो)
  • SC में 14 सितंबर को भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले एशिया कप मैच को रद्द करने की याचिका दायर की गई है
  • याचिका में कहा गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद मैच आयोजित करना राष्ट्रीय हित के खिलाफ है
  • याचिकाकर्ताओं ने भारत सरकार को उचित निर्देश देने और राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम लागू करने की मांग की है
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में 14 सितंबर भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले एशिया कप क्रिकेट मैच को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दर्ज की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्रिकेट मैच का आयोजन राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है और हमले में जान गंवाने वाले सशस्त्र बलों और नागरिकों के बलिदान को कमतर करने वाला है. 

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका के जरिए विदेशी धरती पर होने वाले भारत पाक क्रिकेट मैच को रोकने की गुहार लगाई गई है. उर्वशी जैन ने भारत सरकार को इस बाबत उचित निर्देश देने का आग्रह कोर्ट से किया है. वकील स्नेहा रानी और अभिषेक वर्मा के मुताबिक भारत-पाकिस्तान एशिया कप टी-20 मैच रद्द करने के निर्देश के लिए सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है. 

उर्वशी जैन सहित कानून के चार छात्रों ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस जनहित याचिका में एशिया कप टी20 लीग के हिस्से के रूप में 14 सितंबर, 2025 को दुबई में होने वाले भारत-पाकिस्तान टी20 क्रिकेट मैच को रद्द करने के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग की है. याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन के लिए निर्देश देने की भी मांग की है.

याचिका में कहा गया है कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें भारतीय नागरिकों और सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, के बाद पाकिस्तान के साथ एक क्रिकेट मैच का आयोजन राष्ट्रीय गरिमा और जन भावना के साथ एक असंगत संदेश भेजता है. यह तर्क दिया जाता है कि आतंकवाद को पनाह देने वाले राष्ट्र के साथ खेलों में शामिल होना सशस्त्र बलों के मनोबल को कमजोर करता है और शहीदों और आतंकवाद के पीड़ितों के परिवारों को पीड़ा का कारण बनता है.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि क्रिकेट को राष्ट्रीय हित और देश की जनता के जीवन और सेना की निष्ठा और बलिदान से ऊपर नहीं रखा जा सकता है.

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