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This Article is From Aug 22, 2022

तीस्ता शीतलवाड़ की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को भेजा नोटिस, 1 सितंबर तक मांगा जवाब

तीस्ता सीतलवाड़ पर 2002 गुजरात दंगों के मामलों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए दस्तावेज गढ़ने का आरोप है. मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ इसी मामले में जमानत याचिका दाखिल की है.

तीस्ता शीतलवाड़ की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को भेजा नोटिस, 1 सितंबर तक मांगा जवाब

तीस्ता शीतलवाड़ की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी करके एक सितंबर तक जवाब मांगा है.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम विचार करेंगे कि तीस्ता को क्या राहत दी जाए, जब मामला गुजरात हाईकोर्ट में लंबित है. जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि मैं सोराबुद्दीन मुठभेड़ केस में कुछ आरोपियों के लिए बतौर वकील पेश हुआ था. अगर आपको कोई दिक्कत नहीं है तो सुनवाई करेंगे. तीस्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई शुरू की.

 दरअसल, उन पर 2002 गुजरात दंगों के मामलों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए दस्तावेज गढ़ने का आरोप है. मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ इसी मामले में जमानत याचिका दाखिल की है. तीस्ता ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है.  2 अगस्त को, गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल ( SIT) को नोटिस जारी कर सीतलवाड़ और गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आरबी श्रीकुमार द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर जवाब देने को कहा था.  हाईकोर्ट में 19 सितंबर को मामले की सुनवाई होनी है, हालांकि हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी थी. इस बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ के समक्ष जल्द सुनवाई की मांग की गई है. पीठ ने मामले को 22 अगस्त को जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था. इस साल 30 जुलाई को अहमदाबाद सत्र अदालत ने सीतलवाड़ को जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह और अन्य आरोपी गुजरात सरकार को "अस्थिर" करने और राज्य को बदनाम करने के उद्देश्य से थे. 

आरोपी को जमानत देने से गलत करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा कि "तत्कालीन मुख्यमंत्री और अन्य के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाने के बावजूद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया है. निचली अदालत का विचार था कि 2002 के गुजरात दंगों के मद्देनजर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ जकिया जाफरी द्वारा दायर की गई शिकायत सीतलवाड़, श्रीकुमार और अन्य आरोपियों द्वारा प्रेरित और उकसाई गई थी. यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि जकिया जाफरी को घटना के बारे में तत्कालीन सीएम और अन्य के खिलाफ लगाए गए आरोपों की दृष्टि से आवेदक-आरोपी और अन्य दोनों द्वारा एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने तब जमानत के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसने इस मामले में नोटिस जारी किया था, लेकिन कोई अंतरिम राहत नहीं दी थी. इस साल 24 जून को, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की याचिका को खारिज कर दिया, जिन्होंने 2017 के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें SIT द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने के मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा गया था.

याचिका को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने पूर्व डीजीपी श्रीकुमार सहित राज्य के अधिकारियों के खिलाफ टिप्पणी करते हुए उन्हें "असंतुष्ट" करार दिया था. कोर्ट ने कहा कि गुजरात राज्य के असंतुष्ट अधिकारियों द्वारा अपने स्वयं के ज्ञान के लिए झूठे खुलासे करके सनसनी पैदा करने का एक संयुक्त प्रयास किया गया था.  पीठ ने कहा कि याचिका " योग्यताहीन " है और " कडाही को उबलने देने के लिए" दायर की गई थी.  अदालत ने कहा कि "प्रक्रिया के इस तरह के दुरुपयोग में शामिल सभी लोगों को कटघरे में खड़ा करने और कानून के अनुसार आगे बढ़ने की जरूरत है. अगले दिन तीस्ता को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 2002 के गुजरात दंगों के मामलों में कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

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