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This Article is From Sep 15, 2025

SIR से आधार कार्ड को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आधार, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज फर्जी बनाए जा सकते हैं. जस्टिस कांत ने कहा, चुनाव आयोग जानता है कि यदि कोई व्यक्ति नागरिक है तो उसे मतदान का अधिकार है, और अगर दस्तावेज धोखाधड़ी से हासिल किया गया है तो मतदाता बनने का कोई अधिकार नहीं है.

SIR से आधार कार्ड को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया
(फाइल फोटो)
  • आधार कार्ड को मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया में शामिल करने के फैसले के खिलाफ याचिका पर EC को नोटिस जारी किया
  • अश्विनी उपाध्याय ने आधार को नागरिकता का प्रमाण न मानते हुए इसे वैध दस्तावेजों की सूची से हटाने की मांग की
  • कोर्ट ने चुनाव आयोग को कानून के तहत SIR प्रक्रिया संचालित करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आधार कार्ड को मतदाता सूची सत्यापन (SIR) प्रक्रिया में 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल करने के फैसले के खिलाफ याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. यह याचिका बीजेपी नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है.

उपाध्याय ने दलील दी कि आधार नागरिकता का कोई प्रमाण नहीं है और इसे विदेशी नागरिक भी प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने मांग की कि आधार को वैध दस्तावेज़ों की सूची से हटाया जाए और पूरे देश में एक साथ SIR प्रक्रिया कराई जाए. उन्होंने कहा, चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी विदेशी नागरिक मतदाता न बन सके. बिहार जैसे राज्यों में कई विदेशी रह रहे हैं.

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आधार, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज फर्जी बनाए जा सकते हैं. जस्टिस कांत ने कहा, चुनाव आयोग जानता है कि यदि कोई व्यक्ति नागरिक है तो उसे मतदान का अधिकार है, और अगर दस्तावेज धोखाधड़ी से हासिल किया गया है तो मतदाता बनने का कोई अधिकार नहीं है.

कोर्ट ने हालांकि उपाध्याय की उस मांग को ठुकरा दिया कि मतदाता आधार के साथ अन्य किसी दस्तावेज को भी जमा करें. साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एक संवैधानिक संस्था होने के नाते चुनाव आयोग से अपेक्षा है कि वह SIR प्रक्रिया को कानून और नियमों के तहत ही संचालित करेगा.

सुनवाई में ADR की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि आयोग SIR प्रक्रिया में अपने ही नियमों का पालन नहीं कर रहा और कानूनी आदेश के बावजूद प्राप्त आपत्तियों को अपलोड नहीं कर रहा. इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन मामले के फैसले को प्रभावित नहीं करेगा. "यदि कोई अवैधता पाई जाती है तो हम अंतिम सूची बनने के बाद भी हस्तक्षेप करेंगे” जस्टिस कांत ने कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि बिहार SIR मामले पर उसका फैसला केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में आयोजित SIR प्रक्रियाओं पर लागू होगा. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई और अंतिम दलीलों के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है.

पिछले सोमवार (8 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आधार को 12वें वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए, क्योंकि शिकायतें आ रही थीं कि अधिकारी इसे मान्यता नहीं दे रहे थे.

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