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This Article is From Feb 11, 2026

क्या पति की रजामंदी के बिना मुस्लिम महिला 'खुला' से निकाह को खत्म कर सकती? सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यह तय करने के लिए सुनवाई शुरू की है कि क्या मुस्लिम महिला पति की सहमति के बिना ‘खुला’ के जरिए विवाह समाप्त कर सकती है.

क्या पति की रजामंदी के बिना मुस्लिम महिला 'खुला' से निकाह को खत्म कर सकती? सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
  • सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम महिला के 'खुला' के अधिकार पर सवाल उठाए हैं
  • कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ वकील शोएब आलम को एमिकस क्यूरी नियुक्त कर 22 अप्रैल को सुनवाई तय की है
  • केरल हाईकोर्ट ने माना था कि पति की सहमति के बिना भी मुस्लिम महिला को 'खुला' का अधिकार प्राप्त है
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि क्या कोई मुस्लिम महिला अपने पति की सहमति के बिना ‘खुला' के जरिए शादी को समाप्त कर सकती है. यह कदम केरल हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि इस्लामी कानून मुस्लिम महिला को एकतरफा रूप से ‘खुला' के जरिए विवाह खत्म करने का अधिकार देता है, और यह अधिकार पति की मर्जी पर निर्भर नहीं हो सकता.

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने इस मामले की अगली नियमित सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की है. कोर्ट ने वरिष्ठ वकील शोएब आलम को एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए कहा कि यह मामला मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न से संबंधित है, इसलिए एक्सपर्ट कानूनी सहयोग आवश्यक है.

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केरल हाई कोर्ट का क्या आदेश

याचिका में यह भी कहा गया है कि ‘खुला' मुस्लिम महिलाओं को विवाह समाप्त करने का एक मान्य इस्लामी और कानूनी तरीका प्रदान करता है, जिसके तहत महिला कुछ शर्तों के साथ विवाह से स्वतंत्र हो सकती है. केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया था कि यदि पति सहमति देने से इनकार कर दे, तब भी मुस्लिम महिला का ‘खुला' का अधिकार समाप्त नहीं होता.

खुला कब होगा वैध

अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘खुला' इस्लामी कानून द्वारा प्रदत्त एक स्वतंत्र अधिकार है, जिसकी तुलना पति के तलाक देने के अधिकार से की जा सकती है. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि खुला तभी वैध माना जाएगा जब पत्नी विवाह समाप्ति की घोषणा करे, मेहर या विवाहित जीवन में मिले लाभ लौटाने की पेशकश करे और उससे पहले सुलह की प्रभावी कोशिश की गई हो.

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अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया था कि पत्नी को पहले पति से तलाक मांगना चाहिए और अस्वीकार होने पर अदालत या काज़ी के पास जाना चाहिए.
 

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