- सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट मामले में जवाबदेही तय करने की बात कही
- कोर्ट ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए
- सुनवाई के दौरान पेलेट गन और बिहार में छात्रों की कस्टडी का मामला भी उठा
सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले की सुनवाई के बाद बड़ा आदेश पारित किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि लोकतंत्र में प्रदर्शन होते रहते हैं. उन्होंने कहा कि मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
नीट पेपर लीक प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. शीर्ष अदालत ने देशभर में किसी भी छात्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है. अदालत ने 18 साल से कम के छात्रों को तुंरत रिहा करने के आदेश दिया है. हालांकि, आपराधिक इतिहास वाले प्रदशर्नकारियों को कोई राहत नहीं मिलेगी. कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें जाएं. अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों का डिजिटल डेटा और व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी. कोर्ट ने केंद्र और सात राज्यों को नोटिस भी जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारों का पक्ष जानने के बाद गठित होगी हाई लेवल कमेटी. कोर्ट ने कहा कि वह हालिया घटनाओं की पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराएगा.
जिम्मेदारी तय होनी जरूरी- चीफ जस्टिस
चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिसने भी ज्यादती की है उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा कि इसकी जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए. चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो जांच का कोई मतलब नहीं.
पेलेट गन का हुआ जिक्र
CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पिटीशन में कुछ आरोप हैं. लेकिन अगर आप मोटे तौर पर देखें तो एक आरोप है पेलेट गन का इस्तेमाल, जिसकी वजह से 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी चली गई. इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के मामले के आरोप हैं. एक युवती को ICU में भर्ती कराया गया. कील वाली लाठियों के इस्तेमाल से जान का खतरा का आरोप. एक मीडियाकर्मी पर हमले का भी मामला है. उस पर बेरहमी से हमला किया गया. फिर सिविल ड्रेस में पुलिस ने हिंसा का आरोप है. एक और मामला जिसमें युवती को बिना उकसावे के पुलिसवाले ने थप्पड़ मारा था.
सरकार की दलील
केंद्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों पर बल प्रयोग को हल्के में नहीं ले रही है. ऐसे में कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान 250 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. सही जांच कर सच्चाई बाहर आनी चाहिए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मेहता को टोकते हुए कहा कि इसीलिए हम चाहते हैं कि जांच हो. तब मेहता ने कहा कि मैं नहीं समझता कि छात्रों ने हिंसा की. इसमें असमाजिक तत्व घुसे होंगे. उन्होंने कहा कि हमें असामाजिक तत्वों का डेटा पेश करेंगे. उन्होंने दावा किया ऐसे लोग प्रदर्शन में शामिल थे जो हत्या, रेप और NDPS केसों में शामिल थे.
जानिए क्या-क्या चली दलीलें
मेहता - SIT के लिए जजों के नाम तय हों
प्रशांत भूषण - हम दो पूर्व CJI के नाम दे रहे हैं
मेहता- नाम अदालत खुद तय करे
मेहता - अगर छात्रों को परेशानी हुई है तो ज्यादतती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो
मेहता - हम नहीं चाहते कि हमारे नामों का वो विरोध करें या उनके नामों का मैं विरोध करूं
मेहता - दिल्ली हाईकोर्ट के केसों को यहां ट्रांसफर करने पर हमें कोई आपत्ति नहीं
मेहता- सारे हाईकोर्ट से केस यहां आ सकते हैं
CJI - हमें इस मामले में हाई पावर कमेटी बनाने की जरूरत है
CJI: हम एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन करेंगे.
कई जगहों के प्रदर्शन पर याचिका
याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी थे. उन्होंने कहा कि हमने उनकी पहचान की है. याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि यह पूरे देश में हो रहे प्रोटेस्ट से जुड़ा मामला है. MP, नागपुर, बिहार, वगैरह में घटनाएं हुई. उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में नहीं, कई घटनाएं कोर्ट के सामने रखी गई है.
बिहार में भी कस्टडी का मामला उठा
सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने कहा कि बिहार सरकार ने कहा है कि वह FIR वापस ले रही है. लेकिन 150 से ज्यादा नाबालिग अभी भी कस्टडी में हैं. उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. 48 घंटे से ज्यादा की कस्टडी लोग रहे. 40 घंटे बाद मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया. एक लड़के की उम्र महज 13 साल की है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं