- याचिका के मुताबिक 24 जुलाई की रात जुनैद दिल्ली के आरएमएल अस्पताल से एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाकर लौट रहे थे.
- जुनैद का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया.
- पुलिस जानना चाहती थी कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए पैसा कहां से आ रहा था.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने वाले वालंटियर जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत, मानसिक प्रताड़ना और परिवार को धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.
याचिका में जुनैद ने अदालत से मांग की है कि जून-जुलाई 2026 में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामले में उनके या उनके परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए. साथ ही उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की है.
याचिका में क्या कहा गया है?
जुनैद मलिक ने अधिवक्ता नेहा राठी के जरिए दायर याचिका में कहा है कि पुलिस को किसी भी प्रदर्शन या सभा को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तितर-बितर करने का अधिकार है. पुलिस किसी नागरिक के साथ मारपीट, डराने-धमकाने या दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती.
याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस की सभी शक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के दायरे में आती हैं. इसलिए पुलिस मनमाने तरीके से या जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती.
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि कथित अवैध हिरासत, परिवार को दी गई धमकियों और पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए. साथ ही यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं.
जुनैद मलिक के साथ क्या हुआ?
याचिका के मुताबिक, 24 जुलाई 2026 की आधी रात को जुनैद मलिक दिल्ली के आरएमएल अस्पताल से एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाकर लौट रहे थे. इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया.
याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस ने उन्हें करीब पांच से छह घंटे तक अपने साथ रखा. इस दौरान उनका मोबाइल फोन जबरन अनलॉक कराया गया और उसका डेटा देखा गया. जुनैद का आरोप है कि पुलिस यह जानना चाहती थी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए पैसा कहां से आ रहा था.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूछताछ के बाद पुलिस उन्हें दिल्ली से काफी दूर देहरादून रोड पर एक सुनसान इलाके में छोड़कर चली गई, जहां से उन्होंने किसी तरह कैब लेकर वापस दिल्ली पहुंचने का इंतजाम किया.
परिवार के घर पर छापेमारी का भी आरोप
जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव स्थित उनके पैतृक घर पर बिना वारंट के छापेमारी की. उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनके परिवार को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?
जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या उत्पीड़नकारी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए. साथ ही कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यदि अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके.
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