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This Article is From Mar 07, 2025

विधायक अब्‍बास अंसारी को बड़ी राहत, गैंगस्‍टर एक्‍ट में सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गैंगस्टर एक्ट में विधायक अब्‍बास अंसारी को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि उनके आचरण का मूल्यांकन करेंगे. साथ ही कोर्ट ने 6 हफ्ते में पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जमानत पर विचार करेगा. 

विधायक अब्‍बास अंसारी को बड़ी राहत, गैंगस्‍टर एक्‍ट में सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने अंसारी को कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी है. (फाइल)
नई दिल्‍ली:

उत्तर प्रदेश के विधायक अब्‍बास अंसारी (Abbas Ansari) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गैंगस्टर एक्ट में अंसारी को अंतरिम जमानत दे दी है. इसके बाद अंसारी जेल से रिहा हो सकेंगे. अंसारी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कुछ शर्तें भी लगाई हैं. 

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतरिम जमानत के दौरान अंसारी के आचरण का मूल्यांकन करेंगे. साथ ही कोर्ट ने 6 हफ्ते में पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जमानत पर विचार करेगा. 

आपराधिक न्यायशास्त्र राहत उन्मुख: जस्टिस सूर्यकांत

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह कब तक जेल में रहेंगे. हमारा आपराधिक न्यायशास्त्र भी राहत उन्मुख है और जमानत पर रहने के दौरान याचिकाकर्ता के आचरण का मूल्यांकन करने के लिए हम उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करते हैं. इस दौरान अंसारी पर कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी गई है. 

इन शर्तों के साथ दी गई है अंसारी को अंतरिम जमानत: 

  1. लखनऊ में सरकारी आवास में रहेंगे. 
  2. जब भी जरूरत हो, जिला पुलिस प्रशासन और जिला न्यायालय से पूर्व अनुमति लेकर अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करें. 
  3. विशेष न्यायाधीश, ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना उत्तर प्रदेश नहीं छोड़ेंगे. 
  4. विचाराधीन मामलों के संबंध में कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे. बचाव का उसका अधिकार अप्रभावित रहेगा. 
  5. सत्र न्यायालय, चित्रकूट की संतुष्टि के लिए जमानत बांड प्रस्तुत करें. 
  6. तत्काल या किसी अन्य मामले में ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित हों, जिसके लिए वह अधिकारियों को एक दिन पहले सूचना दें.  

अंसारी ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 198 के तहत अपने खिलाफ दर्ज मामले में जमानत मांगी थी. 

लेखक के बारे में
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आशीष भार्गव
Senior Editor – Legal News
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