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बसपा का उत्तर प्रदेश में वह अभेद्य किला, जहां 2002 से उसे कोई हरा नहीं पाया

रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार को निधन हो गया. वो कैंसर से पीड़ित थे. वो रसड़ा सीट से 2012 से बसपा के टिकट पर विधायक चुने जा रहे थे. रसड़ा उत्तर प्रदेश की एक ऐसी सीट है, जहां से बसपा 2002 से ही चुनाव जीतती आ रही है.

बसपा का उत्तर प्रदेश में वह अभेद्य किला, जहां 2002 से उसे कोई हरा नहीं पाया
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वो कैंसर से पीड़ित थे. उनका दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. बलिया के रसड़ा सीट के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर बसपा प्रमुख मायावती ने गहरा दुख जताया है. उनका निधन बसपा के लिए बहुत बड़ी क्षति है, क्योंकि वो उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के एक मात्र विधायक थे. रसड़ा उत्तर प्रदेश की एक ऐसी सीट है, जिसे बीजेपी केवल एक बार ही जीत पाई है. यहां तक की 2022 के चुनाव में बीजेपी की वहां जमानत तक जब्त हो गई थी. 

रसड़ा में कब कौन जीता

उमाशंकर सिंह 2012 से रसड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. उन्होंने 2017 और 2022 का चुनाव भी रसड़ा से जीता था. उनसे पहले 2002 और 2007 में बसपा के घूरा राम इस सीट से विधायक चुने गए थे. इस सीट पर बसपा ने पहला चुनाव 1993 में जीता था. उस चुनाव में घूरा राम बसपा के टिकट पर जीते थे. लेकिन 2008 के परिसीमन में यह सीट सामान्य सीट हो गई थी. इसके बाद से बसपा ने वहां से उमाशंकर सिंह को मैदान में उतारा था. इस सीट पर बीजेपी को एकमात्र जीत 1996 के चुनाव में मिली थी, जब उसके टिकट पर अनिल कुमार यहां से जीते थे. उस समय रसड़ा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. 

जमानत भी नहीं बचा पाई थी बीजेपी

BSP, Umashankar Singh, Rasara Assembly Seat

उमाशंकर सिंह रसड़ा विधानसभा सीट पर पहली बार 2012 में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे. उनका बुधवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था.

साल 2022 के चुनाव में रसड़ा में मुख्य मुकाबला बसपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के बीच हुआ था. सुभासपा ने वह चुनाव समाजवादी पार्टी के गठबंधन में लड़ा था. रसड़ा में मुकाबला कांटे का हुआ था.इस चुनाव में बीजेपी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था.बसपा के उमाशंकर सिंह को 87 हजार 887 और सुभासपा के महेंद्र को 81 हजार 304 वोट मिले थे.बीजेपी के बब्बन को केवल 24 हजार 235 वोट ही मिले थे. इस तरह उमाशंकर सिंह ने महेंद्र को छह हजार 583 वोटों के अंतर से मात दी थी. रसड़ा में बसपा को 43.82 फीसद और सुभासपा को 40.54 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी को 12.08 फीसदी वोट ही मिले थे. रसड़ा में बीजेपी जमानत बचाने के लिए जरूरी कुल वोटों का 16.6 फीसद वोट हासिल नहीं कर पाई थी. इस वजह से उसकी जमानत रसड़ा में जब्त हो गई थी.

उमाशंकर सिंह के निधन के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने घोषणा की है कि अगर उमाशंकर सिंह के परिवार ने इच्छा जताई तो रसड़ा में उनके बेटे को टिकट दिया जाएगा. अगर उमाशंकर सिंह का परिवार रसड़ा में अपना दावा ठोकता है तो वहां की लड़ाई फिर एक बार दिलचस्प हो जाएगी. 

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