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रेणुकास्वामी मर्डर केस में कन्नड़ एक्टर दर्शन को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

कन्नड़ एक्टर दर्शन को रेणुकास्वामी मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने इस मामले में दर्शन की जमानत याचिका खारिज कर दी है.

रेणुकास्वामी मर्डर केस में कन्नड़ एक्टर दर्शन को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

रेणुकास्वामी मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ एक्टर दर्शन को जमानत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने ने कर्नाटक सरकार से कहा कि वह यह पक्का करें कि रेणुकास्वामी मर्डर केस में 60 अहम गवाहों की जांच एक साल के अंदर पूरी हो जाए. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट गवाहों की जांच के लिए रोजाना के आधार पर सुनवाई कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि अगर ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं होती है, तो एक्टर दर्शन जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच दर्शन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने जेल मैनुअल के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं दिए जाने की मांग की है.

सुनवाई में तेजी करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने  बेंगलुरु की एक कोर्ट को रेणुकास्वामी मर्डर केस में सुनवाई तेजी से करने का निर्देश दिया. इस केस में एक्टर दर्शन और अन्य लोग शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि अब तक इस मामले में जो प्रगति हुई है, वह 'बहुत धीमी' है. बेंच ने कर्नाटक सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि दर्शन को जेल की वे सभी सुविधाएं दी जाएं, जिनका हकदार एक विचाराधीन कैदी होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के सिविल और सेशंस जज की एक रिपोर्ट भी देखी, जिसमें पता चला कि इस केस में 3 नवंबर, 2025 को आरोप तय किए गए थे. कोर्ट ने पाया कि पिछले सात महीनों में, अभियोजन पक्ष केवल 10 गवाहों की ही जांच कर पाया है. अभियोजन पक्ष प्राथमिकता के आधार पर 60 गवाहों की जांच करना चाहता है, जो आरोपियों की भूमिका को साबित करने के लिए बहुत जरूरी हैं.

'गवाहों की जांच पूरी होने में लग जाएगा लंबा वक्त'

बेंच ने कहा, 'हमारा मानना ​​है कि जहां तक ​​ट्रायल की बात है, अब तक इसमें हुई प्रगति बहुत धीमी है. यह सच है कि बचाव पक्ष के वकील जिरह करने में समय ले रहे हैं. लेकिन अगर ट्रायल इसी गति से चलता रहा, तो 60 गवाहों की जांच पूरी होने में ही बहुत लंबा समय लग जाएगा. ऐसी परिस्थितियों में, यह ट्रायल कोर्ट का काम है कि वह यह सुनिश्चित करे कि गवाहों की जांच नियमित आधार पर हो और किसी भी मामूली बहाने पर सुनवाई स्थगित न की जाए.'

दर्शन की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि अभियोजन पक्ष 272 गवाहों की जांच करना चाहता है, लेकिन पिछले सात महीनों में केवल 10 गवाहों की ही जांच हो पाई है. रोहतगी ने यह भी दलील दी कि एक्टर को एक क्वारंटाइन सेल में रखा गया है और उन्हें जेल के अन्य कैदियों से मिलने-जुलने की इजाजत नहीं है. राज्य की ओर से पेश हुए सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि दर्शन को ऐसी जगह पर रखा गया है जिसे महामारी के दौरान क्वारंटाइन सेल कहा जाता था और उन्होंने इस दावे को गलत बताया कि उन्हें दूसरों से मिलने-जुलने की इजाजत नहीं है.

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