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This Article is From Apr 30, 2025

अब एसिड पीड़ितों और दिव्यांगों को भी मिलेगा बैंकिंग सेवाओं का फायदा, SC का बड़ा फैसला

एसिड हमलों की वजह से चेहरा खराब होने या दृष्टि दोष वाले व्यक्ति भी अब बैंकिंग और ई-गवर्नेंस सेवाओं लाभ उठा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डिजिटल एक्सेस का अधिकार जीने के अधिकार का एक अभिन्न अंग है.

अब एसिड पीड़ितों और दिव्यांगों को भी मिलेगा बैंकिंग सेवाओं का फायदा, SC का बड़ा फैसला
एसिड पीड़ितों और दिव्यांगों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला.
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड पीड़ितों और दिव्यांगों के लिए बड़ा फैसला सुनाते हुए डिजिटल KYC मानदंडों में संशोधन के आदेश दिए हैं. अब एसिड हमलों के कारण चेहरा खराब होने या दृष्टि दोष वाले व्यक्ति भी बैंकिंग और ई-गवर्नेंस सेवाओं लाभ उठा सकेंगे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सरकार को 20 दिशा निर्देश जारी किए हैं. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच  ने फैसला सुनाते हुए कहा कि डिजिटल एक्सेस का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का एक अभिन्न अंग है. कोर्ट ने ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की जरूरत के मामले पर दाखिल जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया.

एसिड पीड़ितों को KYC प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवैधानिक प्रावधान याचिकाकर्ताओं को KYC प्रक्रिया में शामिल होने का वैधानिक अधिकार प्रदान करते हैं. यह जरूरी है कि डिजिटल KYC दिशा-निर्देशों को एक्सेसिबिलिटी कोड के साथ संशोधित किया जाए. समकालीन युग में जहां आर्थिक अवसर आदि डिजिटल युग के माध्यम से हैं, अनुच्छेद 21 को ऐसी तकनीक के प्रकाश में फिर से व्याख्या करने की जरूरत है. यहां याचिकाकर्ता चेहरे की दुर्बलता से पीड़ित हैं. अदालत ने कहा कि उन्होंने KYC प्रक्रिया का संचालन करने में उनकी असमर्थता को भी उजागर किया है. जिसके लिए उन्हें अपने सिर को हिलाने, अपने चेहरे को सही स्थिति में रखने जैसे दृश्य कार्य करने की आवश्यकता होती है.

सुप्रीम कोर्ट की अहम बातें

  • डिजिटल बुनियादी ढांचे, कौशल और सामग्री तक असमान पहुंच की विशेषता वाला डिजिटल विभाजन न केवल दिव्यांग व्यक्तियों पर बल्कि ग्रामीण आबादी, वरिष्ठ नागरिकों, आर्थिक रूप से कमजोर समुदाय और भाषाई अल्पसंख्यकों के बड़े हिस्से पर भी व्यवस्थित बहिष्कार को जारी रखता है.
  •  ⁠डिजिटल विभाजन को पाटना अब नीतिगत विवेक का मामला नहीं रह गया है, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन को सुरक्षित करने के लिए संवैधानिक अनिवार्यता बन गया है. इसलिए डिजिटल पहुंच का अधिकार जीने और स्वतंत्रता के अधिकार का एक अलग घटक बनकर उभरता है.
  • जिसके लिए राज्य को न केवल विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए बल्कि ऐतिहासिक रूप से बहिष्कृत हाशिए पर पड़े लोगों के लिए भी समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सक्रिय रूप से डिजाइन और कार्यान्वित करना होगा.

एसिड पीड़ितों के बैंक खाते खोले जाने पर क्या कहा?

अदालत ने कहा कि चेहरे की दुर्बलता और विकृति की वजह से वह कई कामों को करने में असमर्थ हैं. इसकी वजह से उन्हें देरी का सामना करना पड़ता है या वे अपनी पहचान स्थापित करने, बैंक खाते खोलने या आवश्यक सेवाओं या सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में असमर्थ होते हैं. अदालत ने कहा कि संवैधानिक और कानूनी प्रावधान पीड़ित याचिकाकर्ताओं को डिजिटल KYC में पहुंच और उचित समायोजन की मांग करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करते हैं.

दिव्यांग ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं से वंचित न रहें

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा उठाया गया था, ताकि य़ह सुनिश्चित किया जा सके कि दिव्यांग ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं से वंचित न रहें. इसके अलावा याचिका में दिव्यांगों के लिए वैकल्पिक KYC प्रक्रियाओं की भी मांग की गई थी, जिसमें एसिड अटैक पीड़ित भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी दृष्टि खो दी है. 
 

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